Hantavirus: पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने कहा कि ये मामले ‘आइसोलेटेड’ (अलग-थलग) हैं और इनसे भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य को कोई तत्काल खतरा नहीं है.
Hantavirus: क्रूज पर हंतावायरस से संक्रमित भारतीयों को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है.पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने कहा कि ये मामले ‘आइसोलेटेड’ (अलग-थलग) हैं और इनसे भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य को कोई तत्काल खतरा नहीं है. उन्होंने आश्वस्त किया कि वर्तमान में सामुदायिक प्रसार (community spread) का कोई सबूत नहीं है, इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है. कहा कि हंतावायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों के मल, मूत्र या लार से मनुष्यों में फैलता है. संक्रमण आमतौर पर तब होता है जब लोग खराब स्थानों जैसे जहाज के गोदामों या भंडारण क्षेत्रों में इन दूषित कणों वाली हवा में सांस लेते हैं. फिलहाल स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन आम जनता के लिए कोई बड़ा जोखिम नहीं है.
इन्फ्लूएंजा, डेंगू जैसे दिखते हैं लक्षण
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दोनों भारतीय यात्री जहाज पर पहचाने गए संदिग्ध संक्रमणों के एक छोटे समूह में से थे. स्वास्थ्य अधिकारी एहतियाती कदम उठा रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारियों ने कहा कि हंतावायरस संक्रमण दुर्लभ है और आम तौर पर मानव संचरण के बजाय चूहों से जुड़ा होता है. कुमार ने जोर देकर कहा कि कोविड -19 के विपरीत हंतावायरस लोगों के बीच आसानी से नहीं फैलता है. सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हंतावायरस संक्रमण शुरू में इन्फ्लूएंजा, डेंगू या गंभीर श्वसन बीमारी जैसा हो सकता है. भारत की तैयारियों पर कुमार ने कहा कि देश में संदिग्ध मामलों की पहचान करने के लिए पर्याप्त प्रयोगशाला निगरानी क्षमता है. भारत में आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी और 165 प्रयोगशालाओं के राष्ट्रव्यापी वायरल रिसर्च और डायग्नोस्टिक प्रयोगशाला नेटवर्क के माध्यम से हंतावायरस संक्रमण के लिए नैदानिक क्षमता है.
स्वच्छता और सावधानी बरतने की सलाह
कुमार के अनुसार, लक्षण आम तौर पर एक्सपोज़र के एक से पांच सप्ताह बाद दिखाई देते हैं और शुरुआत में फ्लू जैसी बीमारी से मिलते जुलते हैं. उन्होंने कहा कि सामान्य संकेतों में अचानक बुखार, गंभीर शरीर दर्द, सिरदर्द, थकान, ठंड लगना, मतली, उल्टी, पेट दर्द और सूखी खांसी शामिल है. उन्होंने कहा कि गंभीर मामलों में रोगियों को सांस लेने में कठिनाई, निम्न रक्तचाप या मूत्र में कमी के साथ गुर्दे की समस्या हो सकती है. NIV निदेशक ने स्वच्छता और सावधानी बरतने की सलाह दी है. पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के निदेशक डॉ. कुमार ने जहाजों, गोदामों और खराब हवादार स्थानों में काम करने वाले लोगों के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं.
चूहों से होता है संक्रमण
डॉ. कुमार ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में क्रूज से जुड़े व्यापक संक्रमण का कोई संकेत नहीं है, लेकिन चूहा संक्रमित क्षेत्रों से बचना और स्वच्छता बनाए रखना हंतावायरस से बचाव के लिए अनिवार्य है. डॉ. कुमार ने चेतावनी दी कि जलवायु परिवर्तन, अनियोजित शहरीकरण और बाढ़ जैसी स्थितियां चूहा जनित बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकती हैं. उन्होंने कहा कि भारी बारिश और खराब अपशिष्ट प्रबंधन के कारण चूहे मानव बस्तियों और भंडारण क्षेत्रों की ओर पलायन करते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. NIV निदेशक ने जोर देकर कहा कि बचाव ही इस बीमारी के खिलाफ मुख्य निवारक रणनीति है. उन्होंने लोगों को चूहा संक्रमित स्थानों के संपर्क में आने से बचने और पर्यावरणीय स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी है.
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News Source: PTI
