Trump Russia Sanctions: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और चीन को बड़ी राहत देने वाला फैसला किया है. रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की तैयारी के बीच ट्रंप ने फिलहाल इन प्रतिबंधों को लागू नहीं करने का फैसला किया है. ये कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब नए अमेरिकी कानून के तहत प्रतिबंध लागू होने की समयसीमा 18 अक्टूबर को खत्म होने वाली थी. ट्रंप ने इस फैसले को अमेरिका के राष्ट्रीय हित में बताया है.
आखिरी वक्त पर क्यों बदला फैसला?
रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार देर रात एक कार्यकारी आदेश जारी किया. इसमें रूस से जुड़े कई आर्थिक प्रतिबंधों और टैरिफ को फिलहाल रोकने की बात कही गई है. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस को प्रमाणित किया है कि, इस समय प्रतिबंधों में छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है. हालांकि, ये राहत स्थायी नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रपति भविष्य में इन प्रतिबंधों को दोबारा लागू कर सकते हैं.
क्या है नया कानून?
पिछले महीने ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम के कानून पर हस्ताक्षर किए थे. इस कानून का मकसद रूस की आर्थिक ताकत को कमजोर करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए मिलने वाले वित्तीय संसाधनों पर रोक लगाई जा सके. इसके तहत रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था. इन देशों में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल थे. इसके अलावा रूस से जुड़े कई बैंकों, अधिकारियों और ऊर्जा कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने तथा रूसी ऊर्जा उत्पादों के अमेरिकी आयात पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रावधान भी था.
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भारत को कितनी राहत?
अगर अमेरिका भारत पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाता, तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में सामान बेचना काफी महंगा हो सकता था. इसका असर टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग उत्पादों और दूसरे निर्यात क्षेत्रों पर पड़ने की आशंका थी. भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में पिछले साल भी तनाव देखने को मिला था. रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी तेल खरीदने की वजह से अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. हालांकि, फरवरी 2026 में इसे हटा दिया गया. व्यापारिक समझौते के तहत रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किया गया. अब नए प्रतिबंधों पर रोक से भारतीय कारोबारियों को फिलहाल राहत मिली है.
भारत ने क्या कहा था?
भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसकी प्राथमिकता देश के 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है. विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत बदलती वैश्विक परिस्थितियों और बाजार की जरूरतों के अनुसार अलग-अलग देशों से ऊर्जा खरीदता रहेगा. भारत ने अमेरिकी अधिकारियों के सामने ये भी स्पष्ट किया था कि रूसी तेल व्यापार पर प्रतिबंध लगाने से दोनों देशों के रिश्तों के साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार भी प्रभावित हो सकता है.
पुतिन से बढ़ती नजदीकियां
ये फैसला ऐसे समय आया है, जब ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच नजदीकियां बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और रूस के बीच डीजल आपूर्ति को लेकर भी समझौता हुआ है. इसके तहत रूस अमेरिका को तीन लाख टन से ज्यादा डीजल उपलब्ध कराएगा. वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस समझौते की आलोचना की है. ट्रंप ने भी जेलेंस्की पर युद्ध खत्म करने के लिए समझौता नहीं कर पाने का आरोप लगाया है. फिलहाल ट्रंप के फैसले से भारत को बड़ी व्यापारिक राहत मिली है. हालांकि, प्रतिबंध पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका की रूस नीति और भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों पर सबकी नजर रहेगी.
News Source: ANI
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