Jammu & Kashmir : आतंकियों को नेस्तनाबूद करने वाला ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ न सिर्फ सुरक्षा बलों की बहादुरी का प्रतीक है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारत का जज्बा कभी झुकता नहीं.
- दिल्ली से अरुण गंगवार की रिपोर्ट
जम्मू-कश्मीर के दुर्गम पहाड़ों में, जहाँ हवा में डर का साया मंडराता है, एक ऐसी कहानी ने जन्म लिया जो देशभक्ति की मिसाल बन गई. किश्तवाड़ के घने जंगलों में छिपे आतंकियों को नेस्तनाबूद करने वाला ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ न सिर्फ सुरक्षा बलों की बहादुरी का प्रतीक है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारत का जज्बा कभी झुकता नहीं. कल्पना कीजिए, सुबह की पहली किरण के साथ ही जवान पहाड़ चढ़ रहे हैं, उनके कदमों से धरती कांप रही है. बताया जा रहा है कि इस ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद का कुख्यात टॉप कमांडर सैफुल्लाह समेत तीन आतंकवादी मारे गए।
सैफुल्लाह कौन था?
वह पाकिस्तान से आया हुआ खूंखार आतंकी था, जिसके नाम पर दर्जनों हमलों का कलंक लगा हुआ था. पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताए जाने वाले सैफुल्लाह ने किश्तवाड़ और आसपास के इलाकों में कई निर्दोषों की जान ली थी. उसके मंसूबे थे जम्मू-कश्मीर को अस्थिर करना था, लेकिन भारतीय सेना ने उसे जंगल में ही दौड़ा-दौड़ाकर खत्म कर दिया.
जंगल की स्याही में लिखी शुरुआत
सप्ताह भर पहले, खुफिया एजेंसियों को चतरू बेल्ट के पासेरकुट इलाके में संदिग्ध हलचल की भनक मिली. शीर्ष सूत्रों ने पुष्टि की कि जैश के दो पाकिस्तानी कमांडर, जिनमें सैफुल्लाह प्रमुख था, मिट्टी के एक छोटे से घर में छिपे हुए थे. जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने तुरंत ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ शुरू किया। 9 अप्रैल से चली यह मुहिम रविवार शाम को भयंकर मुठभेड़ के साथ चरम पर पहुंची. जवान पहाड़ी रास्तों पर चढ़े, हवा में तनाव घना था. अचानक, आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. गोलियों की बौछार से जंगल गूँज उठा.
सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया. सुबह साढ़े दस बजे शुरू हुई मुठभेड़ घंटों चली. आतंकी पहाड़ी पर बने मिट्टी के घर में घुस गए थे, लेकिन जवानों ने उन्हें बाहर निकालने में कोई कसर न छोड़ी. सैफुल्लाह, जो किश्तवाड़ में कई हमलों का जिम्मेदार था, अपने दो साथियों के साथ मारा गया. उनके शव हट में आग लगने से जल गए, जिससे पहचान मुश्किल हो गई, लेकिन खुफिया जानकारी ने पुष्टि कर दी. यह ऑपरेशन न सिर्फ तीन आतंकियों का सफाया था, बल्कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को करारा झटका.
सैफुल्लाह: अंधेरे का साया
सैफुल्लाह कोई साधारण आतंकी नहीं था. जैश-ए-मोहम्मद का यह टॉप कमांडर पाकिस्तानी था, जिसने किश्तवाड़, डोडा और आसपास के क्षेत्रों में कई घातक हमले करवाए. पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड होने के अलावा, वह डोडा-किश्तवाड़ में कई विस्फोटों का सूत्रधार था. पुलिस ने उसके सिर पर लाखों का इनाम घोषित किया था. वह जंगलों में छिपकर युवाओं को भटकाता, हथियारों से लैस कर हमलों को अंजाम देता. किश्तवाड़ जैसे संवेदनशील इलाके में उसकी मौजूदगी पूरे क्षेत्र को खतरे में डाल रही थी. ऑपरेशन के दौरान जब जवानों ने उसे घेरा, तो उसने भागने की कोशिश की, लेकिन सटीक फायरिंग ने उसे हमेशा के लिए शांत कर दिया. उसकी मौत से जैश का नेटवर्क कमजोर पड़ा है.
इस घटना ने सैफुल्लाह जैसे सैकड़ों आतंकियों की कहानी उजागर की। ये लोग सीमा पार से आते हैं, जंगलों में डेरा डालते हैं और निर्दोषों का खून बहाते हैं. लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों का जज्बा इनके मंसूबों को चूर-चूर कर देता है। सैफुल्लाह की मौत एक चेतावनी है. भारत की धरती पर आतंक का कोई स्थान नहीं.
मुठभेड़ की भयावहता
कल्पना कीजिए उस मिट्टी के घर को, जहां आतंकी छिपे थे. बाहर हरी-भरी वादियां, लेकिन अंदर मौत का खेल। जब जवान नजदीक पहुंचे, तो आतंकियों ने एके-47 से झड़प शुरू कर दी. दोनों तरफ से गोलियाँ चल रही थीं, पहाड़ी इको से गूँज रही थीं. मुठभेड़ इतनी तीव्र थी कि शाम ढलने तक चली. सुरक्षाबलों ने न सिर्फ तीनों को मार गिराया, बल्कि उनके पास से दो एके-47 राइफलें, गोला-बारूद और अन्य सामग्री बरामद की.
सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है. जवान हर कोने की तलाशी ले रहे हैं, ताकि कोई छिपा आतंकी न बचे. यह ऑपरेशन अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों के सहयोग से चला, जो जैश के नेटवर्क को ट्रैक कर रहा था. किश्तवाड़ जैसे इलाके, जहां दुर्गम रास्ते और घने जंगल हैं, आतंकियों के लिए सुरक्षित आश्रय होते हैं. लेकिन इस बार, ट्रैप उल्टा पड़ गया.
सुरक्षा बलों की अमिट छाप
इस ऑपरेशन के पीछे जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और सीआरपीएफ के जवानों का अथाह योगदान है. वे दिन-रात पहाड़ चढ़ते हैं, खतरों का सामना करते हैं. एक अधिकारी ने कहा कि हमारा मकसद है क्षेत्र को शांतिपूर्ण बनाना. इनकी बहादुरी से न सिर्फ आतंक कम हुआ, बल्कि स्थानीय लोगों में विश्वास बढ़ा. किश्तवाड़ के निवासी अब राहत महसूस कर रहे हैं.
ऐसे ऑपरेशनों से भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति मजबूत होती है। सैफुल्लाह जैसे कमांडरों का सफाया करके हम सीमा पार के आकाओं को संदेश दे रहे हैं. भारत लड़ेगा, जीतेगा। यह विजय सभी सुरक्षाकर्मियों को सलाम है.
व्यापक प्रभाव और भविष्य
यह घटना जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापना की दिशा में बड़ा कदम है. जैश-ए-मोहम्मद का नेटवर्क कमजोर हुआ, जो पाकिस्तान से संचालित होता है. पिछले डेढ़ महीने से इन आतंकियों की तलाश जारी थी और अब सफलता मिली. लेकिन चुनौतियां बाकी हैं. सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा, और सुरक्षा बल सतर्क हैं.
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