Delhi AQI : दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब होने के मामले में 7 पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिया था. 2018 में दिसंबर के महीने में AQI 360 था और सोमवार को यही वायु गुणवत्ता 400 के पार पहुंच गई है.
Delhi AQI : दिल्ली में वायु प्रदूषण गंभीर स्थिति में पहुंचने के बाद केंद्र शासित प्रदेश ने एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन किया है. यह कमेटी समस्या पता लगाने के अलावा सुझाव और व्यवहारिक समाधान उपलब्ध कराएगी. सरकार का कहना है कि विशेषज्ञों की तरफ से जांच करने के बाद जो सुझाव दिए जाएंगे वह काफी कारगर साबित होंगे. इस कमेटी में 11 लोगों को शामिल किया गया है जिसमें मुख्य रूप से पर्यावरण एवं वन विभागों के सचिव, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के प्रतिनिधि और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के पूर्व अध्यक्ष के साथ ही IIT कानपुर और IIT दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के एक्सपर्ट शामिल होंगे. इसी बीच पता चला है कि दिल्ली में इस साल दिसंबर में साल 2018 के बाद सबसे खराब हवा की क्वालिटी दर्ज की गई है.
सोमवार को 400 के पार AQI
वहीं, खेतों में आग लगने से PM2.5 प्रदूषण में 3.5 प्रतिशत का योगदान था. एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि दिसंबर 2018 में राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 360 था. इसके अलावा सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के डेटा के मुताबिक, दिसंबर का औसत 2024 में 294, 2023 में 348, 2022 में 319, 2021 में 336, 2020 में 332, 2019 में 337 और 2015 में 301 रहा था. साथ ही इस महीने केंद्र शासित प्रदेश में 5 दिनों तक हवा की क्वालिटी गंभीर रही. पिछले साल दिल्ली में अतिगंभीर श्रेणी में 6 दिन थे. साथ ही सोमवार को भी दिल्ली की हवा की क्वालिटी गंभीर कैटेगरी में चली गई. शाम करीब 4 बजे AQI 401 था, जबकि यह रविवार को यही AQI 390 था.
दिल्ली सबसे प्रदूषित शहरों में से एक
दूसरी तरफ पर्यावरणविद अमित गुप्ता की तरफ से दायर एक RTI एप्लीकेशन के जवाब में CPCB ने बताया कि इस साल 5 दिसंबर तक दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान सिर्फ 5 प्रतिशत रहा था, जबकि दिल्ली-NCR देश के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक बना रहा. हालांकि, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत IITM पुणे के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) की तरफ से जेनरेट किए गए डेली मीन से पता चलता है कि पिछले कुछ सालों में अक्टूबर-दिसंबर की अवधि के दौरान PM2.5 के स्तर में पराली जलाने के योगदान में काफी गिरावट आई है. बता दें कि CPCB के मुताबिक, 0 से 50 के बीच AQI को ‘अच्छा’, 51 से 100 को ‘संतोषजनक’, 101 से 200 को ‘मध्यम’, 201 से 300 को ‘खराब’, 301 से 400 को ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 को ‘गंभीर’ माना जाता है.
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