Home Top News Petrol पर बढ़ा टैक्स, डीज़ल को राहत! जानें आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर

Petrol पर बढ़ा टैक्स, डीज़ल को राहत! जानें आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर

by Preeti Pal 16 October 2026, 9:17 AM IST
16 October 2026, 9:17 AM IST
Petrol पर बढ़ा टैक्स, डीज़ल को राहत! जानें आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर

Petrol Diesel Windfall Tax: पेट्रोल और डीजल को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया है. वहीं, डीजल के निर्यात पर टैक्स में बड़ी कटौती की है. नए नियम 16 अक्टूबर से लागू हो गए हैं. हालांकि, आम लोगों के लिए राहत की बात ये है कि घरेलू इस्तेमाल वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

पेट्रोल और डीजल

वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला टैक्स 50 पैसे प्रति लीटर से बढ़ाकर 2.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. यानी अब विदेशों में पेट्रोल बेचने वाली कंपनियों को पहले के मुकाबले प्रति लीटर 2 रुपये ज्यादा टैक्स देना होगा. दूसरी तरफ, डीजल निर्यात पर सरकार ने बड़ी राहत दी है. डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड एवं इंफ्रास्ट्रक्चर सेस सहित कुल शुल्क 16 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 8.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. इसका मतलब है कि डीजल निर्यात पर लगने वाला शुल्क अब 7.50 रुपये प्रति लीटर कम हो गया है.

हवाई ईंधन पर कितना टैक्स?

सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है. एटीएफ पर निर्यात शुल्क पहले की तरह 10.50 रुपये प्रति लीटर रहेगा. ये नई दरें 16 अक्टूबर से शुरू होने वाले अगले 15 दिनों के लिए लागू होंगी. इसके बाद सरकार बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए शुल्क की दोबारा समीक्षा कर सकती है.

Stock Market में दिवाली से पहले धमाका! Sensex-Nifty बने रॉकेट, इन शेयरों ने कराई कमाई

क्या होता है विंडफॉल टैक्स?

विंडफॉल टैक्स एक तरह का अतिरिक्त टैक्स है, जिसे सरकार कंपनियों को होने वाले मुनाफे पर लगाती है. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो तेल कंपनियों को निर्यात से ज्यादा कमाई करने का मौका मिल सकता है. ऐसे में सरकार अतिरिक्त शुल्क लगाकर कंपनियों को घरेलू बाजार के बजाय विदेशों में ज्यादा ईंधन बेचने से रोकने की कोशिश करती है. इसका मकसद देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है.

क्यों लिया गया फैसला?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई थी. इसी को देखते हुए सरकार ने 27 मार्च को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क लगाया था. इसके बाद 16 मई से पेट्रोल निर्यात को भी इस व्यवस्था में शामिल कर लिया गया. सरकार हर पखवाड़े शुल्क की समीक्षा करती है, ताकि बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के मुताबिक फैसला लिया जा सके.

आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या इस फैसले से पेट्रोल और डीजल महंगे हो जाएंगे? फिलहाल ऐसा कोई सीधा असर नहीं है. सरकार ने साफ किया है कि देश में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. यानी ये फैसला खासतौर से से ईंधन निर्यात करने वाली कंपनियों से जुड़ा है. हालांकि, आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और अन्य बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करेंगी.

News Source: ANI

Dollar के सामने मजबूत हुआ रुपया, लगातार 5वें दिन चढ़ा भाव, 5 कारोबारी सत्रों में इतना हुआ मजबूत

You may also like

Live Times logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?