Marka-e-Haq Day: ऑपरेशन सिंदूर में भारत से मिली करारी हार को छिपाने के लिए पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने घोषणा की है कि 10 मई को हर साल ‘मारका-ए-हक डे’ के तौर पर मनाया जाएगा.
11 May, 2026
भारत ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ मना रहा है. एक साल पहले भारत ने पाकिस्तान के आंतकी ठिकानों को तबाह किया है और तीन दिन चले संघर्ष में उसे घुटनों पर ला दिया है. अपनी करारी हार को छुपाने के लिए पाकिस्तान ने पहले तो आर्मी चीफ आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल बना दिया और अब पाक सरकार ‘मारका-ए-हक डे’ मनाने का नाटक रच रही है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने घोषणा की है कि 10 मई को हर साल ‘मारका-ए-हक डे’ के तौर पर मनाया जाएगा.
ट्रंप को कहा धन्यवाद
‘मरका-ए-हक’ की पहली सालगिरह पर रविवार को एक समारोह में बोलते हुए, शहबाज ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तानी सेना ने दुश्मन को “ऐतिहासिक और करारा जवाब” दिया. PM शहबाज ने जंग रोकने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका की तारीफ की. उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लड़ाई के दौरान उनके डिप्लोमैटिक और पॉलिटिकल सपोर्ट के लिए धन्यवाद भी दिया.
इस मौके पर बोलते हुए, पाकिस्तान के राष्ट्रपति जरदारी ने कहा कि इस लड़ाई ने दिखाया कि जब देश एक साथ उनके साथ खड़ा होता है तो पाकिस्तानी आर्म्ड फोर्स क्या कर सकती हैं. खराब मौसम के कारण आखिरी मिनट में प्लान किया गया फ्लाई पास्ट कैंसिल कर दिया गया. PM के भाषण की शुरुआत में, लड़ाई के दौरान मारे गए लोगों के लिए एक मिनट का मौन रखा गया.
7 मई को शुरु हुआ था ऑपरेशन सिंदूर
22 अप्रैल, 2025 को पाकिस्तान ने पहलगाम में आतंकी हमला किया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे. भारत ने इसके जवाब में पिछले साल 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की गई थी और कम से कम 100 आतंकवादी मारे गए थे. इस कार्रवाई से तनाव बढ़ा और पाकिस्तान ने अगले दिन जवाबी हमले किए. इसके बाद दोनों देशों के बीच तीन दिन तक संघर्ष चलता रहा.
10 मई को हुआ युद्धविराम
लड़ाई के दौरान, पाकिस्तान ने भारत के सीमा से सटे इलाकों को निशाना बनाया, लेकिन भारतीय डिफेंस सिस्टम ने ज्यादातर हमले नाकाम कर दिए. पाकिस्तान के लिए हालात इतने खराब हो गए कि शाहबाज शरीफ को अमेरिका, सऊदी अरब और चीन जैसे देशों से मदद की गुहार लगानी पड़ी. अंत में पाकिस्तान के DGMO को भारत के DGMO से युद्धविराम करने की गुहार लगानी पड़ी. 10 मई को दोनों देशों ने ऑफिशियली युद्ध विराम की घोषणा की. भारत ने दुनिया के सामने यह साफ किया है कि यह समझौता किसी विदेशी दबाव का नतीजा नहीं था, बल्कि पाकिस्तान की सीधी मिलिट्री हार थी और ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है.
यह भी पढ़ें- इन हथियारों से घुटनों पर आया था पाकिस्तान, OP Sindoor के बाद कितना मजबूत हुआ भारत?
News Source: PTI
