Home Latest News & Updates बड़े संकल्प, कड़ी मेहनत और राष्ट्र की सेवा…, World Student Day पर डॉ. कलाम के जीवन से लें सीख

बड़े संकल्प, कड़ी मेहनत और राष्ट्र की सेवा…, World Student Day पर डॉ. कलाम के जीवन से लें सीख

by Neha Singh 15 October 2026, 4:45 PM IST (Updated 15 October 2026, 4:54 PM IST)
15 October 2026, 4:45 PM IST (Updated 15 October 2026, 4:54 PM IST)
A.P.J Abdul Kalam

World Student Day: हर छात्र को जीवन में निरंतर मेहनत करने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा की जरूरत होती है. भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन हमें मेहनत करने और अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा देता है. बचपन में अखबार बांटकर अपने परिवार की मदद करने वाले कलाम, अपनी कड़ी मेहनत और सीखने की कभी न खत्म होने वाली चाहत के दम पर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचे. आज भी उनका जीवन छात्रों को बड़े सपने देखने, असफलताओं से सीखने और अपने लक्ष्यों की दिशा में लगातार मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है. उनकी जयंती यानी 15 अक्टूबर को हर साल ‘विश्व छात्र दिवस’ मनाया जाता है. यह दिन हमें याद दिलाता है कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए और शिक्षा के प्रति गहरा जुनून हो, तो किसी का भी जीवन पूरी तरह बदला जा सकता है. यहां जानें ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भारत के विकास में कितना योगदान दिया और आप उनसे क्या सीख सकते हैं.

एक सवाल ने बदला जीवन

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था. उनका पूरा नाम अवुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था. वे एक साधारण परिवार से थे और बचपन में उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा. अपने परिवार की मदद के लिए उन्होंने अखबार भी बांटे, लेकिन कोई भी परिस्थिति ने उन्हें उनका सपना पूरा करने से नहीं रोक सकी. अपनी शुरुआती शिक्षा के दौरान ही विज्ञान में कलाम की रुचि बढ़ने लगी थी. कहा जाता है कि जब वे पांचवीं कक्षा में थे, तब उनके टीचर ने उन्हें समझाया था कि पक्षी कैसे उड़ते हैं. इस पाठ ने उनके मन में उड़ने वाली मशीनों और विमानों के प्रति एक जिज्ञासा जगा दी, जिसने आगे चलकर उनके करियर की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई.

मिसाइल मैन से बने भारत के राष्ट्रपति

उन्होंने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के साथ काम किया. उन्होंने भारत के पहले स्वदेशी सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल, SLV-III के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया. 1980 में इस लॉन्च व्हीकल ने रोहिणी सैटेलाइट को पृथ्वी की ऑर्बिट में लॉन्च किया. इसके बाद कलाम DRDO में शामिल हुए और इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP) का नेतृत्व किया. वे वहां मुख्य कार्यकारी और मुख्य वैज्ञानिक थे. उन्हीं के नेतृत्व में भारत ने पांच सबसे शक्तिशाली और रणनीतिक मिसाइलों का निर्माण किया- पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, आकाश और नाग. देश के मिसाइल कार्यक्रम में उनकी अहम भूमिका के कारण, उन्हें “भारत का मिसाइल मैन” कहा जाने लगा.

साल 1997 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था. साल 2000 में वे भारत के राष्ट्रपति बने और जनता के बीच “पीपल्स प्रेसिडेंट” के नाम से मशहूर हुए. उनका मानना ​​था कि देश को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए साइंस और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. वे आज भी युवाओं को अपने आइडियाज से प्रेरित करते हैं.

डॉ. कलाम के जीवन से छात्रों को लेनी चाहिए ये 5 सीख

बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करें

    डॉ. कलाम हमेशा छात्रों को बड़े सपने देखने के लिए प्रोत्साहित करते थे. उनका मानना ​​था कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सबसे पहले अपना एक लक्ष्य तय करना बहुत जरूरी है. अगर कोई लक्ष्य तय न हो, तो उसे हासिल करने की दिशा में प्रयास करना मुश्किल हो जाता है. हालांकि, सिर्फ सपने देखना ही काफी नहीं है. उन सपनों को सच करने के लिए कड़ी मेहनत, धैर्य और एक सही योजना की आवश्यकता होती है. डॉ. कलाम का जीवन यह दिखाता है कि, आपके जीवन की शुरुआत कहां से हुई, इससे फर्क नहीं पड़ता, आप अपने लक्ष्यों को पाने के लिए कितनी मेहनत करते हैं, यह सबसे जरूरी है. छात्रों को भी केवल परीक्षाओं में अच्छे अंक लाने पर ही ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए. उन्हें अपनी रुचियों को पहचानना चाहिए और सोचना चाहिए कि वे भविष्य में क्या करना चाहते हैं. इसके बाद, उन्हें अपने लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में हर दिन छोटे-छोटे कदम उठाने चाहिए.

