Pakistani Spy Gang Exposed: गाजियाबाद में पाकिस्तान के जासूसी कर रहे 21 लोगों के गैंग का पर्दाफाश हुआ है. यह गैंग सेना की हरकत पर नजर रखने के लिए जगह-जगह पर कैमरा इंस्टॉल कर रहा था.
- गाजियाबाद से प्रशांत त्रिपाठी की रिपोर्ट
गाजियाबाद में चल रहे पाकिस्तान से जुड़े एक बड़े जासूसी गैंग का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें महिला और 6 नाबालिगों समेत 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस से जुड़ा यह नेटवर्क, भारतीय सेना की हरकतों पर रियल-टाइम नजर रखने के लिए खुफिया CCTV कैमरे लगाने के एक बड़े ऑपरेशन में लगा हुआ था. डीसीपी गाजियाबाद धवल जायसवाल की माने तो यह डिजिटल जासूसी नेटवर्क जासूस खास जगहों पर हाई-डेफिनिशन, SIM वाले और सोलर पावर वाले CCTV कैमरे लगा रहे थे ताकि सेना के रास्तों, सैनिकों और हथियारों सहित लाइव वीडियो फीड स्ट्रीम की जा सके.
सेना की हरकत पर नजर रखने का था प्लान
दिल्ली कैंटोनमेंट रेलवे स्टेशन और सोनीपत रेलवे स्टेशन पर कैमरे लगाए गए थे और दिल्ली से कश्मीर तक ऐसे ही 50 कैमरे लगाने का प्लान था. सेंसिटिव डिफेंस जगहों और रेलवे स्टेशनों के लाइव फुटेज, फोटो और GPS डेटा सीधे पाकिस्तानी हैंडलर्स को WhatsApp और खास ऐप्स के जरिए भेजे जाते थे. इस पूरे नेटवर्क को चलाने के लिए व्हाट्सएप पर एक ग्रुप बनाया गया था जिसका नाम था दीन ए इलाही. इस ग्रुप को खास तौर पर मीरा नाम की एक महिला चलाती थी.
हर वीडियो क्लिप के मिलते थे 10,000
मीरा वह शख्सियत है जिस पर पहले भी कई आपराधिक मामले दिल्ली से लेकर मुंबई तक में दर्ज है. हथियारों की स्मगलिंग के लिए इसे खासतौर पर जाना जाता है. सीसीटीवी कैमरे इंस्टॉल करने के लिए ऑपरेटिव्स को हर असाइनमेंट के लिए 10,000-15,000 रुपए दिए जाते थे. सोहेल मलिक जैसे मास्टरमाइंड्स को हर वीडियो क्लिप के लिए लगभग ₹10,000 मिलते थे. सोहेल (मेरठ से) मास्टरमाइंड के तौर पर काम करता था, जबकि महक नेटवर्क में युवा सदस्यों को रिक्रूट करने के लिए जिम्मेदार थी. नौशाद अली ने टेक्निकली स्किल्ड लोगों को रिक्रूट किया, जिनमें मोबाइल रिपेयर, कंप्यूटर का काम और CCTV इंस्टॉलेशन में माहिर लोग भी शामिल थे, जो अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर बैकग्राउंड के होते थे.
रिक्रूटमेंट स्ट्रेटेजी
नेटवर्क ने ऐसे युवाओं को टारगेट किया जिनमें संभावित क्रिमिनल रुझान थे लेकिन जिनका कोई पिछला क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं था ताकि वे पकड़े न जा सकें. शक कम करने के लिए खास तौर पर महिलाओं को भर्ती किया गया था. पुलिस अधिकारियों ने कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड और सर्विलांस इक्विपमेंट जब्त किए, जिन्हें फोरेंसिक एनालिसिस के लिए भेजा गया है. नेटवर्क की गतिविधियां दिल्ली-NCR तक ही सीमित नहीं थीं, जांच से पता चला कि ऑपरेटिव हाई-सिक्योरिटी जोन को रिकॉर्ड करने के लिए मुंबई और राजस्थान, पंजाब और कर्नाटक में दूसरी जगहों पर भी गए थे. मॉड्यूल के ऑपरेशन भारतीय सेना के बारे में रियल-टाइम इंटेलिजेंस इकट्ठा करने के लिए एक हाई-टेक, लो-प्रोफाइल तरीके पर फोकस करते थे.
मनी ट्रेल की जांच
मीरा को शक से बचाने में मदद करने के लिए भर्ती किया गया था, साथ ही वह हथियारों की मूवमेंट में मदद करती थी. नेटवर्क ने कथित तौर पर दिल्ली से कश्मीर तक ऐसे 50 कैमरे लगाने की योजना बनाई थी. सबसे बड़ी खास बात यह है कि पेमेंट अक्सर UPI के जरिए होते थे, लेकिन ट्रेल छिपाने के लिए लोकल सेंटर्स के जरिए कैश में निकाले जाते थे. फिलहाल पुलिस मनी ट्रेल के पूरे एंगल को खाने में लगी हुई है.
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