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तेलंगाना से हरियाणा तक कांग्रेस ने साधे राज्यसभा के समीकरण, 6 उम्मीदवारों के नाम तय, सिंघवी पर फिर भरोसा

by Live Times
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तेलंगाना से हरियाणा तक कांग्रेस ने साधे राज्यसभा के समीकरण, 6 उम्मीदवारों के नाम तय, सिंघवी और फूलो देवी पर फिर भरोसा

Rajya Sabha Elections: राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी के बाद छह नेताओं के नाम का ऐलान किया गया है.

  • दिल्ली से खुशबू सिंह की रिपोर्ट

Rajya Sabha Elections: राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी के बाद छह नेताओं के नाम का ऐलान किया गया है. इस सूची में कुछ अनुभवी नेताओं को दोबारा मौका दिया गया है तो कुछ नए चेहरों को संसद के उच्च सदन में भेजने की तैयारी है. लेकिन इस सूची के पीछे सिर्फ नामों का ऐलान नहीं बल्कि कई राजनीतिक समीकरण भी छिपे हुए दिखाई देते हैं. इसमें तेलंगाना की रणनीति, हिमाचल प्रदेश की राजनीतिक पृष्ठभूमि और हरियाणा में सामाजिक संतुलन जैसे कई पहलू नजर आते हैं. कांग्रेस ने जिन छह उम्मीदवारों की घोषणा की है उनमें से दो नेताओं को दोबारा मौका दिया गया है. वरिष्ठ वकील और मौजूदा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी को तेलंगाना से फिर से राज्यसभा के लिए नामित किया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ से आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम को भी दोबारा उम्मीदवार बनाया गया है. इन दोनों नेताओं पर दोबारा भरोसा जताकर कांग्रेस ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि संसद में अनुभव और सामाजिक प्रतिनिधित्व दोनों को बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है.

करमवीर सिंह हरियाणा से जाएंगे उच्चसदन

फूलो देवी नेताम आदिवासी समुदाय से आती हैं और लंबे समय से पार्टी की सक्रिय नेता रही हैं, इसलिए उनके नाम को सामाजिक प्रतिनिधित्व के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है. हरियाणा से कांग्रेस ने करमवीर सिंह बौद्ध को उम्मीदवार बनाया है, जो दलित समुदाय से आते हैं और लंबे समय से पार्टी संगठन से जुड़े रहे हैं. वहीं हिमाचल प्रदेश से कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनुराग शर्मा को उम्मीदवार बनाया गया है. संगठन से जुड़े नेताओं को राज्यसभा के लिए चुनकर कांग्रेस यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं को भी आगे बढ़ने का मौका दिया जाएगा. दक्षिण भारत की बात करें तो कांग्रेस ने तमिलनाडु से एम. क्रिस्टोफर तिलक को उम्मीदवार बनाया है. तमिलनाडु में कांग्रेस अपने सहयोगी दलों के साथ गठबंधन में राजनीति करती है और राज्यसभा की यह सीट भी उसी राजनीतिक समझौते के तहत कांग्रेस के हिस्से में आई है. इस सूची में सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम को लेकर हो रही है, वह अभिषेक मनु सिंघवी का है. उन्हें तेलंगाना से एक बार फिर राज्यसभा के लिए नामित किया गया है. संसद में संवैधानिक और कानूनी मुद्दों पर उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए कांग्रेस उन्हें अपनी अहम आवाज मानती है.

तेलंगाना से नरेंद्र रेड्डी भी उम्मीदवार

इसके अलावा तेलंगाना से ही वेम नरेंद्र रेड्डी को भी उम्मीदवार बनाया गया है, जिन्हें राज्य की राजनीति में प्रभावशाली नेता माना जाता है. अगर इस सूची को राजनीतिक नजरिए से देखा जाए तो इसके पीछे कांग्रेस की कई रणनीतियां दिखाई देती हैं. तेलंगाना में दो उम्मीदवार उतारना उसी का हिस्सा माना जा रहा है. विधानसभा में संख्या बल को देखते हुए कांग्रेस के लिए एक सीट लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन दो उम्मीदवार उतारना सिर्फ चुनावी गणित नहीं बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है. कांग्रेस संसद में अपनी मजबूत कानूनी और बौद्धिक आवाज बनाए रखना चाहती है, इसलिए सिंघवी जैसे अनुभवी नेता को फिर से मौका दिया गया है. वहीं दूसरी तरफ वेम नरेंद्र रेड्डी की उम्मीदवारी को राज्य नेतृत्व और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के करीबी नेताओं को राजनीतिक महत्व देने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है.

अनुभव, संगठन और सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता

दूसरी बड़ी राजनीतिक पृष्ठभूमि हिमाचल प्रदेश से जुड़ी है. पिछले राज्यसभा चुनाव के दौरान हिमाचल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला था, जब क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस को झटका लगा और सीट भारतीय जनता पार्टी के खाते में चली गई थी. इस बार कांग्रेस ने हिमाचल से संगठन से जुड़े नेता को उम्मीदवार बनाकर यह संकेत देने की कोशिश की है कि पार्टी जमीनी संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है ताकि पिछली बार जैसी स्थिति दोबारा न बने. दिलचस्प बात यह है कि इन सीटों के लिए पार्टी के अंदर कई अन्य नामों की भी चर्चा चल रही थी, लेकिन अंत में उन्हें टिकट नहीं मिला. तेलंगाना में वरिष्ठ नेता वी. हनुमंत राव और युवा नेता जेट्टी कुसुमा कुमार के नामों की चर्चा थी, वहीं पूर्व राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी का नाम भी राजनीतिक हलकों में सामने आ रहा था. हालांकि अंतिम सूची में उन्हें जगह नहीं मिल पाई. इससे साफ है कि टिकट को लेकर पार्टी के अंदर काफी चर्चा और लॉबिंग चली, लेकिन आखिरकार कांग्रेस नेतृत्व ने अनुभव, संगठन और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए अंतिम सूची तय की.

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