Home Top News जनगणना 2027: 1 अप्रैल से घर-घर पहुंचेंगे कर्मी, बिजली-पानी समेत इन 33 सवालों के देने होंगे जवाब

जनगणना 2027: 1 अप्रैल से घर-घर पहुंचेंगे कर्मी, बिजली-पानी समेत इन 33 सवालों के देने होंगे जवाब

by Sanjay Kumar Srivastava
0 comment
1 अप्रैल से भारत की पहली 'पेपरलेस'जनगणना का आगाज

Introduction

Digital Census: भारत की पहली ‘पेपरलेस’ जनगणना 1 अप्रैल से शुरू हो रही है. नागरिक अब अपना विवरण खुद दर्ज कर सकेंगे. इसके लिए 16 भाषाओं में पोर्टल उपलब्ध होगा. यह दुनिया का सबसे बड़ा डेटा अभियान है. आधुनिक भारत की नई इबारत लिखने के लिए 30 लाख कर्मचारियों को लगाया गया है. मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए डेटा का संग्रह किया जाएगा. सरकार ने डेटा सुरक्षा पर विशेष जोर दिया है. भारत अपनी पहली डिजिटल जनगणना के लिए पूरी तरह तैयार है. रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि ‘जनगणना 2027’ का प्रारंभिक चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा. यह भारत की 16वीं और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना होगी, जो दुनिया का सबसे बड़ा गणना अभ्यास है.

इस प्रक्रिया में देश भर के 30 लाख से अधिक कर्मचारी और अधिकारी शामिल होंगे. पहली बार पूरी तरह डिजिटल होने के कारण इसमें डेटा संग्रह के लिए मोबाइल ऐप और तकनीक का उपयोग किया जाएगा. यह गणना देश की बदलती जनसांख्यिकी और विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण डेटा देगा. इस गणना के माध्यम से आर्थिक-सामाजिक और जातीय स्थिति स्पष्ट रूप से सामने आ जाएगी. पहला चरण 1 अप्रैल, 2026 से 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू होगा. गणनाकर्ताओं द्वारा घर-घर का दौरा करने से पहले नागरिक 15 दिनों की अवधि में ऑनलाइन स्वयं-गणना कर सकते हैं. जनगणना 16 भाषाओं में उपलब्ध है. जनगणना के डेटा की जानकारी आरटीआई के तहत नहीं ली जा सकती है. इसका उद्देश्य कागजी कार्रवाई को कम करते हुए डेटा एकत्रण को सुव्यवस्थित करना है.पहले चरण में आवास डेटा एकत्र किया जाएगा. इसके बाद 2027 में जाति सहित जनसंख्या विवरण एकत्र किया जाएगा. अधिकारियों ने जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत मजबूत डेटा सुरक्षा और गोपनीयता का आश्वासन दिया है.

Digital Census

Table Of Content

  • स्वगणना विकल्प के साथ पहली डिजिटल जनगणना
  • ऐसे करें स्वगणना
  • दो चरणों में की जाएगी जनगणना
  • चरण I के लिए राज्यवार समयरेखा
  • बड़े पैमाने पर और डिजिटल बुनियादी ढांचा
  • प्री-टेस्ट हुआ पूरा
  • घर-घर जाकर परखी जाएगी डेटा की सत्यता
  • डेटा सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?

स्वगणना विकल्प के साथ पहली डिजिटल जनगणना

पहली बार जनगणना डिजिटल रूप से आयोजित की जाएगी, जिसमें कर्मचारी मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से डेटा एकत्र करेंगे. पहली बार नागरिक 16 भाषाओं में उपलब्ध एक सुरक्षित ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग करके स्वयं गणना करने में भी सक्षम होंगे. स्व-गणना परिवारों को अपना विवरण ऑनलाइन भरने और एक यूनिक स्व-गणना आईडी बनाने की अनुमति देगी, जिसे जनगणना में लगे कर्मचारी द्वारा सत्यापित किया जाएगा. अधिकारियों ने बताया कि डेटा को गोपनीय और सुरक्षित बनाए रखने के लिए सख्त उपाय किए गए हैं. स्वगणना के लिए नागरिक अपने मोबाइल नंबर और अन्य बुनियादी विवरणों का उपयोग करके एसई पोर्टल पर लॉग इन कर सकते हैं. अपनी सुविधानुसार जनगणना कार्यक्रम को पूरा कर सकते हैं. सफलतापूर्वक सबमिट करने पर एक यूनिक स्व-गणना आईडी उत्पन्न होगी, जिसे गणना में लगे कर्मचारी के साथ साझा किया जाना है. स्वगणना विकल्प के जरिए नागरिक गणना में लगे कर्मचारियों के पहुंचने से पहले ही अपनी जानकारी सुविधानुसार भर सकते हैं. हालांकि कर्मचारी पिछली जनगणनाओं की तरह अपने आवंटित ब्लॉकों में घर-घर जाकर गणना करना जारी रखेंगे. इस बार नागरिकों को स्व-गणना एक अतिरिक्त सुविधा दी गई है.इस प्रक्रिया का उद्देश्य देश भर के परिवारों के लिए भागीदारी को आसान और अधिक सुलभ बनाना है.

