Home Latest News & Updates बेशकीमती जमीन पर सरकार की नजरः दिल्ली रेस क्लब और जयपुर पोलो ग्राउंड नहीं होंगे खाली, हाईकोर्ट ने लगाई रोक

बेशकीमती जमीन पर सरकार की नजरः दिल्ली रेस क्लब और जयपुर पोलो ग्राउंड नहीं होंगे खाली, हाईकोर्ट ने लगाई रोक

by Sanjay Kumar Srivastava
0 comment
दिल्ली रेस क्लब और जयपुर पोलो ग्राउंड नहीं होंगे खाली, हाईकोर्ट ने लगाई रोक, अगली सुनवाई 9 को

Delhi High Court: दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दिल्ली रेस क्लब और इंडियन पोलो एसोसिएशन (जयपुर पोलो ग्राउंड) को उनके ऐतिहासिक परिसरों से बेदखल करने की केंद्र सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है.

Delhi High Court: दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दिल्ली रेस क्लब और इंडियन पोलो एसोसिएशन (जयपुर पोलो ग्राउंड) को उनके ऐतिहासिक परिसरों से बेदखल करने की केंद्र सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है. न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने 25 मार्च को आदेश पारित करते हुए केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को निर्देश दिया कि वे इन संस्थाओं का जबरन कब्जा न लें. अदालत ने यह राहत 12 मार्च, 2026 को जारी बेदखली नोटिसों के खिलाफ दी है. दोनों संस्थाओं को 12 मार्च, 2026 को बेदखली के नोटिस दिए गए थे. न्यायमूर्ति ने माना कि संस्थाओं के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला बनता है और यदि तुरंत अंतरिम राहत नहीं दी गई तो उन्हें अपूरणीय क्षति होगी.

1926 से चल रहा है रेस क्लब

अदालत ने केंद्र को 9 अप्रैल की अगली सुनवाई तक कोई भी कठोर कार्रवाई करने से रोक दिया है. यह विवाद दिल्ली के पॉश कमल अतातुर्क मार्ग और रेस कोर्स क्षेत्र की बेशकीमती जमीन से जुड़ा है. अदालत ने कहा कि रेस क्लब 53.242 एकड़ के परिसर में 1926 में पहली बार पट्टा दिए जाने के बाद से चल रहा है. न्यायमूर्ति पुष्करणा ने सरकार को आदेश दिया कि वह कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना वादी (रेस क्लब, पोलो ग्राउंड) को बेदखल नहीं करेगा. जयपुर पोलो ग्राउंड के संबंध में इंडियन पोलो एसोसिएशन (IPA) द्वारा दायर एक समानांतर याचिका में अदालत ने कहा कि भले ही सरकार बड़े सार्वजनिक उद्देश्य के लिए भूमि को फिर से लेना चाहती है, लेकिन उसे कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए.

अगली सुनवाई 9 अप्रैल को

इंडियन पोलो एसोसिएशन की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने कहा कि एसोसिएशन ने चार दशकों से अधिक समय से जमीन पर लगातार कब्जा कर रखा है और पहले ही मार्च 2030 तक पट्टे का भुगतान कर दिया है. हालांकि, केंद्र ने तर्क दिया कि पट्टा 1993 में समाप्त हो गया था और IPA केवल एक लाइसेंसधारक था, जिसे बने रहने का कोई अधिकार नहीं था. इस पर अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उदाहरणों का हवाला देते हुए इस बात पर जोर दिया कि सरकार किसी व्यक्ति को बेदखल करने के लिए बल का उपयोग नहीं कर सकती है. यदि सरकार संबंधित भूमि को फिर से हासिल करना चाहती है, तो सरकार कानून के अनुसार उचित कार्यवाही शुरू करेगी और कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करेगी. अदालत ने दोनों मामलों में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय से जवाब मांगा है. अब मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी.

ये भी पढ़ेंः क्या फिर से लगने वाला है लॉकडाउन? हरदीप पुरी ने बताई सच्चाई, तेल कीमतों पर भी बोलें पेट्रोलियम मंत्री

News Source: PTI

You may also like

LT logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?