America Protest : ईरान से जारी जंग के बीज डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका में विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया है. साथ ही यह प्रोटेस्ट सिर्फ यूएस तक सीमित नहीं रहा बल्कि यूरोप के कई देशों में भी देखने को मिला.
America Protest : ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी जंग का एक महीना पूरा हो गया है. इस बीच दोनों तरफ से भारी तबाही मची है और इसी कड़ी में ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट को रोककर अंतरराष्ट्रीय बाजार को हिलाकर रख दिया है. दुनिया भर के देशों में गैस और पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं और इससे अमेरिका भी अछूता नहीं रहा है उनके यहां पर करीब 40 प्रतिशत कीमतों में इजाफा हुआ है. यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ ‘NO-KINGS’ आंदोलन के तहत देश में विभिन्न स्थानों पर लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह प्रदर्शन सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है बल्कि यूरोप के कई देशों में भी हुआ है.
लोगों ने किया ट्रंप की नीतियों का विरोध
मामला यह है कि जनता ट्रंप की नीतियों का विरोध कर रही है, जिसमें ईरान के खिलाफ युद्ध छिड़ने के बाद महंगाई शामिल है. आपको बताते चलें कि अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी, वाशिंगटन डीसी और लॉस एंजिल्स समेत छोटे शहरों में हजारों-लाखों की भीड़ सड़कों पर उतर गई है. प्रदर्शनकारियों ने दावा किया है कि कई जगहों पर रैलियां आयोजित की गई हैं जिसमें लाखों लोग इकट्ठा हुए हैं. इसके अलावा उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप हम पर तानाशाह की तरह राज कर रहे हैं और अपनी मर्जी से फैसले ले रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि असली ताकत लोगों के हाथों में होती है, न की राजा के पास होती है.
पुलिस के साथ लोगों की हुई हाथापाई
अमेरिकी स्थानीय मीडिया ने बताया कि इस समय नो किंग्स विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी झड़पें हो रही हैं और ओरेगन के पोर्टलैंड में एक ICE केंद्र के बाहर कई लोगों की गिरफ्तारी की खबरें आ रही हैं. जैसे-जैसे तनाव बढ़ रहा है, अधिकारी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रहे हैं. साथ ही इस दौरान कुछ लोग चीज़ें फेंक रहे हैं और पुलिस के साथ हाथापाई कर रहे हैं.
फिलहाल इन विरोध प्रदर्शन को लेकर व्हाइट हाउस से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. इससे पहले भी जून और फिर अक्टूबर में लोगों ने भारी संख्या में घरों से निकलकर विरोध प्रदर्शन किए थे. आयोजकों का अनुमान है कि जून में हुए प्रदर्शन में 50 लाख और अक्टूबर में 70 लोग शामिल हुए थे. वहीं, एक्टिविस्टों का कहना है कि भारी मतभेदों के बाद भी लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किए, क्योंकि उनका उद्देश्य लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना है.
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News Source: PTI
