Petrochemical Products List: सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोकेमिकलसामानों पर कस्टम ड्यूटी को जीरो कर दिया है. इस कदम से कई रोजमर्रा के सामान सस्ते हो सकते हैं. यहां देखें किन सामानों की कीमत कम हो सकती है.
1 April, 2026
मिडिल ईस्ट में चल रही अमेरिका और ईरान की जंग के कारण एशियाई देशों की एनर्जी सप्लाई चेन बिगड़ गई है, जिससे तेल और LPG संकट पैदा हो गया है कीमतें बढ़ गई हैं, जिसका सीधा लोगों की जेब पर पड़ रहा है. सरकार ने लोगों को थोड़ी राहत देने के लिए पेट्रोकेमिकल सामानों पर कस्टम ड्यूटी को जीरो कर दिया है. हालांकि यह छूट केवल जून तक यानी तीन महीने के लिए दी गई है. पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक और इंटरमीडिएट्स पर निर्भर सेक्टर्स जैसे प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और दूसरे मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट्स को ड्यूटी में छूट का फायदा होगा. चलिए जानते हैं कि यह कटौती आम आदमी के लिए कैसे फायदेमंद है.
30 जून तक राहत
वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष और उसके चलते ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावटों को देखते हुए, सरकार ने 30 जून तक जरूरी पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर पूरी कस्टम ड्यूटी में छूट देने का फैसला किया है. इसमें कहा गया, “यह कदम घरेलू इंडस्ट्री के लिए जरूरी पेट्रोकेमिकल इनपुट्स की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने, डाउनस्ट्रीम सेक्टर्स पर लागत का दबाव कम करने और देश में सप्लाई में स्थिरता बनाए रखने के लिए एक टेम्पररी और टारगेटेड राहत के तौर पर उठाया गया है.” इसमें आगे कहा गया कि इससे फाइनल प्रोडक्ट्स के कंज्यूमर्स को भी राहत मिलेगी.
किन चीजों पर नहीं लगेगा कस्टम टैक्स
वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी एक लिस्ट में बताया गया है कि किन चीजों पर कस्टम ड्यूटी जीरो कर दी गई है, उनमें मिथेनॉल, टोल्यूनि, स्टाइरीन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर, मोनोएथिलीन ग्लाइकॉल (MEG), फिनोल, एसिटिक एसिड, प्यूरिफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड (PTA), पॉलीइथिलीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीस्टाइरीन, पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC), पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट (PET), इंजीनियरिंग प्लास्टिक जैसे एक्रिलोनिट्राइल-ब्यूटाडीन-स्टाइरीन (ABS) और पॉलीकार्बोनेट शामिल हैं. वेस्ट एशिया युद्ध के बीच शिपिंग रूट में रुकावट से फर्टिलाइज़र, क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस के इम्पोर्ट को लेकर चिंता बढ़ गई है. भारत फर्टिलाइजर और पेट्रोलियम का एक बड़ा इम्पोर्टर है.
क्या हो सकता है सस्ता
- मिथनॉल का इस्तेमाल प्लाईवुड, इंसुलेशन फोम, एसिटिक एसिड, प्लास्टिक, सिंथेटिक फाइबर, पेंट, कोटिंग और दवाइयां बनाने में होता है.
- टोल्यूइन का इस्तेमाल पेंट, थिनर, ग्लू, प्रिंटिंग इंक, पेंट रिमूवर, रबर, रेजिन और प्लास्टिक बनाने में होता है.
- इंसुलेशन फोम का इस्तेमाल टीवी/कंप्यूटर/मोबाइल फोन केस, खिलौनों और ऑटो पार्ट्स में होता है.
- पॉलीस्टाइरीन का इस्तेमाल डिस्पोजेबल प्लेट, कप, फूड कंटेनर, अंडे की ट्रे और आइसक्रीम कप में होता है.
- विनाइल क्लोराइड मोनोमर का इस्तेमाल ब्लड बैग, मेडिकल ट्यूबिंग, खिलौनों और क्रेडिट कार्ड में होता है.
- मोनोइथाइलीन ग्लाइकॉल का इस्तेमाल पानी की बोतलों, कोल्ड ड्रिंक की बोतलों, शैम्पू/तेल की बोतलों और कपड़ों में होता है.
- दूध/जूस की बोतलें, पानी के पाइप, शॉपिंग बैग, प्लास्टिक बैग, फूड रैप, सैंडविच बैग, डिस्पोजेबल ग्लव्स और भी बहुत कुछ पॉलीइथिलीन से बनता है.
- कस्टम ड्यूटी जीरो हो जाने से इन सभी सामानों में कीमत घट सकती है, जिससे आपको सीधा फायदा मिलेगा.
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News Source: PTI
