SIR Row: देश भर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की टिप्पणी पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पलटवार किया है. थरूर ने कहा कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस. मुझे नहीं लगता कि इन देशों से भारत की तुलना करना प्रासंगिक है. शशि थरूर ने फ्रांस में जारी हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में उस तरह की हिंसा का बिल्कुल भी समर्थन नहीं किया जाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन में विश्वास करते हैं और अब तक उन्होंने ऐसे ही प्रदर्शनों में हिस्सा लिया है. थरूर ने आगे कहा कि उन्हें लगता है कि पूरा विपक्ष भी इसी तरह शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करने में विश्वास करता है.
रिजिजू ने लगाया था युवाओं को भड़काने का आरोप
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया के एक्स पोस्ट में आरोप लगाया था कि कुछ नेता और भारत विरोधी समूहों ने युवाओं को भड़काने और सड़कों पर हिंसा करने की कोशिश की. उन्होंने बांग्लादेश में तख्तापलट और फ्रांस हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस है. हालांकि, रिजिजू ने यह भी कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन सिर्फ चुनाव के जरिए ही हो सकता है. इसके अलावा उन्होंने अपने बयान में जॉर्ज सोरोस का भी जिक्र किया. साथ ही उन्होंने AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण का एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें वह रिजीम चेंज करने की बात कह रहे हैं.
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लोगों के नाम मतदाता सूची के नाम से हटा दिए गए
देश भर में SIR के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर शशि थरूर ने कहा कि हम बस स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग कर रहे हैं. आज चिंता की बात यह है कि एक बेहद त्रुटिपूर्ण, अनियमित और आंशिक रूप से गैर-कानूनी प्रक्रिया के चलते बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं. यही वजह है कि हम मांग कर रहे हैं कि इस पूरी प्रक्रिया को रद्द कर दिया जाए. यह एक संवैधानिक मुद्दा है. कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि इसका सरकार को गिराने या ऐसी किसी कोशिश से कोई लेना-देना नहीं है.
लोकतंत्र किसी किसी की दी हुई भेंट नहीं
थरूर आगे कहते हैं कि लोकतंत्र किसी की दी हुई भेंट नहीं है. हम, भारत के आम नागरिक, इसके संरक्षक हैं. हर भारतीय नागरिक को अपने लोकतंत्र की रक्षा करने का अधिकार है. मैं बस इतना कह रहा हूं कि हम चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं से कह रहे हैं कि वे अपनी जिम्मेदारी समझें और भारत के लोकतांत्रिक संविधान के अनुसार काम करें. बस इतनी सी बात है. मैं इन संस्थाओं को चुनौती नहीं दे रहा हूं, बल्कि उनके काम करने के तरीके और उनके बर्ताव पर सवाल उठा रहा हूं. सच कहूं तो, भारत में हम सभी को इस बात को लेकर चिंतित होना चाहिए.
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News Source: ANI
