Kuldeep Singh Sengar: सुप्रीम कोर्ट सोमवार (29 दिसंबर) को सीबीआई की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है.
Kuldeep Singh Sengar: सुप्रीम कोर्ट सोमवार (29 दिसंबर) को सीबीआई की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है. सेंगर उन्नाव दुष्कर्म मामले में सजा काट रहा है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की तीन सदस्यीय अवकाशकालीन पीठ इस मामले पर विचार करेगी. अदालत अधिवक्ता अंजले पटेल और पूजा शिल्पकार द्वारा दायर एक अन्य स्वतंत्र याचिका पर भी सुनवाई करेगी, जिसमें हाईकोर्ट के आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है. सेंगर को 2019 में नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी पाया गया था. सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय में अपनी अपील में एलके आडवाणी मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि सांसद या विधायक जैसे सार्वजनिक पद धारण करने वाले किसी भी व्यक्ति को लोक सेवक माना जाएगा.
CBI की याचिका पर SC का रुख
एजेंसी ने तर्क दिया है कि उच्च न्यायालय ने यह घोषणा करके गलती की है कि अपराध के समय विधायक रहे सेंगर पीओसीएसओ के तहत मुकदमा चलाने योग्य लोक सेवक नहीं थे और उन्हें जमानत दे दी. सीबीआई ने कहा कि उच्च न्यायालय यह विचार करने में विफल रहा कि एक मौजूदा विधायक के संवैधानिक पद के कारण मतदाताओं का उस पर विश्वास और अधिकार रहता है. सीबीआई ने कहा कि पीओसीएसओ अधिनियम की व्याख्या करने में विफल रहने के कारण उच्च न्यायालय ने कानून में गलती की है. 23 दिसंबर को उच्च न्यायालय ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे सेंगर की सजा को निलंबित कर दिया, यह कहते हुए कि वह पहले ही सात साल और पांच महीने जेल में बिता चुके हैं. दुष्कर्म मामले में अपनी दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई लंबित रहने तक उच्च न्यायालय ने सेंगर की सजा निलंबित कर दी है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई हैं कई शर्तें
सेंगर ने इस मामले में दिसंबर 2019 के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है. हालांकि, वह जेल में ही रहेंगे क्योंकि वह पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में भी 10 साल की सजा काट रहे हैं और उस मामले में उन्हें जमानत नहीं मिली है. उच्च न्यायालय ने कई शर्तें लगाते हुए सेंगर को, जिसने पीड़िता का अपहरण और दुष्कर्म तब किया था जब वह नाबालिग थी, 15 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के तीन जमानती पेश करने का निर्देश दिया. न्यायालय ने उन्हें दिल्ली में पीड़िता के घर के 5 किलोमीटर के दायरे में न आने और न ही उसे या उसकी मां को धमकाने का निर्देश दिया. उच्च न्यायालय ने कहा कि किसी भी शर्त का उल्लंघन करने पर जमानत रद्द कर दी जाएगी. दुष्कर्म का मामला और इससे जुड़े अन्य मामले 1 अगस्त, 2019 को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर उत्तर प्रदेश की एक निचली अदालत से दिल्ली स्थानांतरित किए गए थे. पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में सेंगर की दोषसिद्धि के खिलाफ अपील भी लंबित है.
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