Uttarakhand News : उत्तराखंड विधानसभा में ‘नारी सम्मान- डेमोक्रेसी में अधिकार’ पर चर्चा हुई. इस दौरान सीएम धामी ने विपक्ष पर निशाना साधा और उन्होंने विपक्ष के अहंकार की तुलना रावण से कर दी.
Uttarakhand News : संसद में भिड़ंत होने के बाद उत्तराखंड में कांग्रेस और बीजेपी के बीच में जबरदस्त टकराव देखने को मिला. मामला यह है कि लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद उत्तराखंड विधानसभा में यह मुद्दा उठाया गया, जहां पर सत्तापक्ष और विपक्ष में भिड़ंत हो गई. इसी बीच राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में उनकी सरकार महिलाओं को मजबूत करने के मिशन में लगातार काम कर रही है. ‘नारी सम्मान- डेमोक्रेसी में अधिकार’ पर चर्चा के लिए विधानसभा का सेशन बुलाया गया था. इस दौरान सीएम धामी ने कहा कि हमारी सरकार मातृ शक्ति के अधिकारों पक्का करने के लिए बिना रुके या थके आगे बढ़ेगी.
अहंकार के कारण रावण का पतन हुआ
वंदे मातरम् के साथ दिन की कार्यवाही शुरू हुई. इसके बाद सीएम धामी ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर घमंडी होने का आरोप लगाया. इसके अलावा उन्होंने महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष के विरोध की तुलना रावण के घमंड से कर दी और अब देश की मातृ शक्ति पहचानने लगी है कि कौन सच में उनके अधिकारों की रक्षा कर रहा है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह वहीं अहंकार है जिसके कारण रावण का पतन हुआ था, संसद में विपक्ष के रवैये में भी दिखाई दिया. उन्होंने आगे कहा कि जहां प्रधानमंत्री मोदी इस बिल को पारित करवाने का श्रेय सभी राजनीतिक दलों को बांटने को तैयार थे. वहीं, विपक्ष ने परिसीमन और जनगणना का बहाना बनाकर लोगों को गुमराह करना चुना.
लोकसभा में गिरा बिल
आपको बताते चलें कि बीजेपी और विपक्षी पार्टियों के बीच संविधान (131वाँ संशोधन) बिल, 2026 को लेकर तीखी बहस हुई. इस बिल का उद्देश्य था कि 2029 में विधायी निकायों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करवाना था. 17 अप्रैल को इस बिल पर मतदान हुआ और लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने पर यह बिल गिर गया.
व्यावहारिकता पर खड़े किए सवाल
वहीं, विपक्ष के नेता यशपाल आर्य ने इस बहस में हिस्सा लेने के दौरान बिल की तकनीकी व्यावहारिकता पर सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने तर्क दिया कि साल 2027 तक महिलाओं को आरक्षण देने का सरकार का दावा गुमराह करने वाला है. कोटा कानूनी तौर पर जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने से जुड़ा हुआ है. कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि आखिरी जनगणना साल 2011 में हुई थी. इसके बाद यह कार्य 2021 में होना था, लेकिन 2026 में इसका कार्य शुरू हो चुका है. उन्होंने अनुमान लगाया कि इसका वास्तविक कार्यान्वयन 2033 या 2034 तक टल सकता है.
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News Source: PTI
