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Mumbai के लोगों की सांसों पर मंडराया संकट, हवा हुई ‘मॉडरेट’, बांद्रा से वर्ली तक छाई धुंध की चादर

by Preeti Pal
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मुंबई के लोगों की सांसों पर मंडराया संकट, हवा हुई 'मॉडरेट', बांद्रा से वर्ली तक छाई धुंध की चादर

Mumbai Worst AQI: अगर आप भी मायनगरी मुंबई में रहते हैं, तो ये खबर आपके लिए ही है. दरअसल, देश की धड़कन कही जाने वाली ये नगरी अब हवा के मामले में भी थोड़ी भारी हो रही है.

21 February, 2026

मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी में अब हवा भी थोड़ी भारी होने लगी है. अगर आप सोच रहे थे कि समंदर की लहरें शहर की आबोहवा को एकदम चकाचक रखेंगी, तो आप गलत हैं. ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, मायानगरी मुंबई ने फरवरी महीने का अपना 5वां सबसे खराब एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI दर्ज किया है. सीपीसीबी के ‘समीर’ ऐप के अनुसार, मुंबई शहर का औसत एक्यूआई 130 रहा, जिसे मॉडरेट यानी मीडियम क्लास में रखा गया है.

हाल है बेहाल

शुक्रवार की शाम जब मुंबईकर अपने दफ्तरों से घर लौट रहे थे, तब शहर के अलग-अलग कोनों से पॉल्यूशन के आंकड़े डराने वाले थे. अगर आप बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स यानी BKC के बिजनेस हब में हैं, तो वहां एक्यूआई 172 दर्ज किया गया. वहीं, भीड़भाड़ वाले कुर्ला में ये आंकड़ा 160 था. देवनार, जो अपने डंपिंग ग्राउंड के लिए जाना जाता है, वहां भी हवा का लेवल 161 रहा.
लेकिन आज की सबसे चौंकाने वाली खबर आई वर्ली से. समंदर के किनारे बसे इस मंहगे और आलीशान इलाके में एक्यूआई 256 तक पहुंच गया, जो खराब कैटेगरी में आता है. यानी यहां की हवा में सांस लेना फिलहाल सेहत के लिए किसी चैलेंज से कम नहीं है.

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फरवरी का रिपोर्ट कार्ड

इस साल फरवरी में मुंबई की हवा ने कई बार करवट बदली है. महीने की शुरुआत में 2 और 3 फरवरी को एक्यूआई 140 के पार चला गया था. हालांकि, बीच में 10, 18 और 19 फरवरी को थोड़ी राहत मिली थी जब ये आंकड़ा 100 के नीचे रहा, लेकिन ज्यादातर टाइम ये 3 नंबर्स में ही बना रहा. अगर हम पिछले महीने यानी जनवरी से तुलना करें, तो वहां 8 दिन ऐसे थे जब AQI ठीक-ठाक कैटेगरी में था, लेकिन फरवरी ने पॉल्यूशन के मामले में पिछले रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ना शुरू कर दिया है.

क्या कहता है हेल्थ कार्ड

सीपीसीबी के रूल्स के मुताबिक, 100 तक का AQI ठीक माना जाता है, लेकिन जैसे ही ये 101 से 200 के बीच पहुंचता है, तो ये उन लोगों के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है जिन्हें अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी या हार्ट प्रोब्लम है. हवा के इस लेवल पर बने रहने से सांस लेने में तकलीफ बढ़ सकती है, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए ये टाइम थोड़ा संभलकर रहने का है.
यानी अगली बार जब आप मरीन ड्राइव या वर्ली सी फेस पर वॉक करने के लिए निकलें, तो अपनी सेहत का ध्यान जरूर रखें.

News Source: Press Trust of India (PTI)

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