ये भी पढ़ेंः सूरत में मीठी खाड़ी के पास एक घर में लगी भीषण आग, 4 महिलाएं समेत 5 की मौत; बचाव कार्य जारी

ऐसे करें स्वगणना

पोर्टल se.census.gov.in को मोबाइल नंबर का उपयोग करके लॉगिन करें. इसके बाद मानचित्र पर स्थान की पहचान करें और घरेलू विवरण भरें. इसके बाद सबमिट करें. सबमिट करते ही एसई आईडी प्राप्त हो जाएगा. जब कर्मचारी घर पर आएं तो आप उन्हें अपना एसई आईडी दे दें. कर्मचारी आपके डेटा की पुष्टि करते हुए जनगणना में शामिल कर लेगा. जनगणना जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के प्रावधानों के तहत आयोजित की जा रही है. जनगणना के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 होगी, जबकि लद्दाख और जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले क्षेत्रों में संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर, 2026 होगी.

Digital Census

दो चरणों में की जाएगी जनगणना

  • चरण I (हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना): अप्रैल से सितंबर 2026 तक. इसके तहत आवास की स्थिति जानी जाएगी यानी कमरों की संख्या, कितने शौचालय हैं, कितने बड़े कमरे और रसोईघर हैं. इसके अलावा आवास बनाने में किस तरह की सामग्री का उपयोग किया गया है. मकान किसके नाम है. मकान में किराएदार हैं या नहीं. मकान का क्षेत्रफल क्या है. मकान में कितने परिवार रहते हैं. सदस्यों की संख्या कितनी है. मकान में कूलर लगे हैं या एसी. एसी हैं तो कितने और कूलर हैं तो कितने. पानी का स्रोत क्या है. खुद की बोरिंग है या जल निगम से लिया गया सरकारी पाइप कनेक्शन. इसके अलावा सौर ऊर्जा से आपका घर रोशन हो रहा है या बिजली से, इसकी भी जानकारी देनी होगी. कितने कमरों में TV लगी है, ये भी गणना में लगे कर्मचारियों को बताना होगा. घर में और भी क्या सुविधाएं हैं, ये भी बताना जरूरी है. जिस घर में आप रह रहे हैं, इसके अलावा और क्या संपत्तियां हैं, इसकी भी पूरी जानकारी देनी होगी.
  • द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना): फरवरी 2027ः यह चरण जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक डेटा एकत्र करेगा. इस चरण के दौरान जातियों की गणना भी की जाएगी. इसके तहत यह जाना जाएगा कि परिवार में कितने लोग सरकारी नौकरी में और कितने निजी क्षेत्र में. इसके अलावा स्वरोजगार है या नहीं. परिवार के सदस्य कितने पढ़े-लिखे हैं. एक-एक सदस्य की शैक्षिक योग्यता जानी जाएगी. इसके अलावा आप किस समुदाय और जाति से हैं, इसकी भी गणना की जाएगी.

ये भी पढ़ेंः इजराइलियों की हत्या के दोषी फिलिस्तीनियों को मिलेगी मौत की सजा, संसद ने पारित किया कानून

चरण I के लिए राज्यवार समयरेखा

पहला चरण राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग-अलग समय सीमा में आयोजित किया जाएगा. प्रत्येक राज्य में घर सूचीकरण चरण से तुरंत पहले 15 दिवसीय स्वगणना विंडो होगी. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दिल्ली (नई दिल्ली नगरपालिका परिषद और दिल्ली छावनी बोर्ड), गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम राज्य 16 अप्रैल से 15 मई के दौरान 15 दिनों की अवधि के साथ मकान सूचीकरण और आवास जनगणना करेंगे. मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़ और हरियाणा 1 मई से 30 मई तक मकान सूचीकरण जनगणना शुरू करेंगे, जिसमें 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक स्वगणना की अवधि होगी.

जनगणना में खर्च होंगे करीब 11,718 करोड़ रुपये

सरकार जनगणना के लिए करीब 11,718 करोड़ रुपये खर्च करेगी. यह गणना 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, 7,000 से अधिक उप-जिलों, 5,128 कस्बों, 4,580 जनगणना कस्बों और लगभग 6.4 लाख गांवों को कवर करेगा. गृह मंत्रालय ने कहा कि एक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया गया है, जिसमें मोबाइल एप्लिकेशन, स्वगणना पोर्टल और वास्तविक समय निगरानी डैशबोर्ड शामिल है. वेब आधारित मैपिंग टूल का उपयोग करके मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए जाएंगे. जनगणना अधिकारियों के प्रशिक्षण की विस्तृत व्यवस्था की गई है. 100 राष्ट्रीय प्रशिक्षकों को विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित किया गया है, जिन्होंने लगभग 2,000 मास्टर प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया है. ये मास्टर ट्रेनर लगभग 45,000 फील्ड ट्रेनरों को प्रशिक्षण दे रहे हैं जो बदले में लगभग 80,000 बैचों में लगभग 31 लाख प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे. सभी संभावित प्रशिक्षण सामग्री क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार की गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हमारे अंतिम मील के सैनिकों, गणनाकारों और पर्यवेक्षकों को समय पर गुणवत्ता डेटा एकत्र करने में कठिनाइयों का सामना न करना पड़े.

