Home Latest News & Updates कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने सुजॉय पॉल: 15 महीने की उम्र में पिता को खोया, संघर्षों से पाया यह मुकाम

कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने सुजॉय पॉल: 15 महीने की उम्र में पिता को खोया, संघर्षों से पाया यह मुकाम

by Sanjay Kumar Srivastava
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Sujoy Paul

Calcutta High Court: सुजॉय पॉल ने शुक्रवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ले ली. पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने न्यायमूर्ति पॉल को पद की शपथ दिलाई.

Calcutta High Court: सुजॉय पॉल ने शुक्रवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ले ली. पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने मुख्य न्यायाधीश के न्यायालय कक्ष कोर्ट नंबर एक में आयोजित एक समारोह में न्यायमूर्ति पॉल को पद की शपथ दिलाई. न्यायमूर्ति पॉल का तबादला 18 जुलाई 2025 को कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में हुआ था. पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवज्ञानम की सेवानिवृत्ति के बाद से वे उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे. शपथ ग्रहण के बाद अपने संबोधन में पॉल ने कहा कि कानूनी पेशे में मेरा प्रवेश संयोगवश हुआ, न कि योजनाबद्ध तरीके से. औपचारिक पारिवारिक पृष्ठभूमि न होने के बावजूद मैंने इस चुनौतीपूर्ण पेशे में अपना रास्ता केवल अपने द्वारा अपनाए गए कठोर अनुशासन और अपने वरिष्ठों व उन माननीय न्यायाधीशों से प्राप्त अमूल्य मार्गदर्शन के कारण ही बनाया है.

याद की मां की सीख

न्यायमूर्ति पॉल ने कहा कि मैं इस संस्था की पवित्रता और दक्षता को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा. न्यायमूर्ति पॉल ने कहा कि महज 15 महीने की उम्र में अपने पिता को खोने के बाद उनके चरित्र की नींव उनकी मां ने रखी, जो एक सरकारी स्कूल में सहायक शिक्षिका और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित थीं. उन्होंने कहा कि वह न केवल जीवन में मेरी पहली शिक्षिका थीं, बल्कि स्कूल में मेरी क्लास टीचर भी थीं. उन्होंने खुशी व्यक्त की कि मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान उनकी मां कोर्ट हॉल में उपस्थित थीं.

मध्य प्रदेश से शुरू की वकालत

जून 1964 में स्वर्गीय नोनी गोपाल पॉल और मंजुश्री पॉल के घर जन्मे मुख्य न्यायाधीश ने पंडित एलएस झा मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल से स्कूली शिक्षा और मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से स्नातक, स्नातकोत्तर और कानून की डिग्री प्राप्त की. तेलंगाना उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने 1990 में मध्य प्रदेश बार काउंसिल में एक वकील के रूप में पंजीकरण कराया और सिविल, संवैधानिक, औद्योगिक और सेवा तथा कानून की अन्य शाखाओं में सक्रिय रूप से वकालत की. उन्हें मई 2011 में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और अप्रैल 2014 में स्थायी न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया. 24 मार्च को तेलंगाना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति हुई.

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News Source: Press Trust of India (PTI)

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