Home Latest News & Updates ‘तुम दिल्ली धमाके में शामिल..’ कहकर लूटे 16.5 लाख रुपये, रिटायर्ड अधिकारी हुआ डिजिटल अरेस्ट का शिकार

‘तुम दिल्ली धमाके में शामिल..’ कहकर लूटे 16.5 लाख रुपये, रिटायर्ड अधिकारी हुआ डिजिटल अरेस्ट का शिकार

by Neha Singh 22 January 2026, 9:40 AM IST (Updated 22 January 2026, 11:53 AM IST)
22 January 2026, 9:40 AM IST (Updated 22 January 2026, 11:53 AM IST)
Mumbai Digital Arrest

Mumbai Digital Arrest: मुंबई में एक बार फिर एक रिटायर्ड सिविक अधिकारी डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुआ है. स्कैमर्स ने उनसे 16.5 लाख रूपए ठगे हैं.

22 January, 2026

डिजिटल अरेस्ट के मामले बढ़ते जा रहे हैं. डिजिटल चोर ज्यादातर सीनियर सिटीजन को निशाना बना रहे हैं. मुंबई में एक बार फिर एक रिटायर्ड सिविक अधिकारी डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुआ है. स्कैमर्स ने उनसे 16.5 लाख रूपए ठग लिए हैं. पुलिस ने बताया कि 75 साल के एक रिटायर्ड सिविक अधिकारी से साइबर जालसाजों ने कथित तौर पर 16.5 लाख रुपये ठग लिए. हैरानी की बात है जालसाजों ने खुद को ATS और NIA का कर्मचारी बताया और दिल्ली बम ब्लास्ट केस में उनका नाम आने का दावा करते हुए पूछताछ के लिए उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर लिया.

धमाके में शामिल होने का आरोप

एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि पीड़ित, जो मुंबई के अंधेरी (ईस्ट) का रहने वाला है, सोमवार को वेस्ट रीजन साइबर पुलिस स्टेशन पहुंचा. पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के बाहर विस्फोटकों से लदी एक गाड़ी में धमाका हुआ था, जिसमें 12 से ज़्यादा लोग मारे गए थे. पुलिस के मुताबिक, पीड़ित, जो बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का एक रिटायर्ड अधिकारी था, को 11 दिसंबर को दिल्ली एंटी-टेररिज्म डिपार्टमेंट का अधिकारी होने का दावा करने वाले अनजान लोगों का फोन आया. फोन करने वाले ने उसे धमकाते हुए कहा कि उसका नाम दिल्ली बम ब्लास्ट केस में सामने आया है और उससे चुपके से पूछताछ करने की जरूरत है.

ऐसे दिया ठगी को अंजाम

फिर फोन करने वाले ने पीड़ित से सिग्नल एप्लीकेशन डाउनलोड करने को कहा, जहां उसे एक वीडियो कॉल आया. कॉल के दौरान, जालसाज़ों में से एक ने खुद को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) का ऑफिसर सदानंद दाते बताया. पुलिस ने बताया कि कॉल करने वाले ने पीड़ित को बताया कि उसके मोबाइल नंबर से जुड़े एक बैंक अकाउंट में मनी लॉन्ड्रिंग एक्टिविटी के जरिए कथित तौर पर 7 करोड़ रुपये आए हैं और चेतावनी दी कि इस मामले में उसे गिरफ्तार किया जाएगा.

मामले की गंभीरता और नेशनल सिक्योरिटी से इसके कथित कनेक्शन का हवाला देते हुए, कॉल करने वाले ने पीड़ित को इस बारे में किसी से बात न करने की चेतावनी दी. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जालसाज़ों ने दावा किया कि एजेंसी को यह वेरिफाई करने की ज़रूरत है कि उसके इन्वेस्टमेंट और डिपॉजिट कानूनी सोर्स से हैं या नहीं और पीड़ित से वेरिफिकेशन के लिए अपने पैसे कुछ बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने को कहा. इसके बाद, पीड़ित ने 16.5 लाख रुपये जमा कर दिए, जिसके बाद कॉल करने वाले ने उसका नंबर ब्लॉक कर दिया.

सतर्क रहने की जरूरत

पुलिस ने बताया कि बाद में पीड़ित ने साइबर पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. डिजिटल अरेस्ट साइबर क्राइम का एक बढ़ता हुआ रूप है जिसमें धोखेबाज़ पुलिस, कोर्ट के अधिकारी या सरकारी एजेंसियों के कर्मचारी बनकर ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिए पीड़ितों को डराते हैं. वे पीड़ितों को बंधक बनाते हैं और उन पर पैसे देने का दबाव डालते हैं.

News Source:- PTI

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