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शालीमार बाग में 30 मई के बाद चलेगा ध्वस्तीकरण अभियान, कब्जा खाली करने का मिला अल्टीमेटम

by Sanjay Kumar Srivastava
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दिल्ली के शालीमार बाग में 30 मई के बाद चलेगा ध्वस्तीकरण अभियान, कब्जा खाली करने का मिला अल्टीमेटम

Delhi High Court: दिल्ली के शालीमार बाग में सार्वजनिक सड़क के विस्तार के लिए ध्वस्तीकरण को हरी झंडी मिल गई है. अदालत ने हैदरपुर गांव के निवासियों को परिसर खाली करने के लिए 30 मई तक का समय दिया है.

Delhi High Court: दिल्ली के शालीमार बाग में सार्वजनिक सड़क के विस्तार के लिए ध्वस्तीकरण को हरी झंडी मिल गई है. अदालत ने हैदरपुर गांव के निवासियों को परिसर खाली करने के लिए 30 मई तक का समय दिया है. आदेश के बाद अब विकास का रास्ता साफ हो गया है. अस्पताल और अग्नि सुरक्षा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए सड़क के चौड़ीकरण में आ रही बाधाएं दूर हो गईं. दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में अधिकारियों को शालीमार बाग इलाके में सार्वजनिक सड़क के विस्तार के लिए तोड़फोड़ अभियान चलाने की हरी झंडी दे दी है.

परियोजनाओं में देरी जनहित के खिलाफ

न्यायमूर्ति प्रथिबा एम सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा, शिक्षा और अग्नि सुरक्षा जैसी आवश्यक सेवाओं से जुड़ी परियोजनाओं में देरी जनहित के खिलाफ है. अदालत ने वहां रह रहे लगभग 98 कब्जाधारियों को मानवीय आधार पर रियायत देते हुए परिसर खाली करने के लिए 30 मई तक का समय दिया है. यह आदेश हैदरपुर गांव में सरकार द्वारा अधिग्रहित भूमि पर रह रहे लोगों की ओर से सरोज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया. सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार का पक्ष अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और स्थायी वकील संजय कुमार पाठक ने रखा. पीठ ने 6 अप्रैल के अपने आदेश में जोर देकर कहा कि इस सड़क का विस्तार स्थानीय निवासियों के बड़े हितों के लिए अनिवार्य है.

सड़क चौड़ीकरण में और देरी नहीं

न्यायालय के अनुसार, अस्पताल और स्कूलों तक सुगम पहुंच सुनिश्चित करने वाली परियोजनाओं को और अधिक नहीं रोका जा सकता. यदि कब्जा धारी समय सीमा तक जगह खाली नहीं करते हैं, तो प्रशासन को कार्रवाई करने का अधिकार होगा. पीठ ने कहा कि इस अदालत का मानना ​​है कि सड़क के चौड़ीकरण में और देरी नहीं की जा सकती. निवासियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि इसमें किसी भी तरह से बाधा न आए. याचिकाकर्ताओं ने विध्वंस और बेदखली से सुरक्षा की मांग की थी, जिसमें दावा किया गया था कि कई परिवार दशकों से जमीन पर रह रहे हैं और बेदखल किए जाने पर बेघर हो जाएंगे. पीठ को सूचित किया गया कि विचाराधीन भूमि पहले ही अधिकारियों द्वारा अधिग्रहित की जा चुकी है और अधिग्रहण के लिए पहले की चुनौतियों को सुप्रीम कोर्ट ने भी इनकार कर दिया था.

परिसर खाली करने के लिए मिला समय

हालांकि, निवासियों के लंबे समय से चले आ रहे कब्जे को देखते हुए अदालत ने उन्हें परिसर खाली करने के लिए 30 मई तक का समय दिया है. इसने निर्देश दिया कि उक्त तिथि तक कब्जेदारों को बेदखल नहीं किया जाएगा और अधिकारी उनके कब्जे के तहत संरचनाओं को ध्वस्त नहीं करेंगे. अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) से सहानुभूतिपूर्वक मुआवजे के लिए कानून के अनुसार उचित निर्णय लेने के लिए कहा. दिल्ली सरकार शालीमार बाग में दशकों पहले अधिग्रहीत भूमि पर अतिक्रमण को हटाकर सड़क को चौड़ा करने के लिए विध्वंस अभियान चला रही है. अधिकारियों का कहना है कि यातायात में सुधार करने के लिए यह आवश्यक है. इसका अलावा सड़क चौड़ीकरण इसलिए भी जरूरी है कि एम्बुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों की पास के अस्पतालों और स्कूलों तक आसानी से पहुंच हो.

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News Source: PTI

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