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Iran US War: ईरान-अमेरिका सीजफायर के बीच कतर में कार्गो शिप पर हमला, ब्रिटिश सेना ने क्या कहा?

by Amit Dubey
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Iran US War

Iran US War: बीते 28 फरवरी को अमेरिका के द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद इन दोनों देशों के बीच टेंशन काफी बढ़ गई है. इसका खामियाजा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आने-जाने वाले जहाजों के देशों को भी भुगतना पड़ रहा है.

Iran US War: पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर दिया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से विश्व के कई देशों के लिए एनर्जी सप्लाई बुरे तरीके से प्रभावित हुई है. हालांकि, ईरान-अमेरिका के बीच इस तनाव को खत्म करने को लेकर दोनों देश एक शांति समझौते के करीब होते हुए बताए जा रहे हैं. लेकिन यह डील कब तक पूरी होगी, इसपर भी अभी संशय है.

इस बीच खाड़ी देश कतर से एक बड़ी खबर सामने आई है. यहां एक कार्गो शिप पर जोरदार हमला कर दिया गया है. इस हमले के बाद शिप में आग लग गई. इससे आशंका है कि यह स्थिति ईरान-अमेरिका के बीच जारी सीजफायर को बिगाड़ सकती है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.

दोहा से 23 समुद्री मील दूर हमला

न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, कतर के समुद्री तट पर एक कार्गो शिप पर हमला किया गया है. ब्रिटिश सेना ने बताया कि रविवार को एक अज्ञात हवाई हमले में कार्गो शिप में आग लग गई. यह हमला ईरान-अमेरिका के बीच जारी अस्थाई सीजफायर के बाद फारस की खाड़ी में जहाजों हुए किसी हमले का ताजा मामला है. हमले के बारे में आगे की जानकारी देते हुए यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर (यूकेएमटीओ) ने बताया कि अटैक के बाद जहाज में आग लग गई. हालांकि, इसके बाद में आग को बुझा लिया गया. ब्रिटिश सेना ने हमले की जगह बताते हुए कहा कि यह हमला कतर की राजधानी दोहा से 23 समुद्री मील यानी कि करीब 43 किमी उत्तर-पूर्व में हुआ. अभी तक इस घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी सामने नहीं आई है. इसके साथ ही इस हमले की किसी ने जिम्मेदारी भी नहीं ली है.

पिछले एक हफ्ते में कई हमले

जानकारी के अनुसार, पिछले एक हफ्ते में फारस की खाड़ी में कई जहाजों को निशाना बनाया गया है. शुक्रवार को अमेरिका ने ईरान के तेल टैंकरों पर हमला किया था. इस हमले को लेकर अमेरिका ने कहा था कि ये जहाज ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे. वहीं, इसके बाद ईरान की सेना ने रविवार को अपनी चेतावनी को दोहराते हुए कहा कि ईरानी तेल टैंकरों या कर्मशियल जहाजों पर किसी भी हमले का जवाब क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों में से किसी एक और दुश्मन के जहाजों पर ‘भारी हमले’ से दिया जाएगा.

सीजफायर अभी भी लागू- अमेरिका

बीते 28 फरवरी को अमेरिका के द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद इन दोनों देशों के बीच टेंशन काफी बढ़ गई है. इसका खामियाजा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आने-जाने वाले जहाजों के देशों को भी भुगतना पड़ रहा है. होर्मुज पर ईरानी पाबंदी ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चैन को प्रभावित किया है और इससे कई देशों में तेल, गैस की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है.
वहीं, अमेरिकी ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ईरान-अमेरिका के बीच एक महीने से लागू सीजफायर अभी भी प्रभावी है. लेकिन ईरान के द्वारा होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर पाबंदी और अमेरिका के द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी ने दुनिया को परेशान कर रखा है. सभी चाहते हैं कि जल्द से जल्द ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता हो ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पहले की तरह खुल सके.

यह भी पढ़ें: हंतावायरस से प्रभावित शिप पहुंचा स्पेन के कैनेरी द्वीप, 2 भारतीय भी हैं सवार; जानें क्या बोला WHO?

News Source: PTI

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