UGC Regulation 2026 : यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन होना शुरू हो गया है. अब ये आंदोलन दिल्ली तक पहुंच गया है और अब इस विवाद में अयोध्या के जगद्गुरु परमहंस की भी एंट्री हो गई है.
UGC Regulation 2026 : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई गाइडलाइंस का विरोध तेज हो गया है और कई यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स सड़कों पर उतर आए हैं. इस विवाद में अब अयोध्या के जगद्गुरु परमहंस आचार्य की भी एंट्री हो गई है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि यूजीसी के नए नियमों को वापस लिया जाए या फिर मुझे इच्छा मृत्यु की इजाजत दी जाए. नए नियमों के खिलाफ एक समुदाय पर काफी रोष है और इन नियमों को लेकर स्टूडेंट्स का कहना है कि सवर्ण छात्रों को पहले ही दोषी बना दिया गया है.
नए नियमों के तहत यूजीसी के खिलाफ प्रदर्शन दिल्ली में यूजीसी के कार्यालय तक पहुंच गया है. प्रदर्शनकारियों ने सरकार और यूजीसी के खिलाफ नियमों को स्टूडेंट्स के खिलाफ बताया है और इसको तत्काल वापस लेना चाहिए. इस प्रदर्शन में सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स भारी संख्या में शामिल हुए.
बीजेपी नेताओं ने भी दिया इस्तीफा
यूपी में इस मुद्दे को लेकर सियासत भी तेज हो गई है. लखनऊ, रायबरेली समेत कई जिलों में बीजेपी नेताओं ने पार्टी को अपना इस्तीफा तक सौंप दिया है. दूसरी तरफ यूपी पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने भी सीटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा दे दिया है. इसके अलावा उन्होंने अपने इस्तीफे की वजह शंकराचार्य के अपमान को भी बताया है.
क्या बोले शिक्षा मंत्री
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स आश्वस्त किया कि नए नियमों का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना है, न कि उत्पीड़न करना है. उन्होंने आगे कहा कि बहुत विनम्रता से आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी भी शख्स का उत्पीड़न नहीं किया जाएगा. साथ ही भेदभाव के नाम पर किसी को भी कानून का मिसयूज भी नहीं करने दिया जाएगा. इसके अलावा मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि चाहे यूजीसी, भारत सरकार और राज्य सरकारें हो, सभी का सामूहिक दायित्व है कि कानून का पालन निष्पक्षता के साथ होना चाहिए.
जानें क्या है मामला?
UGC ने 13 जनवरी को प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026 लागू कर दिया. इस नियम का उद्देश्य उच्च संस्थानों अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग, EWS वर्ग, महिलाओं और दिव्यांग छात्रों और टीचर के साथ भेदभाव को समाप्त करने के बारे में बताया गया है.
सभी विश्वविद्यालय और कॉलेज में 9 सदस्यों वाली इक्विटी कमेटी गठित करने का प्रावधान किया गया है. इस समिति में संस्थान प्रमुख, 3 प्रोफेसर, एक कर्मचारी, दो सामान्य नागरिक, 2 विशेष रूप से आमंत्रित छात्र और एक को-ऑर्डिनेटर शामिल होंगे. साथ ही नियमों के मुताबिक, 5 सदस्य SC, ST, OBC, दिव्यांगजन और महिला होंगे.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
