Union Budget: गुजरात का तंबाकू उत्पादक क्षेत्र केंद्रीय बजट का बेसब्री से इंतजार कर रहा है. चारोतर क्षेत्र के खेड़ा जिले के किसान चिंतित हैं.
Union Budget: गुजरात का तंबाकू उत्पादक क्षेत्र केंद्रीय बजट का बेसब्री से इंतजार कर रहा है. चारोतर क्षेत्र के खेड़ा जिले के किसान चिंतित हैं. पिछले साल सरकार द्वारा तंबाकू पर 28% से बढ़ाकर 40% जीएसटी लगाने के बाद किसान पहले से ही इसके प्रभाव से जूझ रहे थे. अब केंद्र ने 1 फरवरी से तंबाकू पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने की घोषणा की है. किसानों का कहना है कि इस कदम से यह उद्योग पंगु हो सकता है. कई किसानों और व्यापारियों ने सरकार द्वारा राहत न दिए जाने पर तंबाकू व्यवसाय छोड़ने का फैसला किया है. किसानों के अनुसार, उर्वरक, कीटनाशक और मजदूरी सहित बढ़ती लागतों ने खेती को अव्यवहारिक बना दिया है. किसानों ने चेतावनी दी है कि बढ़ा हुआ कर उद्योग को गंभीर झटका दे सकता है. तंबाकू किसान और व्यापारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से प्रस्तावित उत्पाद शुल्क वापस लेने या जीएसटी कम करने का आग्रह कर रहे हैं. उनका कहना है कि ऐसा न होने पर कई लोग कारोबार छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएंगे.

कपड़ा व्यापारी जीएसटी में राहत की कर रहे मांग
केंद्रीय बजट नजदीक आने के साथ ही मध्य कोलकाता के विशाल थोक और खुदरा बाजार बुर्राबाजार में खतरे की घंटी बज रही है. दुकानदारों का कहना है कि कभी थोक कपड़ों के व्यापार का चहल-पहल भरा केंद्र रहा यह बाजार अब अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है. इसका कारण कोई प्रतिस्पर्धी बाजार नहीं, बल्कि खरीदारी का मोबाइल स्क्रीन पर स्थानांतरित होना है. उनका कहना है कि ई-कॉमर्स की दिग्गज कंपनियां भारी छूट, तेज डिलीवरी और घर बैठे सामान खरीदने की सुविधा देकर ग्राहकों को पारंपरिक बाजारों से दूर कर रही हैं. व्यापारी सरकार से करों में कमी करने का आग्रह कर रहे हैं ताकि वे ऑनलाइन मार्केटिंग पोर्टलों से प्रतिस्पर्धा कर सकें. उनका कहना है कि इसके बिना उनका अस्तित्व ही खतरे में है. छोटे व्यापारियों का कहना है कि बढ़ती लागत, घटते मुनाफे और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मिल रही प्रतिस्पर्धा ने कई व्यापारियों को अपना कारोबार चलाने के लिए संघर्ष करने पर मजबूर कर दिया है. 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट के मद्देनजर बुर्राबाजार के व्यापारी जीएसटी में राहत, सब्सिडी और ऑनलाइन बाजारों के सख्त नियमन की उम्मीद कर रहे हैं.
बढ़ती लागत से मछुआरों का जीवन और कठिन
मछली पकड़ने की बढ़ती लागत ने विशाखापत्तनम के मछुआरों का जीवन और कठिन बना दिया है. उनकी मुख्य चिंता ईंधन की बढ़ती कीमतें और अपने काम को चलाने के लिए आवश्यक उपकरणों की अपर्याप्तता है. मछुआरा समुदाय अब आगामी केंद्रीय बजट से राहत की उम्मीद लगाए बैठा है. मछुआरे वित्त मंत्री से अपनी आजीविका और विकास को प्राथमिकता देने का आग्रह कर रहे हैं. वे चाहते हैं कि राज्य और केंद्र सरकारें वित्तीय सहायता और सब्सिडी प्रदान करें. विशाखापत्तनम झींगा और मछली का एक प्रमुख निर्यात केंद्र है, जो दुनिया भर के बाजारों में आपूर्ति करता है. व्यापारी सरकार से निर्यात शुल्क कम करने और प्रसंस्करण इकाइयों को प्रोत्साहन देने का आह्वान कर रहे हैं ताकि भारतीय समुद्री भोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना रहे. 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश होने वाला है, ऐसे में तटीय आंध्र प्रदेश के मछुआरे इस पर पैनी नजर रखे हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि इस साल का बजट उन्हें जीवनदान देगा.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
