Ashwagandha Benefits and Harm: भारतीय आयुष मंत्रालय ने अश्वगंधा को लेकर बहुत ही जरूरी जानकारी दी है, जो हर किसी को पता होनी चाहिए. आयुष मंत्रालय ने अश्वगंधा की पत्तियों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है.
10 May, 2026
भारत में जड़ी बूटियों का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है. जब दवाएं गोलियों के रूप में नहीं थी, तब हम औषधीय पौधों से अपनी दवाएं बनाते थे. आज भी कई लोग एलोपैथी की जगह आयुर्वेदिक इलाज पर भरोसा करते हैं. भारत में कई प्रकार के औषधीय पौधे और पेड़ पाए जाते हैं, जिनमें से एक है अश्वगंधा. यह एक प्राचीन और बहुत ही प्रभावशाली जड़ी-बूटी है. इसे भारतीय जिनसेंग भी कहा जाता है. आमतौर पर इसका इस्तेमाल तनाव कम करने, नींद बेहतर करने और शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए किया जाता है. लेकिन हाल ही में भारतीय आयुष मंत्रालय ने इसकी पत्तियों पर बैन लगा दिया है. कई लोग इसकी पत्तियों का सेवन करते हैं, उनके लिए यह खबर बहुत जरूरी है. चलिए जानते हैं आयुष मंत्रालय ने अश्वगंधा की पत्तियों के इस्तेमाल पर रोक क्यों लगाई और इसका सेवन कैसे करना चाहिए.
जड़ फायदेमंद, पत्तियां नहीं
भारत में, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) और आयुष मंत्रालय ने सप्लीमेंट्स में अश्वगंधा की पत्तियों के इस्तेमाल पर बैन लगा दिया है. यह पाया गया कि कुछ कंपनियां मुनाफे के लिए जड़ की जगह सस्ती पत्तियों का एक्सट्रैक्ट इस्तेमाल कर रही थीं, जो सेहत के लिए खतरनाक है.
आयुष मंत्रालय के मुताबिक ,अश्वगंधा एक पावरफुल एडाप्टोजेन है जो पारंपरिक दवा और आपके रोज़ाना के वेलनेस गोल के बीच के गैप को भरता है. यह शक्तिशाली जड़ जिंदगी के हर पहलू में आगे बढ़ने के लिए पूरा सपोर्ट करती है. लेकिन इसका सेवन ध्यानपूर्वक करना बहुत जरूरी है. सेफ्टी और ज्यादा से ज्यादा असर पक्का करने के लिए, सिर्फ अश्वगंधा की जड़ों के इस्तेमाल की इजाजत है. अश्वगंधा की पत्तियों का इस्तेमाल- चाहे कच्चे रूप में हो या एक्सट्रैक्ट के रूप में, साफ तौर पर मना है. आयुष मंत्रालय की यह रोक उन लोगों के लिए चिंता का विषय है, जो इसका नियमित सेवन करते हैं. चलिए जानते हैं कि अश्वगंधा के फायदे और नुकसान क्या हैं और इसका सेवन कैसे करना चाहिए.
क्या है अश्वगंधा और कैसा दिखता है.
अश्वगंधा एक पुरानी और बहुत असरदार आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है. संस्कृत में, “अश्व” का मतलब घोड़ा और “गंध” का मतलब गंध होता है. इसके पौधे की जड़ों से घोड़े के पसीने जैसी गंध आती है, इसीलिए इसे अश्वगंधा कहा जाता है. आयुर्वेद में, इसे “इंडियन जिनसेंग” भी कहा जाता है. अश्वगंधा का पौधा एक छोटी झाड़ी के जैसा होता है, जिसकी ऊंचाई 1.5 फीट से 3 फीट तक होती है. इसके फल छोटे-छोटे चेरी टमाटर जैसे होते हैं. इसकी मुख्य पहचान इसकी सफेद-भूरी और मोटी जड़ें हैं, जो जमीन के अंदर 1-2 फीट तक फैली रहती हैं. इसकी जड़ें ही ज्यादातर औषधीय रुप में इस्तेमाल की जाती हैं. इसका पौधा आपको आसानी से नर्सरी पर या ऑनलाइन मिल जाएगा. आप इसे अपने घर पर आसानी से उगा भी सकते हैं.

