Home Latest News & Updates वित्त मंत्री की रिपोर्ट: कक्षा 8 के बाद छात्रों को पढ़ाना बड़ी चुनौती, शहरी-ग्रामीण अंतर अब भी बरकरार

वित्त मंत्री की रिपोर्ट: कक्षा 8 के बाद छात्रों को पढ़ाना बड़ी चुनौती, शहरी-ग्रामीण अंतर अब भी बरकरार

by Sanjay Kumar Srivastava
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वित्त मंत्री की रिपोर्ट: कक्षा 8 के बाद छात्रों को पढ़ाना बड़ी चुनौती, शहरी-ग्रामीण अंतर अब भी बरकरार

Economic Survey: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में स्कूली शिक्षा के प्रति चिंता जताई गई है. सर्वेक्षण के अनुसार, भारत ने प्रारंभिक स्तर पर नामांकन में तो सफलता पाई है.

Economic Survey: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में स्कूली शिक्षा के प्रति चिंता जताई गई है. सर्वेक्षण के अनुसार, भारत ने प्रारंभिक स्तर पर नामांकन में तो सफलता पाई है, लेकिन माध्यमिक स्तर पर छात्रों को स्कूल भेजना एक बड़ी चुनौती है. वर्तमान में माध्यमिक स्तर पर नामांकन दर केवल 52.2 प्रतिशत है, जो काफी कम बनी हुई है. इसका मुख्य कारण स्कूलों का असमान वितरण है. देश के 54 प्रतिशत स्कूल केवल प्राथमिक शिक्षा प्रदान करते हैं, जबकि माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा का बुनियादी ढांचा कमजोर है. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच यह अंतर और भी गहरा है, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 17.1 प्रतिशत स्कूल माध्यमिक शिक्षा देते हैं, वहीं शहरों में यह आंकड़ा 38.1 प्रतिशत है. रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि कक्षा 8 के बाद छात्रों को शिक्षा प्रणाली में बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार और माध्यमिक स्कूलों की संख्या बढ़ाना अनिवार्य है.

माध्यमिक स्तर पर नामांकन में गिरावट

दस्तावेज़ में इस असमानता पर प्रकाश डाला गया है, जो ग्रामीण छात्रों की उच्च कक्षाओं तक पहुंच को सीमित करती है, जिसके परिणामस्वरूप प्रवेश में नुकसान और उच्चतर ड्रॉपआउट दर होती है. इसमें बताया गया है कि ये असंतुलन नामांकन में दिखते हैं, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत और प्रारंभिक स्तरों से लेकर माध्यमिक और उच्चतर स्तरों तक नामांकन में गिरावट देखी जाती है. हालांकि शहरी क्षेत्रों में माध्यमिक स्तर तक नामांकन बढ़ता है. कक्षावार नामांकन रुझान माध्यमिक स्तर पर गिरावट को और भी स्पष्ट करते हैं. सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि पोषण शक्ति निर्माण और समग्र शिक्षा अभियान जैसी योजनाओं के माध्यम से बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की क्षमता को मजबूत करके भारत ने स्कूली नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे शिक्षा तक पहुंच और समानता को बढ़ावा मिला है.

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान को मजबूत करने पर बल

सर्वेक्षण में आगे कहा गया है कि विशेष रूप से जब ध्यान नामांकन से हटकर सीखने के परिणामों पर केंद्रित हो रहा है, तो और अधिक सुधार की आवश्यकता है. स्कूलों का विस्तार करने, कक्षा 7 तक के स्कूलों को उन्नत बनाने और खुली शिक्षा को मजबूत करने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप छात्रों की उपस्थिति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं. इसमें सुझाव दिया गया है कि बुनियादी ढांचे में सुधार, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद को मजबूत करके शिक्षकों के कौशल में वृद्धि करना और अभिभावकों को शासन में शामिल करना एक समावेशी, शिक्षार्थी-केंद्रित वातावरण का निर्माण कर सकता है. इसमें बताया गया है कि इन रणनीतियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप पाठ्यक्रम और मूल्यांकन सुधारों के साथ मिलाकर और पीएम ई-विद्या जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों का उपयोग करके दूरदराज के क्षेत्रों में भी उच्च गुणवत्ता वाली समान शिक्षा प्रदान की जा सकती है.

ये भी पढ़ेंः आर्थिक सर्वेक्षण: कृषि क्षेत्र से खुलेगा समृद्धि का रास्ता, पशुधन और मत्स्य पालन के दम पर 4.4% की वृद्धि

News Source: Press Trust of India (PTI)

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