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दिल्ली में निजी स्कूल 1 अप्रैल से बिना अनुमति नहीं वसूल सकेंगे फीस, नए सत्र से मनमानी शुल्क वसूली पर रोक

by Sanjay Kumar Srivastava 20 February 2026, 7:55 PM IST (Updated 23 February 2026, 11:27 AM IST)
20 February 2026, 7:55 PM IST (Updated 23 February 2026, 11:27 AM IST)
दिल्ली में निजी स्कूल 1 अप्रैल से बिना अनुमति नहीं वसूल सकेंगे फीस, नए शैक्षणिक सत्र से मनमानी शुल्क वसूली पर रोक

Delhi Government: दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को उच्च न्यायालय में स्पष्ट किया कि निजी स्कूल 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र के लिए मनमानी फीस नहीं ले सकेंगे.

Delhi Government: दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को उच्च न्यायालय में स्पष्ट किया कि निजी स्कूल 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र के लिए तब तक फीस नहीं ले सकेंगे, जब तक कि वह नए ‘शुल्क कानून’ के तहत अनुमोदित न हो. सरकार ने स्कूल-स्तरीय शुल्क विनियमन समितियों (SLFRC) के गठन के अपने आदेश का पुरजोर बचाव किया. अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि समितियों के गठन पर रोक लगाने के परिणाम विनाशकारी होंगे. उन्होंने तर्क दिया कि अधिनियम के तहत स्वीकृत शुल्क के अतिरिक्त कोई भी वसूली अवैध होगी. मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें सरकार की 1 फरवरी की अधिसूचना को चुनौती दी गई है. सरकार का रुख स्पष्ट है कि नए शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से बिना आधिकारिक मंजूरी के अन्य फीस वसूली की अनुमति नहीं दी जाएगी. शैक्षणिक वर्ष शुरू होने से पहले शुल्क का प्रस्ताव देना जरूरी है.

सत्र से पहले निर्धारित हो जाए शुल्कः सरकार

उन्होंने कहा कि नए कानून के अनुसार नए शैक्षणिक सत्र से पहले शुल्क निर्धारित हो जाए. कहा कि यह आदेश स्कूलों, छात्रों और अभिभावकों के हित में है. स्कूल-स्तरीय शुल्क विनियमन समितियों (SLFRC) के गठन के सरकारी आदेश पर रोक लगाने की मांग करने वाले कई स्कूल संघों द्वारा दायर याचिकाओं का अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने विरोध किया. अदालत ने मामले की सुनवाई 24 फरवरी को तय की. कोर्ट ने दिल्ली सरकार द्वारा निजी स्कूलों के लिए SLFRC गठित करने की निर्धारित 10 फरवरी की समय सीमा को भी तब तक के लिए बढ़ा दिया. अदालत ने गैर-सहायता मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की कार्रवाई समिति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील से पूछा कि वे SLFRC क्यों नहीं गठित करना चाहते. इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिबल ने कहा कि 1 फरवरी की अधिसूचना कानूनी रूप से मान्य नहीं है, क्योंकि यह अधिनियम में निर्धारित समय सीमा को बदल देती है.

11 सदस्यीय पैनल तय करेगी फीस

उन्होंने कहा कि अधिनियम के तहत प्रक्रिया पिछले शैक्षणिक वर्ष के जुलाई में शुरू होनी चाहिए और सरकार पर जल्दबाजी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि शुल्क निर्धारण का अधिकार किसी और को दे दिया गया है और आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए प्रक्रिया को पूरा करना व्यावहारिक रूप से असंभव है क्योंकि कानून के अनुसार SLFRC पर सर्वसम्मत निर्णय आवश्यक है. याचिकाओं के जवाब में शिक्षा निदेशालय ने कहा है कि यदि अधिनियम को 1 अप्रैल से लागू नहीं होने दिया जाता है तो शुल्क की अवैध वसूली नहीं रुक पाएगी. मालूम हो कि स्कूल-स्तरीय शुल्क विनियमन समितियां (SLFRC) निजी स्कूलों में फीस वृद्धि को नियमित करने, पारदर्शिता लाने और मनमानी फीस वृद्धि को रोकने के लिए गठित 11 सदस्यीय पैनल है. दिल्ली में ये समितियां दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 2025 के तहत अनिवार्य हैं, जिसमें अभिभावक, शिक्षक और स्कूल प्रबंधन के प्रतिनिधि शामिल होते हैं. ये पैनल ही फीस तय करेगी. इसके बाद स्कूल प्रबंधन तीन साल तक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे.

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News Source: Press Trust of India (PTI)

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