नुकसानदायक क्यों हैं अश्वगंधा की पत्तियां ?
- आयुष मंत्रालय ने अश्वगंधा की जड़ों को फायदेमंद बताया है, लेकिन उसकी पत्तियों को खतरनाक बताया है. इसका सबसे बड़ा कारण इसकी पत्तियों में ज्यादा मात्रा में मौजूद रसायन है.
- पत्तियों में ‘विथाफेरिन-ए’ नाम का कंपाउंड जड़ के मुकाबले अधिक मात्रा में होता है. यह तत्व अधिक मात्रा में होने पर कोशिकाओं (Cells) को नुकसान पहुंचा सकता है.
- अश्वगंधा की पत्तियों का अर्क हमारे लिवर के लिए भी बहुत नुकसानदायक हो सकता है. अगर इसकी पत्तियों का जूस बनाकर या किसी और तरीके से पीते हैं, तो इससे पीलिया और लिवर फेलियर जैसी गंभीर समस्या हो सकती है.
- इसके अलावा पत्तियों को सीधा खाने से पेट की परत में जलन पैदा हो सकती है, जिससे दस्त, उल्टी और पेट में ऐंठन जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
- पत्तियों में कुछ कंपाउंड नर्वस सिस्टम पर बुरा असर डाल सकते हैं, जिससे बहुत ज्यादा नींद या कन्फ्यूजन हो सकती है.
अश्वगंधा के औषधीय गुण
आयुर्वेद के अनुसार, अश्वगंधा की जड़ों में ऐसा रसायन होता है, जो उम्र बढ़ने को धीमा करता है और शरीर को फिर से जवान बनाता है. इसकी जड़ों में पाए जाने वाले विथानोलाइड्स, सैपोनिन और एल्कलॉइड जैसे एक्टिव कंपाउंड इसे पावरफुल जड़ी-बूटी बनाते हैं.
मेंटल हेल्थ के लिए- यह शरीर में कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) को कम करता है, जिससे दिमाग शांत रहता है. इसमें ट्राइएथिलीन ग्लाइकॉल होता है, जो नींद न आने की समस्या से राहत दिलाने और गहरी-आरामदायक नींद को बढ़ावा देने में मदद करता है.
फिजिकल ताकत और स्टैमिना– यह मांसपेशियों की ताकत और साइज बढ़ाने में मदद करता है, जिससे यह जिम जाने वालों के बीच एक पॉपुलर चॉइस बन गया है. पुरुषों में, यह नैचुरली टेस्टोस्टेरोन लेवल को बढ़ाता है, जिससे एनर्जी और ताकत बढ़ती है.
इम्यूनिटी बूस्टर– अश्वगंधा की जड़ें शरीर में व्हाइट ब्लड सेल्स (WBCs) के प्रोडक्शन को बढ़ाती हैं, जिससे शरीर की इन्फेक्शन और बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है.
ब्रेन फंक्शन- यह याददाश्त और फोकस को बेहतर बनाता है. यह ब्रेन सेल्स को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाता है.
एंटी-इंफ्लेमेटरी और हार्ट हेल्थ– इसकी जड़ों में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो अंदरूनी सूजन को कम करते हैं. यह खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) और ट्राइग्लिसराइड्स को कम करके हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद करता है.
ब्लड शुगर कंट्रोल- अश्वगंधा की जड़ इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाकर ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस रखने में मदद कर सकती है.

इस्तेमाल करने का सही तरीका
आयुर्वेद में अश्वगंधा का उपयोग लंबे समय से किया जा रहा है. हालांकि, इसका सही तरीके से सेवन करना बहुत जरूरी है, वरना यह शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकता है. आयुर्वेद में, आमतौर पर अश्वगंधा की जड़ के चूर्ण (पाउडर) का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि इसे पूरे पौधे की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है. विशेषज्ञ अक्सर इसे सीमित मात्रा में, गुनगुने दूध या पानी के साथ, दिन में एक बार लेने की सलाह देते हैं. कई लोग, जल्दी परिणाम पाने की चाह में, या तो इसकी खुराक बढ़ा देते हैं या इंटरनेट पर मिली सलाह को आंख मूंदकर मान लेते हैं. लेकिन, ऐसा करना हानिकारक साबित हो सकता है, क्योंकि, हर व्यक्ति की शारीरिक बनावट, आयु और स्वास्थ्य की स्थिति अलग-अलग होती है, इसलिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक या डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है.
