Home Latest News & Updates हरिवंश को राष्ट्रपति ने किया राज्यसभा के लिए मनोनीत, जानें कैसा रहा राजनीतिक सफर?

हरिवंश को राष्ट्रपति ने किया राज्यसभा के लिए मनोनीत, जानें कैसा रहा राजनीतिक सफर?

by Sachin Kumar
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Rajya Sabha Nomination Harivansh Narayan Singh

Rajya Sabha Nomination : राज्यसभा में दो बार सदस्य रहे हरिवंश का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो गया था. लेकिन उन्हें राष्ट्रपति मुर्मु ने मनोनीत सदस्य के रूप में राज्यसभा भेज दिया है और अब अटकलें तेज हो गईं हैं उन्हें उप सभापति भी बनाया जा सकता है.

Rajya Sabha Nomination : जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेता हरिवंश नारायण सिंह को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राज्यसभा के लिए मनोनीत कर दिया है. वे राज्यसभा के उप सभापति रहे हैं और प्रख्यात पत्रकार हरिवंश का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो गया. अब उनका नया कार्यकाल एक बार फिर से शुरू होने जा रहा है और उम्मीद है कि वह नीतीश कुमार के साथ शपथ ले सकते हैं. पूर्व CJI रंजन गोगोई के रिटायरमेंट के बाद यह सीट खाली हुई थी. इस सीट को भरने के लिए राष्ट्रपति ने उनके नाम को नामित किया है. बता दें कि इस बार JDU की तरफ से 69 वर्षीय हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा चुनाव में मौका नहीं दिया गया था और अब उन्हें मनोनीत करके उच्च सदन में भेजा जा रहा है. इसके साथ ही वह साल 2032 तक इस सदन का हिस्सा रहेंगे.

JDU ने पहली बार 2014 में उच्च सदन भेजा

हरिवंश नारायण सिंह को साल 2014 में JDU ने बिहार से पहली राज्यसभा के लिए भेजा था. साथ ही 9 अप्रैल, 2018 को पहली बार राज्यसभा में उप सभापति के लिए निर्वाचित हुए. इसके बाद 14 सितंबर, 2020 को फिर से उप सभापति के लिए निर्वाचित हुए. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफी करीबी माने जाने वाले हरिवंश तीसरी बार राज्यसभा में पहुंच रहे हैं और अब कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें तीसरी बार भी उप सभापति का पद दिया जा सकता है.

क्या मनोनीत को बनाया जा सकता है उप सभापति

भारतीय संविधान और राज्यसभा के नियमों के मुताबिक, मनोनीत सदस्य को भी उप सभापति बनाया जा सकता है. संविधान के अनुच्छेद 89 के तहत राज्यसभा अपने सदस्यों के बीच से एक का उप सभापति पद के लिए चयन करती है. साथ ही इस अनुच्छेद में यह कहीं भी लिखा है कि उप सभापति पद के लिए किसी व्यक्ति का निर्वाचन होना ही जरूरी है. बशर्ते कि वह राज्यसभा का सदस्य होना चाहिए. आपको बताते चलें कि उप सभापति का चयन सदन के सदस्य ही करते हैं. इसके लिए एक प्रस्ताव लाया जाता है और उसके बाद वोटिंग होती है. हालांकि, सत्तापक्ष और विपक्ष आपसी सहमति के बाद भी नाम तय कर सकते हैं. खास बात यह है कि इस मामले में मनोनीत सदस्य भी वोटिंग कर सकते हैं और खुद भी उम्मीदवार बनने के योग्य होते हैं.

इस मिट्टी से जुड़ी रहीं उनकी यादें

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में 30 जून, 1965 को जन्मे हरिवंश नारायण की प्राथमिक शिक्षा टोला काशी राय के स्कूल में हुई. 1971 में उन्होंने जयप्रकाश नगर के जेपी इंटर कॉलेज सेवाश्रम से हाई स्कूल किया और इसके बाद वह वाराणसी पहुंचे जहां से उन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. इसी कड़ी में उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और फिर पत्रकारिता में डिप्लोमा भी हासिल किया.

ऐसा रहा पत्रकारिता में करियर

हरिवंश ने अपनी पत्रकारिता की शुरुआत टाइम्स ग्रुप से की. हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने बैंक में भी नौकरी की और साल 1981 से 1984 तक हैदरबाद और पटना में बैंक ऑफ इंडिया में सेवाएं दीं. फिर वह कुछ समय बाद ही पत्रकारिता के क्षेत्र में वापस आ गए. सन् 1984 से 1989 तक आनंद बाजार पत्रिका ग्रुप से जुड़कर साप्ताहिक पत्रिका रविवार में सहायक संपादक के रूप में जिम्मेदारी निभाई. इसके बाद 1990-91 में वह प्रभात खबर से जुड़ गए. इस न्यूज पेपर में उन्होंने करीब दो दशक तक सेवाएं दीं.

नहीं थी राज्यसभा के लिए कोई चर्चा

हाल ही में बिहार की पांच राज्यसभा सीटें खाली हुईं और उन सीटों में से एक वह भी थी जो हरिवंश का दूसरा कार्यकाल खत्म होने से खाली हुई. हरिवंश के लिए पहले ही कहा जा रहा था कि उन्हें JDU तीसरी बार उच्च सदन में भेजने के मूड में नहीं है. इसका मुख्य कारण माना जा रहा था कि नीतीश कुमार अपनी पार्टी से किसी व्यक्ति को दो बार से ज्यादा राज्यसभा नहीं भेजते हैं. यही वजह है कि पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के चुनावी मैदान में नहीं उतारा और उनका कार्यकाल 9 अप्रैल को पूरा हो गया.

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