Home Latest News & Updates टैरिफ का खेल खेलते रह गए ट्रंप, भारत और यूरोप ने कर डाली ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’, जानें कैसे होगा फायदा

टैरिफ का खेल खेलते रह गए ट्रंप, भारत और यूरोप ने कर डाली ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’, जानें कैसे होगा फायदा

by Neha Singh
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India Europe Deal

India Europe Deal: यूरोपियन काउंसिल की प्रेसिडेंट वॉन डेर लेयेन ने ऐलान किया है कि भारत और यूरोपीय यूनियन “ऐतिहासिक ट्रेड एग्रीमेंट” करने जा रहे हैं. चलिए जानते हैं इससे भारत को कैसे फायदा होगा.

21 January, 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ भारत और यूरोप पर टैरिफ लगाकर ग्लोबल टेंशन का बढ़ा रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ भारत और यूरोप के बीचे एक ग्रैंड डील होने वाली है. यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मंगलवार को कहा कि भारत और यूरोपियन यूनियन एक “ऐतिहासिक ट्रेड एग्रीमेंट” के करीब हैं, जिससे दो अरब लोगों का एक ऐसा मार्केट बनेगा जो ग्लोबल GDP का लगभग एक चौथाई हिस्सा होगा. ट्रेड एग्रीमेंट के बाद भारत और यूरोपीय देशों को व्यापार करने में आसानी होगी.

ग्लोबल GDP का एक चौथाई हिस्सा कवर होगा

यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और वॉन डेर लेयेन 25 से 27 जनवरी तक भारत में रिपब्लिक डे सेलिब्रेशन में चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल होंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ समिट बातचीत कर सकें. दोनों पक्ष 27 जनवरी को भारत-EU समिट में ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ सहमति की घोषणा करने वाले हैं. दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में एक भाषण में, वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोप आज के ग्रोथ सेंटर्स और इस सदी के इकोनॉमिक पावरहाउस के साथ बिजनेस करना चाहता है. उन्होंने टीवी पर दिए भाषण में कहा, “मैं भारत जाऊंगी. अभी भी बहुत काम करना बाकी है. लेकिन हम एक ऐतिहासिक ट्रेड एग्रीमेंट के करीब हैं. कुछ लोग इसे सभी ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं. ऐसा एग्रीमेंट जिससे 2 अरब लोगों का मार्केट बनेगा, जो ग्लोबल GDP का लगभग एक चौथाई हिस्सा होगा.”

भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है यूरोप

यूरोपियन यूनियन भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है, जिसका फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में USD 135 बिलियन का बाइलेटरल गुड्स ट्रेड रिकॉर्ड किया गया है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से ट्रेड संबंधों में काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को पक्का करने के अलावा, दोनों पक्ष समिट में एक डिफेंस फ्रेमवर्क पैक्ट और एक स्ट्रेटेजिक एजेंडा भी पेश कर सकते हैं. भारत और यूरोपियन यूनियन 2004 से स्ट्रेटेजिक पार्टनर रहे हैं. यह बड़ा FTA ऐसे समय में पक्का किया जा रहा है जब वॉशिंगटन की ट्रेड और टैरिफ पॉलिसी को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, जिसका असर भारत और 27 देशों के EU दोनों पर पड़ा है. भारत और EU के एक जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक विजन पेश करने की भी उम्मीद है जो 2026-2030 के समय के लिए उनके रिश्तों को कंट्रोल करेगा.

भारत को कैसे होगा फायदा

EU और भारत ने सबसे पहले 2007 में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लिए बातचीत शुरू की थी, लेकिन 2013 में मकसद में कमी के कारण बातचीत रोक दी गई थी. जून 2022 में बातचीत फिर से शुरू की गई. यह ग्रैंड डील होने के बाद भारत को ट्रंप के टैक्स से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. डील के बाद यूरोप के 27 देशों के बाजारों तक भारत की पहुंच और आसान हो जाएगी. भारत के उन सेक्टरों को फायदा मिलेगा, जिनमें ज्यादा रोजगार और प्रोडक्ट की ज्यादा कीमत होती है. भारत अभी यूरोपीय देशों में कपड़े, चमड़े के सामान और समुद्री उत्पाद बेचता है, जिस पर यूरोपीय यूनियन 2 से 12 प्रतिशत टैक्स लगाता है. डील होने के बाद अगर टैरिफ कम होता है या खत्म हो जाता है, जो भारत का सामान सस्ता हो जाएगा और ज्यादा बिकेगा. इसके अलावा यूरोपीय देशों में दवाइयों और कैमिकल इंडस्ट्री में भारत की पहुंच बढ़ जाएगी.

यूरोप को मिलेगा भारत का बाजार

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद यूरोपी संघ के देशों कों दुनिया में तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक भारत में व्यापार करने में आसानी होगी. उनकी वाइन और अन्य शराब वाले प्रोडक्ट पर टैक्स कम हो जाएगा और सर्टिफिकेशन में भी आसानी होगी. इसके अलावा यूरोप की लग्जरी गाड़ियों को भी भारत में निर्यात करने में बढ़ावा मिलेगा. अभी, यूरोपियन वाइन और स्पिरिट्स पर 150 से 200 परसेंट टैक्स लगता है, जबकि लग्ज़री कारों पर 100 से 125 परसेंट इंपोर्ट ड्यूटी लगती है. इसके अलावा, इंडस्ट्रियल मशीनरी, इलेक्ट्रिकल सामान और केमिकल बनाने वाली यूरोपियन कंपनियों को भी फायदा हो सकता है, क्योंकि टैक्स और रेगुलेटरी रुकावटें कम हो जाएंगी.

भारतीय डिफेंस को यूरोप का सपोर्ट

ट्रेड डील के अलावा, प्रस्तावित सिक्योरिटी और डिफेंस पार्टनरशिप (SDP) दोनों पक्षों के बीच गहरे डिफेंस और सिक्योरिटी सहयोग को आसान बनाएगी. SDP डिफेंस डोमेन में इंटरऑपरेबिलिटी लाएगी और यह भारतीय फर्मों के लिए EU के SAFE (सिक्योरिटी एक्शन फॉर यूरोप) प्रोग्राम में भाग लेने के रास्ते खोलेगी. SAFE EU का 150 बिलियन यूरो का फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट है जिसे सदस्य देशों को डिफेंस की तैयारी में तेज़ी लाने के लिए फाइनेंशियल मदद देने के लिए बनाया गया है. इस समिट में, भारत और EU एक सिक्योरिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन एग्रीमेंट (SOIA) के लिए बातचीत भी शुरू करने वाले हैं. SOIA से दोनों पक्षों के बीच इंडस्ट्रियल डिफेंस सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

News Source:- PTI

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