UGC Protest: UGC कानून के विरोध में मंगलवार को छात्रों ने दिल्ली स्थित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) मुख्यालय के बाहर जमकर प्रदर्शन किया.
UGC Protest: UGC कानून के विरोध में मंगलवार को छात्रों ने दिल्ली स्थित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) मुख्यालय के बाहर जमकर प्रदर्शन किया. उनका कहना था कि आयोग द्वारा जारी किए गए नए नियमों से परिसरों में अराजकता फैल सकती है. भारी बैरिकेडिंग और बारिश के बीच सैकड़ों छात्रों ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया. प्रदर्शनकारी छात्रों ने UGC को मांगों की एक सूची सौंपी, जिसमें नियमों को पूरी तरह से वापस लेने की मांग शामिल थी. दिल्ली विश्वविद्यालय के पीएचडी छात्र आलोकित त्रिपाठी ने पीटीआई को बताया कि यूजीसी अधिकारियों को हमारी मांगें प्राप्त हुईं. वे हमारी मांगों की सूची में से कुछ बिंदुओं पर चर्चा करने के लिए सहमत हुए. त्रिपाठी ने कहा कि यूजीसी अधिकारियों ने कहा कि वे कमेटी में सामान्य समुदाय से एक सदस्य की नियुक्ति की हमारी मांग पर विचार करेंगे. दूसरे आयोग ने हमें आश्वासन दिया कि वह 15 दिनों के भीतर यानी 12 फरवरी से पहले एक समाधान निकालेगा और अंत में उन्होंने कहा कि झूठी शिकायतों को रोकने के लिए शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त नहीं रखी जाएगी.
नए नियमों से कॉलेजों में फैलेगी अराजकता
त्रिपाठी ने कहा कि छात्रों को आश्वासन दिया गया है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी. विरोध प्रदर्शन करने वालों ने छात्र समुदाय से एकता की अपील करते हुए उनसे यूजीसी के भेदभाव को ना कहने का आग्रह किया. यूजीसी द्वारा 13 जनवरी को अधिसूचित नए नियम ने सामान्य वर्ग के छात्रों के बीच व्यापक आलोचना को जन्म दिया है. कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए लागू किए गए नए नियमों के तहत यूजीसी ने संस्थानों को विशेष समितियां, हेल्पलाइन और निगरानी दल गठित करने को कहा है ताकि विशेषकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की शिकायतों का निपटारा किया जा सके. छात्रों का कहना है कि नए नियमों से कॉलेजों में पूरी तरह अराजकता फैल जाएगी क्योंकि अब सबूत का बोझ पूरी तरह से आरोपी पर आ जाएगा और गलत तरीके से आरोपी ठहराए गए छात्रों के लिए कोई सुरक्षा उपाय नहीं होंगे.
छात्रों के बीच भेदभाव को मिलेगा बढ़ावा
त्रिपाठी ने कहा कि नए नियम बेहद कठोर हैं. पीड़ित की परिभाषा पहले से ही तय है. परिसर में कोई भी पीड़ित हो सकता है. श्री वेंकटसेवारा कॉलेज के राजनीति विज्ञान स्नातक छात्र हर्ष पांडे ने कहा कि नए नियम बिना उचित विचार-विमर्श के लाए गए हैं. पांडे ने कहा कि हम इन नियमों को पूरी तरह से वापस लेने की मांग करते हैं क्योंकि इससे भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा. इसका इस्तेमाल परिसर में निर्दोष छात्रों को अपराधी ठहराने के लिए किया जाएगा. इस बीच, वामपंथी समर्थित छात्र समूह अखिल भारतीय छात्र संघ ने यूजीसी नियमों का समर्थन किया है. कहा गया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को समानता संरक्षण के दायरे में शामिल करना एक स्वागत योग्य कदम है. UGC नियमों ने देशभर में सामान्य छात्रों में उबाल पैदा कर दिया है. छात्रों को डर है कि विश्वविद्यालय परिसरों में नई समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
ये भी पढ़ेंः ‘सरकार से बड़ा पद देंगे’ इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री बनेंगे संत? शंकराचार्य ने दिया ऑफर
News Source: Press Trust of India (PTI)
