Abhijit Deepke: CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को कुछ शर्तों के साथ शनिवार को जमानत दे दी गई है. दिल्ली पुलिस के अनुसार, एक ‘पीस बॉन्ड’ (शांति बनाए रखने का मुचलका) पर हस्ताक्षर करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया जाएगा. CJP के संयोजक अभिजीत दिपके को शनिवार को एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया गया. इसे देखते हुए मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी. CJP के समन्वयक अभिजीत दिपके को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन लाया गया. दिपके को एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. CJP और दिपके की कानूनी टीम पहले से ही पुलिस स्टेशन में मौजूद थी.
महिला प्रदर्शनकारियों ने किया मार्च
सीपीआई नेता एनी राजा ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान महिला और ट्रांसजेंडर प्रदर्शनकारियों के कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोपों में पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. वामपंथी महिला संगठनों की सदस्याओं ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर पुलिसकर्मियों की कथित यौन और लैंगिक हिंसा के खिलाफ नारे लगाए. उन्होंने कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की. प्रदर्शनकारी गुरुद्वारा बंगला साहिब के पास एकत्र हुईं और वहां से पुलिस मुख्यालय की ओर मार्च किया. वे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित यौन और लैंगिक हिंसा के मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपने पहुंचीं.
दिल्ली पुलिस आयुक्त से मुलाकात का मिला समय
उधर, दिल्ली पुलिस द्वारा महिला प्रदर्शनकारियों के कथित यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस अधिकारियों से मुलाकात के बाद सीपीआई नेता एनी राजा ने कहा कि हमने अतिरिक्त डीसीपी को इन सभी पहलुओं के बारे में विस्तार से बताया है. हमने उनसे यह भी मांग की कि वे दिल्ली पुलिस आयुक्त से मुलाकात का समय दिलाना सुनिश्चित करें. उन्होंने आश्वासन दिया कि दो दिनों के भीतर दिल्ली पुलिस आयुक्त से मुलाकात का समय दिला दिया जाएगा. इसी आश्वासन के आधार पर हम आज अपना प्रदर्शन समाप्त कर रहे हैं. लेकिन अगर उन्होंने अपना वादा पूरा नहीं किया, तो हम फिर वापस आएंगे. महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शनिवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकाला.
यौन हिंसा की घटनाओं से रोष
संगठनों ने कहा कि वीडियो, तस्वीरों और पीड़ितों के व्यक्तिगत बयानों में महिलाओं, ट्रांसजेंडर और नॉन-बाइनरी प्रदर्शनकारियों के कथित यौन उत्पीड़न और शारीरिक हिंसा के मामले सामने आए हैं. उनके मुताबिक, 20 जुलाई से पुलिस कार्रवाई के दौरान ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं और दो अक्तूबर के बाद इनकी शिकायतें बढ़ गईं. संगठनों ने ऐसे वीडियो का हवाला दिया, जिनमें कथित तौर पर पुरुष पुलिसकर्मियों को महिला प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट करते देखा जा सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत में ले जाने वाली बसों और हिरासत केंद्रों के भीतर भी यौन हिंसा की घटनाएं हुईं.
News Source: ANI
