Home Top News मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ASEAN नेता हुए सक्रिय, संकट से उभरने के लिए बनाई योजना

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ASEAN नेता हुए सक्रिय, संकट से उभरने के लिए बनाई योजना

by Sachin Kumar
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Iran War ASEAN leaders crisis plan mitigate backlash

ASEAN News : ईरान युद्ध को आसियान देशों ने संकट माना है और इस चुनौती से निपटने के लिए साथ आकर काम करने की बात कही है. साथ ही सदस्यों से देश से आग्रह किया कि ईंधन साझा करने के लिए रास्ता खोला जाए.

ASEAN News : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से पूरी दुनिया में संकट गहराता जा रहा है. होर्मुज के बंद होने से गैस और क्रूड ऑयल की सप्लाई नहीं हो पा रही है. यही वजह है कि अब अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है और कई देश इसके विकल्प निकाल रहे हैं. हालांकि, अब इसकी मार सीधी जनता पर भी देखने को मिल रही है. इसी बीच दक्षिण-पूर्व एशियाई (ASEAN) नेताओं ने शुक्रवार को एक इमरजेंसी बैठक बुलाई. इसका मकसद है कि ईरान युद्ध के बीच अपने लोगों और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को कम करना है. हालांकि, नेताओं ने यह भी माना कि सप्लाई चेन में लगातार रुकावट की वजह से क्षेत्रीय ईंधन भंडार बनाने जैसे जटिल कदम उठाना काफी मुश्किल होगा.

कई मुद्दों पर दिया जोर

वहीं, ईरान संकट के बाद क्रूड ऑयल और गैस की सप्लाई बाधित होने के बाद ईंधनों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई. वहीं, इस साल के शिखर सम्मेलन की मेजबानी फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने दुनिया भर में चल रही आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए शिखर सम्मेलन से पारंपरिक धूम धड़ाका और भव्यता को हटाने का आदेश दिया है. इस सम्मेलन में कई मुद्दों को रेखांकित किया गया है, जिसमें मुख्य रूप एक ऐसी योजना को मंजूरी देना है जहां पर आपातकाल स्थिति में ईंधन साझा करने का रास्ता खुले. साथ ही एक क्षेत्रीय पावर ग्रिड और ईंधन भंडार की योजना बनाना के साथ इस क्षेत्र के लिए कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाना है.

नागरिकों को निकालना एक बड़ी चुनौती

इस दौरान मार्कोस ने कहा कि आपातकालीन कदम को तुरंत लागू किए जाएंगे. लेकिन ईंधन भंडार और पावर ग्रिड बनाना एक जटिल मामला है. इसको लागू करने में काफी समय लग सकता है. इसके अलावा आसियान देशों के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि अगर मध्य पूर्व में फिर से जंग छिड़ जाती है तो उस वक्त वहां से लोगों से कैसे बाहर निकाला जाए. खास बात यह है कि आसियान देशों के करीब 10 लाख से ज्यादा नागरिक वहां पर काम करते हैं.

हालात को सही करने में लगेंगे कई साल

बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला कर दिया था और इस हमले में दक्षिण-पूर्व एशिया के कई नागरिक मारे गए. एक महीने पुराने संघर्ष विराम के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य में लड़ाई रुक-रुककर जारी है. वहीं, नेताओं की तरफ से संयुक्त रूप से जारी बयान में 11 सदस्य देशों से आग्रह किया कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ अपना तालमेल मजबूत करें. इसके अलावा प्रभावित इलाकों में आसियान नागरिकों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित की जा सके. मार्कोस ने कहा कि ईरान युद्ध ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की कमजोरियों को उजागर कर दिया और अगर युद्ध शांत हो जाता है तो हालात को सामान्य करने में कई साल लग जाएंगे.

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News Source: PTI

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