India Forex Reserves: बीते दिनों भारत सरकार ने सोने-चांदी के आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया था. इस फैसले के बाद मार्केट में सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 9 हजार (एक दिन में) से अधिक बढ़ी थी. वहीं, चांदी की कीमत प्रति किलो 19 हजार रुपये (एक दिन में) से अधिक हो गई थी.
India Forex Reserves: पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भारत सहित पूरी दुनिया को प्रभावित किया है. ईरान और अमेरिका के बीच इस तनातनी ने दुनिया की एनर्जी सप्लाई (तेल, गैस आदि) के लिए महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाधित कर दिया है. इस वजह से हजारों की संख्या में तेल, गैस लदे जहाज इस समुद्री मार्ग में फंसे हुए हैं. इस भू राजनीतिक चुनौती के दौरान भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर व मजबूत करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को भरे रहना बहुत जरूरी है.
इस बीच भारत के लिए अच्छी खबर आई है. जी हां, देश के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी देखी गई है. इस बढ़ोतरी में सोनी की बढ़ी कीमत ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई है. शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने बताया कि 8 मई को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी हुई है. यह 6.295 अरब अमेरिकी डॉलर बढ़ा है. मालूम हो कि बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मुद्रा भंडार की मजबूती को बनाए रखने के लिए देश के नागरिकों से 7 खास अपील की थी. इसमें अगले एक साल तक सोने की खरीदारी न करना समेत कई अन्य बातें शामिल थीं. अब सवाल यह है कि क्या पीएम मोदी की अपील से विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिल सकती है?
696.988 अरब डॉलर हुआ विदेशी मुद्रा भंडार
आरबीआई के अनुसार, पिछले रिपोर्टिंग सप्ताह में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 7.794 बिलियन अमेरिकी डॉलर घटकर 690.693 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया था. लेकिन अब इस भंडार में मजबूती दिखी है. शुक्रवार को देश का केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक ने बताया कि 8 मई को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6.295 अरब अमेरिकी डॉलर बढ़ा. यह अब 696.988 अरब अमेरिकी डॉलर का हो गया है.
पश्चिम एशिया तनाव शुरू होने से पहले इस साल 27 फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.494 अरब अमेरिकी डॉलर के अब तक के सबसे हाई पर पहुंच गया था. उसके बाद कई हफ्तों तक इसमें गिरावट देखी गई क्योंकि रुपये में दबाव आ गया था और आरबीआई को डॉलर की बिक्री के जरिए विदेशी मुद्रा भंडार में हस्तक्षेप करना पड़ा था.
विदेशी मुद्रा एसेट्स में 562 मिलियन डॉलर की बढ़त
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 8 मई को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान, विदेशी मुद्रा एसेट्स (foreign currency assets) में 562 मिलियन अमेरिकी डॉलर की बढ़त हुई और यह 552.387 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई. विदेशी मुद्रा भंडार में इनकी बड़ी हिस्सेदारी होती है. डॉलर के संदर्भ में व्यक्त की गई विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखी गई गैर-अमेरिकी मुद्राओं, जैसे कि यूरो, पाउंड और येन के मूल्य में वृद्धि या कमी के प्रभाव शामिल हैं.
सोने की कीमत से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत
भारत में गोल्ड की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. यह बढ़त 8 मई से पहले भी देखी गई. वहीं, देश के विदेशी मुद्रा भंडार में गोल्ड की अपनी एक खास और मजबूत हिस्सेदारी होती है. आरबीआई ने बताया कि इस सप्ताह के दौरान सोने के भंडार का मूल्य 5.637 अरब डॉलर बढ़ा है. इससे भी विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हुआ है. अब सोने का भंडार का मूल्य 5.637 अरब अमेरिकी डॉलर बढ़कर 120.853 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है.
पीएम मोदी की अपील का क्या असर?
बता दें कि भारत के इस विदेशी मुद्रा भंडार का यह आंकड़ा 8 मई को समाप्त हुए सप्ताह का है. पीएम मोदी ने अपील 8 मई के बाद की थी. इस क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि पीएम मोदी की सोने न खरीदने की अपील से गोल्ड मार्केट को झटका लगा था. हालांकि, यह फैसला भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखने के लिए खास साबित हो सकता है. इसका नतीजा हमें आरबीआई के द्वारा आने वाले अगले विदेशी मुद्रा भंडार की रिपोर्ट में दिख सकता है. जानकार बताते हैं कि उम्मीद है कि विदेशी मुद्रा भंडार में और मजबूती दिखेगी.
इस बीच बीते दिनों भारत सरकार ने सोने-चांदी के आयात शुल्क को भी बढ़ा दिया था. इसे 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया था. इस फैसले के बाद मार्केट में सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 9 हजार (एक दिन में) से अधिक बढ़ी थी. वहीं, चांदी की कीमत प्रति किलो 19 हजार रुपये (एक दिन में) से अधिक हो गई थी.
पीएम मोदी की 7 अपील
बीते दिनों भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नागरिकों से खास अपील की थी. उन्होंने इस मुश्किल वैश्विक दौर में भारत को मजबूत बनाने के लिए 7 अहम अपीलें की. इनमें शामिल हैं – जहां भी मुमकिन हो, ‘वर्क फ्रॉम होम’ को प्राथमिकता दें; ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की खपत कम करें और पब्लिक ट्रांसपोर्ट (मेट्रो, बस आदि) का प्रयोग करें; एक साल तक विदेश यात्रा से बचें; स्वदेशी उत्पाद अपनाएं; खाना पकाने के तेल का इस्तेमाल कम करें; प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें; और एक साल तक सोने की खरीदारी कम करें. भारत सरकार ने कहा था कि जिम्मेदारी की सामूहिक भावना भारत को और भी ज्यादा मजबूत और आत्मनिर्भर बना सकती है.
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News Source: PTI
