Home Top News अचानक कुत्ते की आवाज में भौंकने लगा किशोर, बैठने से लेकर चलने तक का बदला अंदाज

अचानक कुत्ते की आवाज में भौंकने लगा किशोर, बैठने से लेकर चलने तक का बदला अंदाज

by Live Times 14 March 2026, 7:53 PM IST (Updated 16 March 2026, 12:35 PM IST)
14 March 2026, 7:53 PM IST (Updated 16 March 2026, 12:35 PM IST)
अचानक कुत्ते की आवाज में भौंकने लगा किशोर, बैठने से लेकर चलने तक का बदला अंदाज, दहशत में परिवार

Mirzapur News: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. एक कुत्ते के काटने के 4 महीने बाद किशोर ने कुत्ते की तरह अचानक भौंकना शुरू कर दिया है.

  • मिर्जापुर से सपनेश कुमार सिंह की रिपोर्ट

Mirzapur News: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. एक कुत्ते के काटने के 4 महीने बाद किशोर ने कुत्ते की तरह अचानक भौंकना शुरू कर दिया है. किशोर के पिता बच्चे को इलाज के लिए कभी अस्पताल ले जा रहे हैं तो कभी मंदिर ले जा रहे हैं ताकि बेटा सही हो जाए. पूरा मामला कछवा थाना क्षेत्र के जोगीपुरवा गांव का है. गांव निवासी भाईलाल का बेटा करन (17 साल) अपने ननिहाल हरौवा गया हुआ था. वहां पर 4 महीने पहले कुत्ते ने काट लिया था. एक इंजेक्शन ननिहाल में लगाया गया था, दूसरा इंजेक्शन कछवां सीएचसी में लगाया गया. इसके बाद कोई इंजेक्शन परिवार वाले ने नहीं लगवाया, जबकि चार इंजेक्शन लगनी चाहिए.

मंदिर जाकर मांग रहे मन्नत

लापरवाही के कारण कक्षा आठवीं में पढ़ने वाले छात्र करन का 4 महीने बाद कुत्तों की तरह आवाज निकलने लगा है. चलने और बैठने का भी अंदाज बदल गया है. मामला तब सामने आया जब दिव्यांग पिता भाई लाल कछवां थाना क्षेत्र के जमुआ चौराहे पर स्थित श्री राम जानकी मंदिर और हनुमान मंदिर बेटे को लेकर गया था. वहां भगवान से मन्नते मांग रहा था कि बेटा सही हो जाए. इसके पहले बेटे को कछवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी ले जा चुका था . वहीं मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर व चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर पंकज पांडेय ने बताया कि इंजेक्शन का पूरा डोज न लगाने के कारण यह समस्या हुई है. इसे हाइड्रोफोबिया कहते हैं. इसमें रैबीज के लक्षण दिखने लगते हैं तो सांस की नली सिकुड़ने लगती है . जिससे आवाज कुत्ते की तरह आने लगती है. उसको पानी से भी डर लगेगा. इसमें बचने की संभावना न के बराबर होती है. इसलिए पूरी डोज लगवानी चाहिए.

एंटी रैबीज डोज न लगने से बिगड़ी हालत

मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ सचिन किशोर ने बताया कि पूरे एंटी रैबीज डोज नहीं लगे हैं तो उसे रैबीज के लक्षण आने लगेंगे. एक बार लक्षण आ गया तो पेशेंट को संभालना मुश्किल होता है. पेशेंट की लाइफ सुरक्षित करना मुश्किल हो जाता है. इसके लिए कम से कम पीड़ा हो न्यूरोलॉजिस्ट और साइकोलॉजस्ट्री डिपार्टमेंट में इलाज कराना चाहिए. उन्होंने बताया कि रैबीज का लक्षण एक बार आ जाता है तो संभावना बचने का नगण्य होता है, इसलिए जिसे भी कुत्ता काटा हो उसे पूरे रैबीज का डोज लगवाना चाहिए. चिकित्सकों ने कहा कि ऐसे मामलों में मंदिर या झाड़-फूंक के चक्कर में समय बर्बाद करना स्थिति को और बिगाड़ देता है. रैबीज का लक्षण दिखने के बाद जीवित बचने की संभावना लगभग शून्य होती है, इसलिए तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह अनिवार्य है.

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