Bombay High Court: बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को मुंबई की सड़कों पर बढ़ते अतिक्रमण पर कड़ी चिंता जताते हुए स्थिति को गंभीर करार दिया.
Bombay High Court: बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को मुंबई की सड़कों पर बढ़ते अतिक्रमण पर कड़ी चिंता जताते हुए स्थिति को गंभीर करार दिया. जस्टिस रविंद्र घुगे और अभय मंत्री की बेंच ने चेतावनी दी कि यदि अवैध निर्माणों पर लगाम नहीं कसी गई, तो अगले 20 वर्षों में निवासियों को चलने के लिए जगह नहीं मिलेगी और वे साइकिल या घोड़ों के इस्तेमाल पर मजबूर हो जाएंगे. अदालत ने स्थानीय नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन अतिक्रमणकारियों के सामने असहाय नजर आ रहा है. कोर्ट ने प्रशासन को फटकार लगाते हुए भविष्य के संकट के प्रति आगाह किया. अदालत ने ये टिप्पणियां उपनगरीय पवई के एक स्कूल द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान कीं. स्कूल ने अपने परिसर में अतिक्रमण के खिलाफ बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) की निष्क्रियता पर चिंता जताई थी. पीठ ने नगर निगम अधिकारियों से पूछा कि सार्वजनिक सड़कों पर अनधिकृत निर्माण कैसे हो सकते हैं और संबंधित उप नगर आयुक्त को शुक्रवार को अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया.
सड़कों पर अवैध कब्जा
कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि बीएमसी के पास ऐसे अतिक्रमणों को हटाने की इच्छाशक्ति, साहस या साधन नहीं है. बीएमसी मुंबई को अतिक्रमणकारियों के हवाले कर रही है. अदालत ने सवाल किया कि क्या नगर निकाय अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई करने में इतना असमर्थ है. पीठ यह देखकर स्तब्ध रह गई कि बीएमसी पीने का पानी मुहैया करा रही थी और पवई में उस जगह पर एक अस्थायी शौचालय सुविधा वैन भी खड़ी कर दी थी जहां अतिक्रमणकारियों ने सड़क पर कब्जा कर लिया था. कोर्ट ने कहा कि क्या बीएमसी इस तरह अतिक्रमणों को बढ़ावा नहीं दे रही है? यह एक गंभीर स्थिति है. अगर आप उन्हें पानी और शौचालय की सुविधा देना बंद कर देंगे तो वे चले जाएंगे. लेकिन आप उन्हें सुविधाएं थाली में परोस रहे हैं. अदालत ने कहा कि बीएमसी को वित्तीय राजधानी की सड़कों की स्थिति देखनी होगी. हर जगह सड़कों पर केवल एक या दो लेन बची है और फिर ट्रैफिक जाम हो जाता है. गाड़ियां चल नहीं पातीं. जाम में फंसी गाड़ियों की तुलना में पैदल चलना कहीं ज्यादा तेज है.
मुंबई की स्थिति पर कोर्ट चिंतित
अदालत ने कहा कि इस धरती पर लोगों का समय सीमित है और प्रत्येक व्यक्ति का प्रयास पर्यावरण और शहर को ऐसी अच्छी स्थिति में बनाए रखना होना चाहिए कि अगली पीढ़ी इसका लाभ उठा सके. हमारी अगली पीढ़ी को यह नहीं कहना चाहिए कि हम अपने शहर के प्रति लापरवाह रहे हैं. बीएमसी की वकील धृति कपाडिया ने अदालत को आश्वासन दिया कि वे एक हलफनामा प्रस्तुत करेंगी जिसमें याचिका में निर्दिष्ट अतिक्रमणों को हटाने की समय सीमा बताई जाएगी. ब्यूमोंट एचएफएसआई स्कूल और उसकी प्रधानाध्यापिका कल्याणी पटनायक द्वारा दायर याचिका में बीएमसी पर कर्तव्य की उपेक्षा का आरोप लगाया गया है और कहा गया है कि संस्थान के पास सड़क पर अतिक्रमण करने वाले झुग्गीवासियों को हटाने के बजाय नगर निकाय ने उन्हें शौचालय और पानी उपलब्ध कराकर उनकी सहायता की. बीएमसी की वकील कपाडिया ने अदालत को बताया कि नगर निकाय ने अतीत में अतिक्रमणकारियों को हटाने का प्रयास किया था, लेकिन वे हिंसक हो गए और अधिकारियों को धमकी दी थी.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
