Home Latest News & Updates आखिर Kharg Island में ऐसा क्या है जिसके तबाह होते ही घुटनों पर आ जाएगा Iran?

आखिर Kharg Island में ऐसा क्या है जिसके तबाह होते ही घुटनों पर आ जाएगा Iran?

by Preeti Pal
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ईरान के 'क्राउन ज्वेल' पर अमेरिकी स्ट्राइक, आखिर Kharg Island में ऐसा क्या है जिसके तबाह होते ही घुटनों पर आ जाएगा Iran?

Kharg Island: ईरान और यूएस बीच चल रही लड़ाई में अब पूरी दुनिया झुलस रही है. इस बीच अलग-अलग देशों में बैठे लोगों के दिमाग में एक सवाल जरूर उठा रहा है कि, आखिर खार्ग आइलैंड में ऐसा क्या है, जिसे लेकर ट्रंप बार-बार ईरान को धमका रहे हैं.

14 March, 2026

मिडिल ईस्ट में जारी वॉर अब उस मोड़ पर पहुंच गई है जहां पूरी दुनिया की नजरें एक छोटे से आइलैंड पर टिक गई हैं, जिसका नाम है- खा़र्ग आइलैंड. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के इस ‘क्राउन ज्वेल’ कहे जाने वाले आइलैंड के सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया है. ट्रंप ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए ये वॉर्निंग भी दे दी है कि अगला नंबर यहां की तेल फेसिलिटीज़ का हो सकता है. अब सवाल ये उठता है कि आखिर समुद्र के बीचों-बीच बसा ये छोटा सा टुकड़ा ईरान के लिए इतना कीमती क्यों है कि इसके बिना ईरान की सांसें अटक सकती हैं?

इकोनॉमी का पावरहाउस

खा़र्ग आइलैंड कोई मामूली द्वीप नहीं है, बल्कि ये ईरान के तेल नेटवर्क की रीढ़ है. ईरान जितना भी कच्चा तेल दुनिया को बेचता है, उसका 90 प्रतिशत हिस्सा इसी अकेले आइलैंड से होकर गुजरता है. आसान शब्दों में कहें तो ये ईरान का सबसे बड़ा ‘पेट्रोल पंप’ है जहां से दुनिया भर के टैंकरों में तेल भरा जाता है. 28 फरवरी को वॉर शुरू होने के बाद से अब तक ईरान यहां से रोजाना 11 लाख से 15 लाख बैरल कच्चा तेल एक्सपोर्ट कर रहा है. जब खाड़ी के दूसरे देशों ने हमले के डर से तेल भेजना बंद कर दिया था, तब भी खा़र्ग आइलैंड से तेल से लदे जहाज लगातार रवाना हो रहे थे.

क्या है आइलैंड के अंदर?

खा़र्ग आइलैंड ईरान के तट से करीब 26 किलोमीटर दूर समुद्र में है. यहां की बनावट और सुविधाएं इसे बेजोड़ बनाती हैं, जैसे बड़ी स्टोरेज कैपेसिटी. दरअसल, यहां तेल जमा करने के लिए बड़े-बड़े टैंक बने हैं. हाल ही में ईरान ने अपनी क्षमता में 20 लाख बैरल का इजाफा किया है. समुद्र के नीचे पाइपलाइनों का एक जाल बिछा है जो ईरान के सबसे बड़े ऑयल और गैस क्षेत्रों यानी अबूजर, फौरूजान और दोरूद को सीधे इस टर्मिनल से जोड़ता है. यहां ईरान की ‘फलात ईरान ऑयल कंपनी’ और ‘खा़र्ग पेट्रोकेमिकल कंपनी’ जैसे बड़े प्लांट हैं. फलात ईरान अकेले ही रोजाना 5 लाख बैरल तेल प्रोसेस करती है.

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ईरान के लिए ब्लैकआउट

ट्रम्प ने फिलहाल सिर्फ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है और तेल के बुनियादी ढांचे को छोड़ दिया है. ये एक तरह का ‘सॉफ्ट सिग्नल’ है कि अमेरिका जब चाहे ईरान की कमाई का जरिया बंद कर सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर खा़र्ग आइलैंड के तेल टर्मिनलों को नुकसान पहुंचता है, तो ईरान की सरकार और उसकी सेना के पास फंड की भारी किल्लत हो जाएगी. भले ही ये कोई परमाणु या बड़ा मिलिट्री सेंटर न हो, लेकिन इसके बिना ईरान का काम काज ठप हो जाएगा क्योंकि उसकी पूरी अर्थव्यवस्था इसी तेल पर टिकी है.

दुनिया पर असर

अगर खा़र्ग आइलैंड पर सीधा हमला होता है या अमेरिका इस पर कब्जा कर लेता है, तो इसका असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा. पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी. जेपी मॉर्गन की रिसर्च टीम ने चेतावनी दी है कि ऐसा होने पर ईरान जवाबी कार्रवाई के तौर पर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह से बंद कर सकता है, जिससे दुनिया भर में तेल का संकट पैदा हो जाएगा.

पुराना इतिहास

वैसे, खा़र्ग आइलैंड की अहमियत आज की नहीं है. 1984 के सीआईए (CIA) के दस्तावेजों में भी इसे ईरान के पेट्रोलियम सिस्टम का सबसे बड़ा और खास हिस्सा बताया गया था. 1960 और 70 के दशक में इसे खास तौर पर इसलिए विकसित किया गया था क्योंकि ईरान के बाकी तट इतने गहरे नहीं थे कि वहां बड़े ‘सुपरटैंकर’ जहाज आ सकें. सिर्फ खा़र्ग ही वो जगह थी जहां गहरे पानी की वजह से बड़े जहाजों में तेल भरना आसान था. आज जब वॉर अपने पीक पर है, खा़र्ग आइलैंड का फ्यूचर ही ये तय करेगा कि ईरान इस जंग में कितनी देर टिक पाएगा.

यह भी पढ़ेंः Iran की तेल की नब्ज पर Trump का वार, खा़र्ग आइलैंड के मिलिट्री बेस तबाह, अब इकोनॉमी की बारी

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