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क्या चीन और ताइवान फिर होंगे एक? बीजिंग का बढ़ा सैन्य दबाव, चेंग ली-वुन के दौरे से जगी उम्मीद

by Sanjay Kumar Srivastava
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क्या चीन और ताइवान फिर होंगे एक? बीजिंग का बढ़ा सैन्य और राजनयिक दबाव, चेंग ली-वुन के दौरे से शांति की उम्मीद

China-Taiwan Relations: शी जिनपिंग ने ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों ओर शांति और सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया.

China-Taiwan Relations: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगले महीने चीन यात्रा से पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को बीजिंग में ताइवान के मुख्य विपक्षी दल कुओमितांग (KMT) के अध्यक्ष चेंग ली-वुन से ऐतिहासिक मुलाकात की. एक दशक में किसी KMT अध्यक्ष की यह पहली चीन यात्रा है. बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों ओर शांति और सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के लोग मूल रूप से चीनी हैं और शांति, विकास व संचार उनकी साझा इच्छा है. शी ने विश्वास जताया कि मुख्य भूमि (Mainland China) और ताइवान का एक साथ आना एक ऐतिहासिक निश्चितता है जिसे बदला नहीं जा सकता. यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब बीजिंग ताइवान पर सैन्य और राजनयिक दबाव बढ़ा रहा है.

ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है चीन

गौरतलब है कि चीन ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है. ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ के अनुसार, 2016 के बाद यह पहला मौका है जब किसी KMT प्रमुख ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व से संवाद किया है. राजनीतिक विश्लेषक इसे क्षेत्रीय तनाव कम करने और ट्रंप की यात्रा से पहले स्थिरता का संदेश देने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं. शी के साथ उनकी मुलाकात को दुनिया भर में उत्सुकता से देखा जा रहा है क्योंकि चीनी राष्ट्रपति ने ताइवान को फिर से एकजुट करने के प्रयासों को तेज कर दिया है. 2012 में सत्ता संभालने के बाद से जिनपिंग ने अपनी वन-चाइना नीति को सख्ती से लागू किया है, इसे उच्च सैन्य और राजनयिक प्राथमिकता दी है.

ट्रंप से पहले चेंग की यात्रा महत्वपूर्ण

चेंग की यात्रा को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह 14-15 मई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा से पहले हो रही है. यात्रा के दौरान वाशिंगटन की 11 अरब अमेरिकी डॉलर की हथियार बिक्री की योजना को देखते हुए शी के साथ उनकी बातचीत में ताइवान के प्रमुखता से शामिल होने की उम्मीद है. चीन ताइवान की सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) को अलगाववादी कहता है और बीजिंग समर्थक KMT का चुपचाप समर्थन करता है क्योंकि वह मुख्य भूमि के साथ घनिष्ठ संबंधों की वकालत करता है. डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी ताइवान को मुख्य भूमि के साथ फिर से जोड़ने के चीन के प्रयासों का दृढ़ता से विरोध करता है और अलग हुए द्वीप की पहचान बनाए रखने की वकालत करता है.

टकराव से बचना चाहते हैं दोनों देश

शी के साथ अपनी बैठक में चेंग ने कहा कि दोनों पक्षों को राजनीतिक टकराव से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमें युद्ध को रोकने और टालने के लिए एक प्रणालीगत समाधान तलाशना चाहिए, जिससे ताइवान जलडमरूमध्य को दुनिया भर में शांतिपूर्ण संघर्ष समाधान के लिए एक मॉडल बनाया जा सके. चीन ने कहा कि वह अमेरिकी हथियार बिक्री पैकेज का दृढ़ता से विरोध करता है और इसकी कड़ी निंदा करता है. लेकिन ताइवान सरकार को अमेरिकी पैकेज का लाभ उठाने के लिए इस साल के रक्षा बजट को संसद से पारित कराने के लिए संघर्ष करना पड़ा, क्योंकि इसे विपक्ष के प्रभुत्व वाली संसद ने रोक दिया था. चेंग ने मंगलवार को शंघाई में शुरू हुई अपनी छह दिवसीय यात्रा को शांति की यात्रा के रूप में वर्णित किया है.

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News Source: PTI

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