Middle East War : मिडिल ईस्ट में युद्ध ने भारी तनाव पैदा कर दिया है. ईरान युद्ध के बीच पेट्रोल और गैस के प्राइस में वृद्धि हुई है और इसको लेकर केंद्र सरकार ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है.
Middle East War : पश्चिम एशिया में गहराते संकट और युद्ध जैसे हालातों को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह सतर्क और सक्रिय नजर आ रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद के दोनों सदनों में दिए गए बयानों और रक्षा स्तर पर हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद अब सरकार ने 25 मार्च शाम 5 बजे संसद भवन में सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया है.
राजनीतिक एकजुटता का दिखाना
इस बैठक का उद्देश्य साफ है देश के अंदर राजनीतिक एकजुटता दिखाना और दुनिया को यह संदेश देना कि ऐसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट पर भारत एकजुट है. बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस जयशंकर समेत कई वरिष्ठ मंत्री और नेता शामिल होंगे. विपक्ष के भी सभी फ्लोर लीडर्स और अन्य नेता बैठक में शामिल होंगे. इसका मकसद है कि संकट की परिस्थिति में केंद्र सरकार विपक्ष को भरोसे में लेकर एक साझा रणनीति बनाना चाहती है.
कई पहलुओं पर जोर दिया
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्थिति को ‘अत्यंत चिंताजनक’ बताते हुए इसके कई पहलुओं पर जोर दिया था. उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है, ऐसे में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा है. साथ ही होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी चुनौती बन सकता है. प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि यह केवल आर्थिक नहीं, बल्कि एक बड़ा मानवीय संकट भी है.
इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक उच्च स्तरीय बैठक कर सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की. साथ ही चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान, तीनों सेनाओं के प्रमुख और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के चेयरमैन समीर वी. कामत भी शामिल हुए. मीटिंग में बदलते वैश्विक सुरक्षा हालात और भारत की सैन्य तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके.
खाड़ी देशों में रहते हैं एक करोड़ भारतीय
भारत की चिंता कई स्तरों पर है. खाड़ी देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय रहते हैं, जिनकी सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर उनकी सुरक्षित वापसी एक बड़ी चुनौती है. इसके अलावा क्षेत्र में तनाव बढ़ने से व्यापार मार्ग प्रभावित हो सकते हैं, जिससे महंगाई और ऊर्जा संकट का खतरा बढ़ सकता है. कूटनीतिक स्तर पर भारत खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में पेश कर रहा है, जो शांति और संवाद का समर्थन करता है.
कुल मिलाकर सरकार इस पूरे मुद्दे पर ‘होल ऑफ गवर्नमेंट + होल ऑफ पॉलिटिक्स’ यानी सभी स्तरों पर एकजुट होकर काम कर रही है. सर्वदलीय बैठक इसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि देश के भीतर सहमति बनाकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत संदेश दिया जा सके. यह साफ है कि भारत इस संकट को गंभीर और दीर्घकालिक चुनौती मानते हुए हर स्तर पर तैयारी में जुटा है.
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