Operation Sindoor : पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच चली चार दिनों तक जंग को लेकर चीन ने चुप्पी तोड़ी है. उसने माना कि इस जंग में उसने पाकिस्तान को तकनीकी सहायता प्रदान की थी.
Operation Sindoor : भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल चार दिन चली जंग को लेकर चीन ने बड़ा खुलासा किया है. चीन ने पहली बार माना है कि इस लड़ाई में उसने पाकिस्तान को तकनीकी सहायता दी थी. भारत और चीन के बीच बीते साल 7 से 10 मई तक चार तक दिन ये जंग चली थी. बता दें कि भारत ने पहलगाम में आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर अभियान चलाकर पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को उड़ाने का काम किया था. फिर भारत और पाकिस्तान के बीच दोनों तरफ से हमले होने शुरू हो गए और इसके बाद दोनों पक्ष 10 मई को सीजफायर के लिए राजी हो गए.
J-10CE विमान के लिए दी तकनीकी सहायता
सरकारी मीडिया ने झांग हेंग का एक इंटरव्यू प्रसारित किया. झांग ने अपने इंटरव्यू के दौरान इस बात को स्वीकार किया कि उनके देश ने लड़ाई के दौरान पाकिस्तान को J-10CE विमान के लिए तकनीकी सहायता दी थी. झांग हेंग एविएशन इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन ऑफ़ चाइना (AVIC) के चेंगदू एयरक्राफ्ट डिज़ाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में इंजीनियर हैं. यह संस्थान मुख्य रूप से चीन के लिए उन्नत लड़ाकू विमानों और मानवरहित हवाई वाहनों (UAV) के डिज़ाइन तैयार करता है.
हवाई हमले के बाद बजता था सायरन
हांगकांग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने CCTV के हवाले से बताया कि झांग ने पिछले साल में 4 मई को चार दिन तक चले युद्ध के दौरान पाकिस्तान को तकनीकी सहायता दी थी. पाकिस्तान की वायु सेना चीन द्वारा निर्मित J-10CE जेट्स का संचालन करती है और इसको AVIC की एक सहायक कंपनी ने तैयार किया है. ऐसे में सपोर्ट बेस पर फाइटर जेट्स के उड़ान भरने की गड़गड़ाहट और हवाई हमले के सायरन की लगातार आवाज सुनते थे. झांग ने आगे कहा कि मई के महीने में सुबह देर होते-होते तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच जाता था. साथ ही यह हमारे लिए मानसिक और शारीरिक दोनों ही तरह से एक परीक्षा की तरह था.
टीम सपोर्ट करने का काम करती थी
सीसीटीवी को झांग ने बताया कि उनकी टीम को जिस तरह से प्रेरित किया गया था वह मौके पर जाकर सपोर्ट देने का काम करती थी. साथ ही उसे बेहतर तरीके से पूरा भी करने का काम करती थी. हमारी टीम का यह सुनिश्चित करने का था कि उनके उपकरण सचमुच अपनी पूरी युद्धक क्षमता के साथ प्रदर्शन कर सकें. यह सिर्फ J10CE की पहचान नहीं थीं बल्कि यह उस गहरे बंधन का भी एक सबूत था जो हमने रात-दिन एक-दूसरे के कंधे से कंधा मिलाकर काम किया.
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News Source: PTI
