SIR Protest: पश्चिम बंगाल में चुनावी गहमागहमी के बीच मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. सैकड़ों प्रदर्शनकारी सड़क पर उतर आए.
SIR Protest: पश्चिम बंगाल में चुनावी गहमागहमी के बीच मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. सैकड़ों प्रदर्शनकारी सड़क पर उतर आए और वाहनों में तोड़फोड़ शुरू कर दी. प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर दिया, जिससे दोनों तरफ आवागमन रुक गया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में लगे सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया. न्यायिक अधिकारी कई घंटों तक प्रदर्शनकारियों के कब्जे में रहे. सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठियां चलाईं और सभी न्यायिक अधिकारियों को बुधवार देर रात प्रदर्शनकारियों के कब्जे से छुड़ा लिया. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को राष्ट्रीय राजमार्ग 12 (कोलकाता-सिलीगुड़ी) को भी अवरुद्ध कर दिया.
बल प्रयोग कर अफसरों को छुड़ाया
SIR में लगे सात न्यायिक अधिकारी कालियाचक 2 ब्लॉक विकास कार्यालय में मौजूद थे. इस दौरान सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने बुधवार शाम 4 बजे के आसपास अधिकारियों को घेर लिया. अधिकारियों ने बताया कि सूचना पर पहुंचे सुरक्षा बलों ने अधिकारियों को भीड़ के कब्जे से छुड़ाया. न्यायिक अधिकारियों को बीडीओ कार्यालय से बाहर लाया गया. यहां तक कि प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर लंबे-लंबे बांस रखकर उनके वाहनों को अवरुद्ध करने का प्रयास किया. अधिकारी ने कहा कि उनके कारों में तोड़फोड़ की गई. एक अधिकारी ने कहा कि बचाव अभियान के दौरान भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठियां बरसाईं. आंदोलनकारियों ने न्यायिक अधिकारियों को ले जा रहे वाहनों को रोकने की कोशिश की और उन्हें नुकसान पहुंचाने का भी प्रयास किया. सुरक्षाकर्मियों को उनकी सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा. हंगामे के दौरान वाहनों की चपेट में आने से कुछ प्रदर्शनकारी घायल भी हो गए.
आश्वासन के बाद शांत हुए प्रदर्शनकारी
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, न्यायिक अधिकारी वर्तमान में उन मतदाताओं के मामलों की जांच कर रहे हैं जिनके नाम 28 फरवरी को प्रकाशित मतदाता सूची में “न्यायाधीन” के रूप में चिह्नित किए गए थे ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि उन्हें बरकरार रखा जाना चाहिए या हटा दिया जाना चाहिए. अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने शुरू में न्यायिक अधिकारियों के साथ एक बैठक की मांग की थी. जिसे इनकार किए जाने के बाद उन्होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया और परिसर को घेर लिया. राष्ट्रीय राजमार्ग 12 पर नाकाबंदी जारी रही. देर रात अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के मौके पर पहुंचने और आश्वासन देने के बाद ही स्थिति शांत हुई. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि पात्र मतदाताओं के नाम चार दिनों के भीतर सूची में शामिल कर दिए जाएंगे. अधिकारी ने कहा कि आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों ने नाकाबंदी वापस ले ली. चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चुनाव आयोग ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से घटना पर रिपोर्ट मांगी है. पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा. गिनती 4 मई को होगी.
ये भी पढ़ेंः ‘सेंट्रल फोर्स तैनात करो’ अधिकारियों को बंधक बनाए जाने पर SC ने सरकार को लगाई फटकार
News Source: PTI
