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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- संपत्ति संवैधानिक अधिकार, किसी को इससे वंचित नहीं किया जा सकता

by Sachin Kumar 3 January 2025, 1:39 PM IST (Updated 4 January 2025, 12:17 PM IST)
3 January 2025, 1:39 PM IST (Updated 4 January 2025, 12:17 PM IST)
Proper compensation given property SC constitutional right

Land Acquisition Compensation : मुआवजे में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि किसी भी शख्स को मुआवजा में देरी के दौरान मार्केट प्राइज के हिसाब से पैसा लेने का अधिकार है.

Land Acquisition Compensation : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जमीन के मुआवजे में देरी को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेषाधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि यदि सरकार की तरफ से अधिग्रहित जमीन के लिए मुआवजे के भुगतान में देरी होने पर जमीन का मालिक अपने प्लॉट का वर्तमान के मार्केट प्राइज के अनुसार भुगतान लेने का हकदार बन जाता है. वहीं, कोर्ट ने भी माना कि संपत्ति का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार (Constitutional Rights) है. इसलिए किसी भी शख्स को मुआवजा दिए बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता है.

अनुच्छेद 300-ए में मानव अधिकार

सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि संविधान (44वां संशोधन) अधिनियम, 1978 की वजह से संपत्ति का अधिकार फंडामेंटल राइट्स का हिस्सा नहीं रह गया. हालांकि, यह कल्याणकारी राज्य में मानव अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 300-ए के तहत संवैधानिक अधिकार बना हुआ है. संविधान के अनुच्छेद 300-ए में व्यवस्था है कि किसी भी व्यक्ति का कानून के अधिकार के बिना संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है.

नहीं मिल पाया मुआवजा

शीर्ष अदालत ने बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर परियोजना (BMICP) के लिए भूमि अधिग्रहण से संबंधित मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट के नवंबर 2022 के फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर गुरुवार को अपना फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून के मुताबिक उचित मुआवजा का अधिकार रखता है. लेकिन राज्य के KIADB के अधिकारियों के सुस्त रवैये की वजह से अपीलकर्ता को मुआवजा नहीं मिल पाया है. पीठ ने आगे कहा कि अधिसूचना जारी करने के बाद जमीन का अधिग्रहण करने शुरू कर दिया लेकिन मालिकों को दिया जाने वाले मुआवजे के लिए कोई आदेश नहीं जारी किया गया. यही वजह रही कि भूमि अधिग्रहण अधिकारी को 2019 कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही का सामना करना पड़ा. हालांकि, उन्होंने 2003 के बाजार मूल्य पर मुआवजा दिए जाने की अनुमति दे दी.

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