Home Top News हत्या या गिरफ्तारी… सब मंजूरः कानून मंत्री की खुली धमकी के बाद भी दिसंबर में लौटेंगी शेख हसीना

हत्या या गिरफ्तारी… सब मंजूरः कानून मंत्री की खुली धमकी के बाद भी दिसंबर में लौटेंगी शेख हसीना

by Sanjay Kumar Srivastava 30 July 2026, 7:03 PM IST (Updated 30 July 2026, 7:08 PM IST)
30 July 2026, 7:03 PM IST (Updated 30 July 2026, 7:08 PM IST)
गिरफ्तारी या हत्या... सब मंजूरः कानून मंत्री की खुली धमकी के बाद भी दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी हसीना

Sheikh Hasina: भारत से लौटने पर बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा. हसीना को सीधे अदालत में सरेंडर करने का मौका ही नहीं मिलेगा. यह दावा बांग्लादेश के कानून मंत्री एम असदुज्जमां ने गुरुवार को किया.कानून मंत्री का यह बयान एक दिन बाद आया जब हसीना ने एक समाचार एजेंसी को बताया कि अपनी जान को खतरा होने के बावजूद वह दिसंबर तक अपने देश लौटने के लिए दृढ़ हैं. उन्होंने कहा कि हो सकता है कि मेरी हत्या कर दी जाए. हो सकता है कि मुझे गिरफ्तार कर लिया जाए. हो सकता है कि मुझे जेल भेज दिया जाए. मुझे अपनी किस्मत के बारे में पूरी जानकारी है. फिर भी, मैं वापस जाना चाहती हूं क्योंकि मेरे लोग मुझे बुला रहे हैं.

सहयोगियों के साथ संपर्क में हैं अपदस्थ प्रधानमंत्री

इस महीने की शुरुआत में उनके और भी इंटरव्यू हुए थे जिनसे पता चला कि वह अपनी पार्टी के सहयोगियों के साथ इस साल के अंत तक बांग्लादेश लौटने की संभावना पर चर्चा कर रही थीं. असदुज्जमां ने कहा कि 78 वर्षीय हसीना को लौटने का अधिकार है, लेकिन कानून अपना काम करेगा और हम कानून का उल्लंघन करने वाला कोई काम नहीं करेंगे. मंत्री ने कहा कि मौत की सजा की दोषी होने और बांग्लादेशी नागरिक होने के बावजूद अगर वह घर लौटकर कानून का सम्मान करते हुए सरेंडर करना चाहती हैं तो हो सकता है कि ऐसा करने से पहले ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए. हम उस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे जो कानून ने हमें दिया है. जब उनसे पूछा गया कि उनके बाद बनी अंतरिम सरकार द्वारा उनका पासपोर्ट रद्द किए जाने के बाद वह कैसे लौट सकती हैं, तो मंत्री असदुज्जमां ने कहा कि यह उनकी समस्या है, मेरी नहीं.

मौत की सजा सुना चुकी है कोर्ट

उन्होंने कहा कि जब भी वह हमारे इलाके में प्रवेश करेंगी, मैं उस अधिकार का इस्तेमाल करूंगा जो कानून ने मुझे सौंपा है. अगस्त 2024 में बांग्लादेश में छात्रों के नेतृत्व में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद हसीना की सरकार गिरा दी गई थी, जिसके बाद हसीना देश छोड़कर भारत आ गई. जब अंतरिम सरकार ने सत्ता संभाली, तो एक विशेष अदालत ने आतंकवाद-रोधी कानून के तहत जारी एक आदेश से हसीना की राजनीतिक पार्टी अवामी लीग को भंग कर दिया. नवंबर 2025 में, 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई में अपनी भूमिका के लिए ‘इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल’ द्वारा मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराए जाने के बाद हसीना को उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई.

प्रत्यर्पण के अनुरोध को भारत ने किया स्वीकार

एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं ने इस कानूनी प्रक्रिया को दोषपूर्ण बताया है, जबकि संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश में चुनाव हुए, जिसके बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सत्ता में आई और तारिक रहमान ने नए प्रधानमंत्री के तौर पर कार्यभार संभाला. बांग्लादेश काफी समय से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है. नई दिल्ली ने प्रत्यर्पण के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है और उसका कहना है कि यह मामला कानूनी विचार-विमर्श के अधीन है.

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News Source: PTI

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