इसके अलावा, खाली पेट अश्वगंधा लेना हर किसी के लिए सही नहीं होता. कुछ लोगों को गैस, पेट दर्द या जी मिचलाना जैसी समस्या हो सकती है. इसलिए, उचित जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह के बिना इसका सेवन नहीं करना चाहिए.
किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए?
जैसा कि हमने पहले बताया कि सभी के लिए अश्वगंधा सुरक्षित नहीं है और डॉक्टर की सलाह बिना इसे नहीं लेना चाहिए. गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर से परामर्श किए बिना इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे होर्मोन में बदलाव होता है, जिसका सीधा असर बच्चे पर पड़ सकता है. थायरॉइड संबंधी बीमारियों से ग्रसित लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि अश्वगंधा से थायरोक्सिन हार्मोन का स्तर प्रभावित होता है. इसके अलावा, ऑटोइम्यून बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह अधिक जोखिम पैदा कर सकता है, क्योंकि यह प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को उत्तेजित करता है.
लिवर संबंधी बीमारियों से परेशान लोगों को विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि जरूरत से ज्यादा खुराक या गलत इस्तेमाल के कारण लिवर पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है. इसके अलावा, जो लोग पहले से किसी बीमारी या समस्या के लिए आयुर्वेदिक या कोई और दवा ले रहे हैं, उन्हें विशेषज्ञ की सलाह के बिना अश्वगंधा का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह कुछ दवाओं के प्रभाव को बदल सकता है.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या रोजाना अश्वगंधा लेना सुरक्षित है?
हां, अश्वगंधा को सीमित मात्रा में और किसी विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार लेना आम तौर पर सुरक्षित माना जाता है. हालांकि, इसे लंबे समय तक या बहुत ज्यादा मात्रा में लेना नुकसानदायक हो सकता है.
अश्वगंधा का सबसे सुरक्षित रूप कौन सा है?
आम तौर पर, अश्वगंधा की जड़ का पाउडर या जड़ से निकाले गए अर्क को सबसे सुरक्षित और असरदार रूप माना जाता है.
अश्वगंधा लेने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
रात को गुनगुने दूध या पानी के साथ अश्वगंधा लेना खास तौर पर फायदेमंद माना जाता है. हालांकि, इसे लेने का सबसे सही समय हर व्यक्ति की खास जरूरतों और सेहत पर निर्भर करता है.
क्या जिम जाने वाले लोग अश्वगंधा ले सकते हैं?
हां, बहुत से लोग मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने, रिकवरी में मदद करने और स्टैमिना बढ़ाने के लिए अश्वगंधा लेते हैं. हालांकि, सही मात्रा का ध्यान रखना चाहिए.
निष्कर्ष
आयुष मंत्रालय द्वारा जारी की गई चेतावनी एक रिमाइंडर है कि किसी चीज का “आयुर्वेदिक” होना ही अपने आप में इस बात की गारंटी नहीं देता कि वह पूरी तरह से सुरक्षित है. आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन सही खुराक में, उचित समय पर और सेवन की सही विधि का पालन करते हुए करना भी उतना ही आवश्यक है. आजकल, सोशल मीडिया और इंटरनेट घरेलू उपचारों से भरे पड़े हैं, जिसके चलते लोग विशेषज्ञ की सलाह लिए बिना ही कई चीजों का इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं. हालांकि, कोई भी औषधीय पदार्थ अगर गलत मात्रा में या गलत तरीके से सेवन किया जाए, तो वह शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है. अश्वगंधा के मामले में भी यही सिद्धांत लागू होता है. इसलिए, यह सलाह दी जाती है कि आप खुद से दवा लेने से बचें और इसका सेवन केवल किसी योग्य डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से परामर्श करने के बाद ही करें.
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