Home Top News ‘कानूनी पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं…’ लॉ के छात्रों से बोले CJI सूर्यकांत; कही ये बात

‘कानूनी पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं…’ लॉ के छात्रों से बोले CJI सूर्यकांत; कही ये बात

by Sachin Kumar 17 October 2026, 4:23 PM IST
17 October 2026, 4:23 PM IST
CJI Surya Kant urges law graduates uphold justice

CJI Surya Kant: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के 34वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में शामिल हुए. इस दौरान शनिवार को छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कानूनी शिक्षा केवल अकादमिक जगत तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य समाज को समझना और उसकी सेवा के लिए तैयार करना भी होना चाहिए. इसके अलावा, CJI सूर्यकांत ने छात्रों से न्याय बनाए रखने, स्वतंत्रता की रक्षा करने और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आग्रह किया.

न्याय के लिए खड़े होने का साहस

लॉ यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट स्टूडेंट को संबोधित करते हुए सूर्यकांत ने कहा कि कानूनी शिक्षा का उद्देश्य आपराधिक या संवैधानिक कानून के सिद्धांतों को सीखना नहीं है. इसका मकसद उन लोगों से भी जुड़ना है, जिनका नजरिया आपसे अलग होता है. कानूनी पेशे की जिम्मेदारियों पर जोर देते हुए सूर्यकांत ने कहा कि इसके लिए न केवल कानूनों और पुराने फैसलों की जानकारी होनी चाहिए. साथ ही न्याय के लिए खड़े होने का साहस और उन लोगों की बातों को सुनने के लिए विनम्रता भी होनी चाहिए, जिनकी आवाजों को नजरअंदाज कर दिया जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि कानूनी पेशा कमजोर दिल वाले लोगों के लिए नहीं है. इसमें न केवल कानूनों और पुराने फैसलों पर अच्छी पकड़ होनी चाहिए, बल्कि सही चीज के लिए खड़े होने का साहस और उन आवाजों को सुनने की विनम्रता भी होनी चाहिए.

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निष्पक्षता के महत्व पर दिया जोर

इसके अलावा, उन्होंने बौद्धिक स्वतंत्रता और निष्पक्षता के महत्व पर भी जोर दिया. उन्होंने छात्रों से कहा कि कोई भी राय बनाने से पहले विभिन्न नजरिए को सुना जाना चाहिए. खासकर उन नजरियों को जिनसे आप असहमत हैं. उन्होंने कहा कि बौद्धिक स्वतंत्रता के लिए निष्पक्षता जरूरी है. किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले दूसरों की बात सुनना, व्यक्ति को उसके विचारों करके और उनकी गरिमा बनाए रखना है. सीजेआई ने कहा कि कानून स्थिर नहीं होता, बल्कि यह उन लोगों की सोच और कार्यों से विकसित होता है जो इसका अभ्यास करते हैं.

दबाव झेलने की क्षमता हासिल करें

वहीं, सीजेआई ने कहा कि लॉ स्कूल में बिताए गए वर्षों ने स्नातकों को इस पेशे की जटिलताओं को समझने और उनसे निपटने के लिए तैयार किया है. इसमें बौद्धिक फुर्ती के साथ-साथ नैतिक जिम्मेदारी और दबाव झेलने की क्षमता भी शामिल है. सूर्यकांत ने स्नातकों को आगाह किया कि वे अपनी सुविधा के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता न करें और न ही अपने पेशेवर जीवन में शॉर्टकट अपनाएं. उन्होंने कहा कि वह उन मूल्यों का भी पालन करते रहे जो उन्होंने संस्थान से सीखा है.

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