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Welcome To Hell वाली धमकी के बीच लेबनान में कोहराम, इजरायली हमले में 3 journalists की मौत

by Preeti Pal
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Welcome To Hell वाली धमकी के बीच लेबनान में कोहराम, इजरायली हमले में 3 journalists की मौत

3 Journalists killed in Israeli strike: साउथ लेबनान में इजरायली हमले के दौरान कार को निशाना बनाने से 3 पत्रकारों की मौत हो गई है. अब इसे लेकर इलाके के लोगों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है.

28 March, 2026

मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध अब और भी ज्यादा डीप हो गई है. जहां एक तरफ ईरान ‘नर्क में स्वागत है’ जैसी वॉर्निंग के साथ अमेरिका को डरा रहा है. वहीं, दूसरी तरफ लेबनान के मोर्चे से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है. दरअसल, शनिवार को साउथ लेबनान में हुए एक इजरायली हमले ने 3 पत्रकारों की जिंदगी छीन ली. इस घटना ने एक बार फिर जंग के मैदान में जर्नलिस्ट्स की सेफ्टी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

कैसे हुआ हादसा?

ये हमला शनिवार की दोपहर को जेज़िन शहर में हुआ. खबरों के मुताबिक, इजरायली स्ट्राइक ने पत्रकारों की कार को निशाना बनाया. इस हमले में ‘अल मनार’ टीवी के रिपोर्टर अली शोएब और ‘अल मयादीन’ चैनल की रिपोर्टर फातिमा फतौनी की जान चली गई. फातिमा के साथ उनके भाई और कैमरामैन मोहम्मद फतौनी भी इस हमले का शिकार हो गए. इन पत्रकारों के संस्थानों ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे ‘टारगेटेड स्ट्राइक’ यानी जानबूझकर किया गया हमला बताया है. लेबनान में काम कर रहे मीडिया जगत के लिए ये एक बहुत बड़ा झटका है.

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इजरायल का दावा

इजरायली रक्षा बल IDF ने अली शोएब की मौत की पुष्टि तो की है, लेकिन उन पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं. IDF का दावा है कि अली शोएब पत्रकार के भेष में हिजबुल्लाह की एलीट ‘राडवान फोर्स’ का एक ‘आतंकवादी’ था. इजरायल का कहना है कि वो सालों से पत्रकार बनकर इजरायली सैनिकों की लोकेशन लीक कर रहा था और हिजबुल्लाह के प्रोपेगेंडा को फैलाने का काम कर रहा था. हालांकि, इजरायल ने इन दावों के सपोर्ट में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए हैं. साथ ही, फातिमा और मोहम्मद फतौनी की मौत पर इजरायल ने चुप्पी साधी हुई है. दूसरी तरफ, हिजबुल्लाह और लेबनान सरकार इस पर बुरी तरह भड़के हुए हैं. हिजबुल्लाह ने इसे ‘पत्रकारों की हत्या’ बताया है. लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इसे एक ‘बेशर्म अपराध’ कहा है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून की धज्जियां उड़ाता है.

खतरनाक लेबनान

‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ के अनुसार, लेबनान अब जर्नलिस्ट्स के लिए एक बहुत खतरनाक इलाका बन चुका है. संस्था का कहना है कि इजरायल का ये पुराना पैटर्न रहा है कि वो पत्रकारों पर बिना किसी सबूत के आतंकवादी होने का लेबल लगा देता है. वॉर के इस एक महीने में अब तक 1,100 से ज्यादा आम नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें 120 बच्चे भी शामिल हैं. 10 लाख से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं. लेबनान के लोगों में डर है कि इजरायल यहां भी वही यानी गाजा वाली रणनीति अपना रहा है, जहां आम नागरिकों और पत्रकारों को निशाना बनाया जाता है. नवंबर 2024 में हुए सीजफायर के बाद उम्मीद जगी थी कि शांति होगी, लेकिन ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के बाद भड़की इस आग ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया है. यानी ये कहा जा सकता है कि, युद्ध की ये आग अब सिर्फ सैनिकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कलम और कैमरे के सिपाहियों को भी अपनी चपेट में ले रही है. ऐसे में क्या दुनिया के बड़े देश इस खूनी खेल को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगे?

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