Geopolitics: वर्तमान में दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष चल रहा है और इसके कारण एनर्जी का संकट खड़ा हो गया है. इस मुद्दे पर अब पश्चिमी देशों में लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है और वह सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि इस संकट को जल्द से जल्द खत्म किया जाए. हालांकि, पश्चिमी देशों की सरकारें अपने नागरिकों को समझाने की कोशिश में कर रही हैं कि यह संकट ईरान युद्ध की वजह से खड़ा हुआ है और इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है. इस उथल-पुथल भरी दुनिया पर भारत में पोलैंड के राजदूत प्योत्र एंटोनी स्वितल्स्की ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हम उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रहे हैं. इसमें यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता के साथ नाटो और यूरोपीय संघ के अन्य सदस्यों के खिलाफ छेड़ा गया ‘हाइब्रिड युद्ध’ भी शामिल है.
ज्यादातर देशों के सामने खड़ा है एनर्जी संकट
प्योत्र एंटोनी स्वितल्स्की ने कहा कि भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से एनर्जी सप्लाई चेन है. अब हम यह भी समझते हैं कि वैश्विक सुरक्षा वास्तव में अविभाज्य है. इन संघर्षों के परिणाम वैश्विक होते हैं और हम सभी इनसे प्रभावित होते हैं. इस लिहाज से देखा जाए तो भारत और पोलैंड एक ही स्थिति में है. हमें मिलकर इस बारे में सोचना चाहिए कि हम अंतरराष्ट्रीय संबंधों को कानून की सर्वोच्चता पर आधारित कैसे काम कर सकते हैं. उन्होंने आगे कहा कि पोलैंड और भारत का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ताकत के बजाय समझदारी को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. दुर्भाग्य से आज भी दुनिया में ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ से काम किया जा रहा है. साथ ही हमें इस बात को समझना होगा कि कुछ ऐसे नेता हैं जो केवल ताकत की भाषा समझते हैं.
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आतंकवाद को दिया कड़ा जवाब
हाल ही में भारत ने आतंकवादी हमलों का सामना किया और इसके बाद देश की सरकार ने कड़ा जवाब दिया. यही वजह है कि भारत को हमेशा सतर्क रहना पड़ता है और वह अपने सैन्य ताकत को भी लगातार मजबूत कर रहा है. पोलैंड के राजदूत ने कहा कि यह बातें हमारे ऊपर पर भी लागू होती है. साथ ही भारत और पोलैंड एक मंच पर इसलिए भी एक साथ खड़े होते हैं, क्योंकि वह दुनिया में कानून के शासन पर आधारित व्यवस्था चाहते हैं. उन्होंने आगे कहा कि हम आपके इस आकलन से सहमत हैं कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में बड़े सुधारों की जरूरत है और हम भारत को ग्लोबल साउथ की सबसे प्रखर आवाजों में से एक मानते हैं.
पोलिश कंपनियां करना चाहती हैं निवेश
पोलैंड के राजदूत ने यह भी बताया कि एक्सिओम-4 मिशन में एक भारतीय और एक पोलिश अंतरिक्ष यात्री का संयुक्त मिशन एक प्रतीकात्मक कदम है. अंतरिक्ष उद्योग हमारे आर्थिक संबंधों में एक बहुत ही आशाजनक अध्याय साबित हो सकता है. इसके अलावा पोलैंड की कई ऐसी कंपनियां हैं जो भारत में निवेश करने की इच्छा रखती हैं. हम अभी से ही भारतीय कंपनियों और पोलिश अंतरिक्ष कंपनियों के बीच पहले कॉन्ट्रैक्ट और सहयोग समझौते होते हुए देख रहे हैं. साथ ही मैं पहले से ही हर मुद्दे का निष्कर्ष नहीं निकलता हूं, लेकिन अंतरिक्ष से जुड़ा पहलू एजेंडे में जरूर शामिल होगा.
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News Source: ANI