ये भी पढ़ेंः दीदी को दी ईदी तो गुस्सा हो गई बीवी, पति ने पूरे परिवार को सुलाया मौत की नींद, हैरान कर देगा मामला

Digital Census

प्री-टेस्ट हुआ पूरा

रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि कार्यप्रणाली, डिजिटल उपकरणों और प्रशिक्षण प्रणालियों को मान्य करने के लिए नवंबर 2025 में लगभग 5,000 जनगणना ब्लॉकों को कवर करते हुए एक राष्ट्रव्यापी प्री टेस्ट आयोजित किया गया था. बढ़ी हुई डिजिटल क्षमताओं और व्यापक नागरिक भागीदारी के साथ जनगणना 2027 से देश भर में नीति-निर्माण और विकास योजना का समर्थन करने के लिए अधिक सटीक, समय पर और व्यापक डेटा प्रदान करने की उम्मीद है. रजिस्ट्रार जनरल ने बताया कि डिजिटल जनगणना से डेटा की सटीकता, दक्षता और समयबद्धता में सुधार होने की उम्मीद है, जिससे सरकार को बेहतर नीति योजना और शासन में मदद मिलेगी.

घर-घर जाकर परखी जाएगी डेटा की सत्यता

श्री नारायण ने कहा कि पश्चिम बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य है जिसने जनगणना प्रक्रिया को अधिसूचित नहीं किया है. हालांकि राज्य सरकार के साथ विचार-विमर्श चल रहा है, पश्चिम बंगाल के पास इस गणना को पूरा करने के लिए 30 सितंबर तक का समय है. उन्होंने कहा कि यह पहली डिजिटल जनगणना होगी, जो जाति की गणना करने वाली पहली और उत्तरदाताओं को स्वगणना विकल्प की अनुमति देने वाली पहली होगी. स्वगणना के दौरान दर्ज किए गए डेटा को घर-घर जाकर गणनाकर्ताओं द्वारा सत्यापित किया जाएगा. यह विकल्प केवल भारत में रहने वाले निवासियों के लिए ही उपलब्ध है. उन्होंने डेटा हेरफेर की बातों को खारिज कर दिया. उन्होंने बताया कि जनगणना अधिनियम 1948 के अनुसार, जनगणना के आंकड़े गोपनीय होते हैं और नागरिकों को अपनी सर्वोत्तम जानकारी के अनुसार जवाब देना होता है. केवल समग्र डेटा जारी किया जाता है. किसी व्यक्ति का डेटा राज्यों या यहां तक ​​कि न्यायपालिका के साथ भी साझा नहीं किया जा सकता है और यह सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के दायरे में भी नहीं आता है. जनगणना के आंकड़ों का उपयोग किसी भी व्यक्ति को आरक्षण लाभ प्रदान करने के लिए नहीं किया जा सकता है.

Digital Census

ये भी पढ़ेंः ‘वह अभी कोई बड़ा खिलाड़ी नहीं…’ जानें ऐसा क्यों बोले अश्विन? माइकल वॉन ने कही ये बात

डेटा सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?

भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सुझाव दिया कि डेटा सुरक्षा का आश्वासन प्रतिष्ठित एजेंसियों द्वारा दिया गया है. डेटा संग्रहण, ट्रांसमिशन से लेकर सर्वर स्तर तक एंड-टू-एंड डेटा सुरक्षा होगी. साइबर सुरक्षा एजेंसियों की सहायता से डेटा को एन्क्रिप्टेड रूप में संग्रहीत किया जाएगा. व्यक्तिगत स्तर पर डेटा हेरफेर के मामले में गणना में लगे कर्मचारी प्रतिवादी द्वारा सूचीबद्ध विवरण को सत्यापित करेगा.

Conclusion

भारत की पहली ‘पेपरलेस’ जनगणना 1 अप्रैल से शुरू हो रही है. नागरिक अब अपना विवरण खुद दर्ज कर सकेंगे. इसके लिए 16 भाषाओं में पोर्टल उपलब्ध होगा. यह दुनिया का सबसे बड़ा डेटा अभियान है.

Follow Us On: Facebook | X | LinkedIn | YouTube Instagram

You may also like

LT logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?