    असफलता से डरें नहीं, उससे सीखें

      अपनी पढ़ाई के दौरान, हर छात्र को कभी न कभी असफलता का सामना करना पड़ता है. हो सकता है कि किसी को कम अंक मिलें, किसी प्रतियोगिता में चयन न हो पाए या किसी विषय को समझने में कठिनाई हो. ऐसे में, कई छात्र निराश हो जाते हैं और हार मान लेते हैं. डॉ. कलाम हमें सिखाते हैं कि असफलता को अपनी कोई कमी मानने के बजाय, उससे सीखने की कोशिश करनी चाहिए. उनका कहना था कि FAIL का मतलब- ‘First Attempt In Learning’ होता है. इसलिए अगर आपको किसी परीक्षा में कम नंबर मिलते हैं, तो खुद को कम समझने के बजाय यह पता लगाएं कि कहां गलती हो रही है. जहां गलती हो रही है, वहां ज्यादा ध्यान दें. हर रोज मेहनत करने से सारी गलतियां ठीक हो सकती हैं.

      सवाल पूछने की आदत डालें

        डॉ. कलाम के जीवन में जिज्ञासा की बहुत बड़ी भूमिका थी. बचपन में उनके टीचर के एक सवाल ने उनका जीवन बदल दिया और उन्हें विज्ञान की दुनिया की ओर ले गया. इससे पता चलता है कि कोई भी बड़ी उपलब्धि एक साधारण सवाल से शुरू हो सकती है. उनका कहना था कि पढ़ाई करते समय छात्रों को केवल जवाब रटने पर ध्यान नहीं देना चाहिए. यह समझना जरूरी है कि चीजें कैसे काम करती हैं और उनके पीछे क्या कारण हैं. अगर कोई विषय समझ नहीं आ रहा है, तो टीचर से सवाल पूछने में संकोच नहीं करना चाहिए. किताबों के अलावा, अपने आस-पास की दुनिया को देखकर भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है.

        विज्ञान के प्रयोग करना, नई किताबें पढ़ना और अलग-अलग विषयों पर चर्चा करना, अपने ज्ञान को बढ़ाने के बेहतरीन तरीके हैं. इसलिए याद रखें, सवाल पूछना कमजोरी की निशानी नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि आप किसी विषय को गहराई से समझने की सच्ची इच्छा रखते है.

        अनुशासन और कड़ी मेहनत को अपनी आदत बनाएं

          किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल टैलेंट काफी नहीं होता, इसके साथ अनुशासन और लगातार कड़ी मेहनत का होना भी जरूरी है. अक्सर छात्र बहुत उत्साह के साथ अपनी पढ़ाई शुरू करते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद उनमें आलस आ जाता है, जिससे वे अपने लक्ष्यों तक पहुंचने में भटक जाते हैं. डॉ. कलाम का जीवन हमें सिखाता है कि सफलता पाने के लिए अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित होना जरूरी है. छात्रों को अपनी पढ़ाई के लिए एक पक्का शेड्यूल बनाना चाहिए. उन्हें मुश्किल विषयों को समझने के लिए ज्यादा समय देना चाहिए. छात्रों के लिए यह भी जरूरी है कि वे अपनी गलतियों को पहचानें और उसके अनुसार अपनी प्रैक्टिस करें.

          अगर आपका कोई बड़ा लक्ष्य है, तो उसे छोटे-छोटे और आसानी से पूरे किए जा सकने वाले हिस्सों में बांट लें. एक ही बार में पूरा सिलेबस पढ़ने की कोशिश करने के बजाय, हर दिन एक-एक चैप्टर पढ़ने का टारगेट रखें. इससे पढ़ाई का दबाव कम होता है और तैयारी ज्यादा बेहतर तरीके से हो पाती है. लगातार किए गए छोटे-छोटे प्रयास ही एक दिन बड़े परिणाम दे सकते हैं.

          राष्ट्र की सेवा करें

            डॉ. कलाम का सपना था कि भारत एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बने. उन्होंने देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अहम योगदान दिया. उनका जीवन दिखाता है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छी नौकरी पाना या पैसा कमाना ही नहीं होना चाहिए. ज्ञान का असली मूल्य तब होता है, जब उसका इस्तेमाल सामाजिक समस्याओं को सुलझाने और दूसरों की मदद करने के लिए किया जाए. अपनी शिक्षा और कौशल के जरिए, छात्र देश के भविष्य के विकास में योगदान दे सकते हैं.

            इसका मतलब यह नहीं है कि हर किसी को वैज्ञानिक या कोई बड़ा अधिकारी ही बनना चाहिए. कोई व्यक्ति बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए शिक्षक बन सकता है, दूसरों की देखभाल के लिए डॉक्टर बन सकता है या नई तकनीकें विकसित करने के लिए इंजीनियर बन सकता है. किसी भी क्षेत्र में ईमानदारी से काम करके समाज में एक सार्थक बदलाव लाया जा सकता है. यही कारण है कि वे राष्ट्रपति पद से हटने के बाद भी विद्यार्थियों से मिलते रहे और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करते रहे.

            अंतिम पल छात्रों के बीच बीते

            डॉ. कलाम का जीवन केवल एक साधारण परिवार से उठकर भारत के राष्ट्रपति बनने की कहानी नहीं है. यह निरंतर सीखते रहने, अपने काम के प्रति अटूट समर्पण की भी कहानी है. शिक्षा के प्रति वे इतने समर्पित थे संयोग से उनका निधन भी छात्रों के बीच हुआ. 27 जुलाई 2015 को डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जब शिलांग के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) में छात्रों को संबोधित कर रहे थे. अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ा. बेथानी अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. डॉ. कलाम का मानना ​​था कि युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं. उनका दृढ़ विश्वास था कि सही शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और कड़ी मेहनत के दम पर भारत तरक्की कर सकता है.

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