Iran War : मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध दो हफ्ते के लिए शांत हो गया था और अब इसकी मियाद खत्म होने में मात्र एक दिन बचा है. इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है और उनका कहना है कि वह इस युद्ध में इजरायल के कहने पर नहीं आए हैं.
Iran War : ईरान युद्ध की वजह से मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया और सीजफायर खत्म होने में भी एक दिन बचा है. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या अब युद्ध फिर से शुरू होगा? अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा असर दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिलेगा. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि ईरान पर हमला करने के लिए उन्हें इजरायल ने कभी नहीं मनाया था. हमला करने का फैसला उनका था.
न्यूज में 90 प्रतिशत झूठ होता है
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि 7 अक्टूबर को ईरान समर्थित हमास ने जब इजरायल पर हमला किया था. उसी वक्त मेरा यकीन पक्का हो गया था कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं हो सकता है. साथ ही मैं इन फेक न्यूज के जानकारों और पोल्स को पूरी तरह से अविश्वास के साथ देखता हूं और पढ़ता हूं. वह लोग जो कुछ कहते हैं उसमें 90 प्रतिशत झूठ होता है और मनगढ़ंत कहानियां होती हैं. इसके अलावा उनके पोल्स में भी धांधली होती है, ठीक वैसे ही जैसे कभी साल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली हुई थी.
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला के नतीजों में भी इसी तरह हेरफेर हुआ था और इनके बारे में मीडिया कभी बात नहीं करता है. हम बस यही कहते हैं कि वेनेजुएला की तरह ईरान के नतीजे भी जबरदस्त होंगे और अगर ईरान के नए नेता समझदार हुए तो तेहरान का भविष्य शानदार हो सकता है.
क्यों दी अमेरिकी राष्ट्रपति ने सफाई?
अमेरिकी राष्ट्रपति पर विपक्ष समेत मीडिया हाउस लगातार ये आरोप लगाते हुए आए हैं कि ईरान युद्ध अमेरिका का नहीं था बल्कि इजरायल का था. लेकिन नेतन्याहू ने ही डोनाल्ड ट्रंप को अपने झांसे में फंसाकर इस युद्ध में घसीटने का काम किया है. इसके अलावा ईरान भी लगातार आरोप लगा रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी लोगों के टैक्स के पैसे को इस युद्ध में बेवजह खर्च कर रहे हैं, जबकि उनका इस युद्ध से कोई मतलब नहीं है. यह सिर्फ इजरायल का युद्ध है, क्योंकि वह ग्रेट इजरायल बनाना चाहते हैं.
ईरान पहले भी कई बार लेटर लिखकर अमेरिकी जनता से कह चुका है कि आपको अपनी सरकार से सवाल पूछना चाहिए है कि जब यह युद्ध उनका है नहीं तो, वह हमारा पैसा क्यों इसमें फूंक रहे हैं. यह मुद्दा अमेरिका में काफी ज्वलंत होता जा रहा था और सब्र का बांध टूटने के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने यह बयान दिया है. उन्होंने कहा कि इस युद्ध में वह इजरायल के कहने पर नहीं आए हैं बल्कि ईरान को वह परमाणु बम बनाने की इजाजत नहीं देना चाहते हैं.
यह भी पढ़ें- दिखावे की शांति और भीतर सुलगती आग, जानें क्यों कभी खत्म नहीं होगा Middle East का तनाव!
News Source: PTI
