Chhattisgarh IED Blast: 1 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में 4 जवान माओवादियों द्वारा छिपाए गए बारूद को नष्ट करने के दौरान शहीद हो गए. चारों के घरों में मातम छा गया है.
3 May, 2026
अपनी सगाई के कुछ ही हफ्तों बाद, 29 साल के पुलिस कांस्टेबल संजय गढ़पाले शनिवार को शहीद हो गए. जनवरी में होने वाली शादी का सपना छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में हुए एक जानलेवा धमाके में बुरी तरह टूट गया, जिससे उनके दुखी पिता सोच में पड़ गए कि अब परिवार के सपनों को कौन पूरा करेगा. गढ़पाले उन चार पुलिसवालों में से एक थे जो शनिवार को कांकेर ज़िले के आदनार गांव के पास जंगल में माओवादियों द्वारा छिपाए गए बारूद के ढेर को ठिकाने लगाने की कोशिश में मारे गए थे.
माओवादियों से मुक्त हुआ राज्य?
31 मार्च को हथियारबंद माओवादियों से मुक्त घोषित होने के बाद से यह राज्य में नक्सलियों से जुड़ा पहला धमाका था और इस साल यह पहला मामला भी था जिसमें नक्सल विरोधी ऑपरेशन में लगे सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई. चारामा इलाके के हारादुला गाँव के रहने वाले गढ़पाले 2022 में पुलिस बल में शामिल हुए थे और तब से राज्य पुलिस की एक यूनिट, बस्तर फाइटर्स के हिस्से के तौर पर नक्सल विरोधी ऑपरेशन में सक्रिय रूप से शामिल थे. कांस्टेबल के दुखी पिता सुरेश गढ़पाले ने कहा कि शनिवार शाम करीब 4 बजे पुलिस की एक टीम उनके घर आई और परिवार को उसकी मौत की खबर दी. उन्होंने कहा, “उसकी 15 अप्रैल को सगाई हुई थी और हम सब खुश थे. हम जनवरी में उसकी शादी की प्लानिंग कर रहे थे. मुझे अपने बेटे पर गर्व है, लेकिन अब हमारे सपने कौन पूरे करेगा?”
कोमरा की शादी का इंतजार कर रहा था गांव
गढ़पाले परिवार का दुख दुर्गकोंडल में भी दिखता है, जहां कांस्टेबल कृष्णा कोमरा की मां उस आखिरी फोन कॉल को याद करती हैं जो उसने जंगल में जाने से कुछ पल पहले किया था. कोमरा की मां देवकी बाई ने कहा, “उसने फोन करके पूछा, ‘मां, कैसी हो? घर पर सब ठीक है?'” उनकी आवाज भर गई थी. उन्होंने कहा, “हम अगले साल उसकी शादी की प्लानिंग कर रहे थे. हमने उसके लिए पहले ही दुल्हन ढूंढ ली थी.” कोमरा (35) तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े थे, 2011 में पुलिस में भर्ती हुए थे, जबकि उनके छोटे भाई इंडियन आर्मी में हैं. कोमरा के दोस्त पुरुषोत्तम देहारी ने कहा, “गांव में सभी उन्हें पसंद करते थे. पूरा समुदाय उनकी शादी का बेसब्री से इंतजार कर रहा था, लेकिन इस दुखद घटना ने सब कुछ बदल दिया है.”
इंस्पेक्टर सुखराम समेत 4 जवान शहीद
नरहरपुर इलाके के बरेथिन गांव के रहने वाले कांस्टेबल परमानंद कोरम (29) कांकेर जिले के एक और जवान थे, जिन्होंने शनिवार को हुए ब्लास्ट में अपनी जान गंवा दी. कोरम और गढ़पाले इत्तेफाक से फरवरी 2022 में एक ही दिन बस्तर फाइटर्स में शामिल हुए थे, लेकिन ड्यूटी पर एक साथ शहीद हो गए. डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी (40), जो बीजापुर जिले के चिहका गांव के रहने वाले थे, टीम को लीड कर रहे थे और इस दुखद घटना में शहीद होने वाले चौथे पुलिस वाले थे. चारों जवानों के पैतृक गांवों में दुख का माहौल था, क्योंकि उन्हें आखिरी श्रद्धांजलि देने के लिए भारी भीड़ जमा हो गई थी.
“भारत माता की जय”
नारायणपुर जिले की पुलिस लाइन में तीन शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी गई, जबकि कांकेर में परमानंद कोमरा को अंतिम श्रद्धांजलि दी गई. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी. जैसे ही गढ़पाले और कोमरा के पार्थिव शरीर नारायणपुर से भानुप्रतापपुर पहुंचे और उनके घरों की ओर बढ़े, सैकड़ों लोग सड़क पर उनकी आखिरी झलक पाने के लिए लाइन में खड़े हो गए और “अमर रहे” और “भारत माता की जय” के नारे लगाने लगे. श्रद्धांजलि के तौर पर शव वाहन पर फूल बरसाए गए. चारामा में, तिरंगा लिए युवाओं ने गढ़पाले के शव वाहन को ले जाने के लिए बाइक रैली निकाली और देशभक्ति के नारे लगाए.
यह भी पढ़ें- ममता के चुनावी क्षेत्र में मतगणना केंद्र के बाहर हंगामा, TMC का दावा- BJP की कार को मिली एंट्री
News Source: PTI
