Share Market: शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करने वालों के बीच इन दिनों एक ही सवाल है कि, आखिर बाज़ार का अगला मल्टी बैगर सेक्टर कौन सा होगा?
10 March, 2026
एक टाइम था जब इंडियन शेयर मार्केट में सिर्फ आईटी कंपनियों का बोलबाला था. टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो जैसे नाम दलाल स्ट्रीट के बेताज बादशाह हुआ करते थे. मगर अब वक्त बदल रहा है. पिछले चार सालों में जिस तरह से डिफेंस यानी सेक्टर की कंपनियों ने इन्वेस्टर्स की झोली भरी है, उसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है. सबका एक ही सवाल है क्या डिफेंस सेक्टर अब वही कमाल दिखा रहा और दिखाने वाला है जो 2000 के दशक में आईटी सेक्टर ने दिखाया था?
मुनाफे की मिसाइल
अगर हम पिछले चार सालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो डिफेंस शेयर्स की रफ्तार किसी फाइटर जेट से कम नहीं रही है. भारत डायनेमिक्स लिमिटेड यानी BDL के बारे में बात करें, तो 4 साल पहले इसका भाव सिर्फ 215 रुपये था, जो अब 1355 रुपये के पार पहुंच चुका है. यानी इन्वेस्टर्स को 500% से ज्यादा का बंपर रिटर्न मिल चुका है. वहीं, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी BEL का शेयर 67 रुपये से उड़कर 470 रुपये पर पहुंच चुका है. इसमें इन्वेस्टर्स को 600% से ज्यादा का प्रोफिट मिला है. इसके अलावा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) का शेयर 657 रुपये से बढ़कर 4,030 रुपये के लेवल को टच कर चुका है. यानी इसने भी 500% की शानदार ग्रोथ दिखाई है. साथ ही डिफेंस के छोटे शेयर्स यानी स्मॉल-कैप की दुनिया में तो और भी गजब का नजारा दिखा. अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने 1750% का गजब का रिटर्न दिया. वहीं, जीआरएसई ने 1,000% और जेन टेक्नोलॉजीज ने 625% की छलांग लगाई है.
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आईटी की चमक
शेयर बाजार के एक्सपर्ट्स का मानना है कि आईटी सेक्टर इस टाइम कई वजह से चुनौतियों का सामना कर रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का बढ़ता असर, ग्लोबल लेवल पर कंपनियों के खर्च में कटौती और करेंसी के उतार-चढ़ाव ने आईटी शेयरों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है. रूस-यूक्रेन वॉर के बाद से आईटी स्टॉक्स इन्वेसटर्स की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं. इसके ठीक उलट, डिफेंस सेक्टर के लिए ग्लोबल टेंशन किसी ‘बूस्टर डोज’ की तरह काम कर रही है. मिडिल ईस्ट से लेकर इंडो-पैसिफिक में बढ़ते तनाव ने दुनिया भर में डिफेंस बजट को बढ़ा दिया है.
ऑर्डर बुकिंग ताकत
डिफेंस सेक्टर को नया आईटी क्यों कहा जा रहा है, इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है ‘अर्निंग विजिबिलिटी’. देखा जाए तो, आईटी कंपनियां कॉर्पोरेट खर्च पर डिपेंड रहती हैं, जो मंदी के टाइम कम हो सकता है. लेकिन डिफेंस कंपनियां सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स पर चलती हैं. इनके पास अगले 5 से 10 सालों के ऑर्डर पहले से ही बुक होते हैं. भारत सरकार का ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान और ‘डिफेंस इंडेनाइजेशन’ इस सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है. हम अब सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी नहीं कर रहे, बल्कि दुनिया को हथियार बेच भी रहे हैं. फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट बढ़कर 23,622 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो 10 साल पहले 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था. अब सरकार का टारगेट इसे 50,000 करोड़ रुपये तक ले जाने का है.
वॉर का टाइम
यहां कंपैरिजन करने का मतलब ये नहीं है कि आईटी सेक्टर खत्म हो गया है, बल्कि ये है कि डिफेंस अब एक लॉन्ग टर्म स्ट्रक्चरल ग्रोथ वाले फेज में एंटर कर चुका है. वैसे भी, जब वॉर जैसी सिचुएशन होती है, तो डिफेंस स्टॉक्स चर्चा में रहते हैं. मगर असली काम तब शुरू होता है जब वॉर खत्म होने के बाद कोई भी देश अपनी सिक्योरिटी को और मजबूत करने के लिए भारी इन्वेस्टमेंट करता है. खैर, हम बस इतना ही कहेंगे कि, शेयर बाजार में निवेश हमेशा जोखिम भरा होता है, इसलिए किसी भी बड़े फैसले से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइज़र से सलाह जरूर लें.
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