Human Rights Commission: हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने करनाल के एक निजी स्कूल में कक्षा 7 के छात्र को शिक्षक द्वारा बार-बार थप्पड़ मारने की घटना पर कड़ा संज्ञान लिया है.
Human Rights Commission: हरियाणा के करनाल जिले में एक छात्र की पिटाई पर मानवाधिकार आयोग सख्त हो गया है. हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने करनाल के एक निजी स्कूल में कक्षा 7 के छात्र को शिक्षक द्वारा बार-बार थप्पड़ मारने की घटना पर कड़ा संज्ञान लिया है. आयोग ने करनाल के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को इस मामले की गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं. आयोग के अनुसार, ऐसी घटनाएं बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और गरिमा पर गहरा प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं. आयोग ने स्कूल के प्रधानाचार्य को शिक्षक के खिलाफ की गई कार्रवाई से अवगत कराने को कहा है. साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए सुरक्षा कदमों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है. आयोग ने यह कदम स्कूली शिक्षा में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया है. आयोग ने घटना को बच्चे के मौलिक और वैधानिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है. मानवाधिकार पैनल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा (सेवानिवृत्त) ने इस बात पर जोर दिया कि विद्यालय कानूनी और नैतिक रूप से एक सुरक्षित, गरिमापूर्ण और बाल-अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए बाध्य है.
मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट
उन्होंने कहा कि अनुशासन कभी भी भय, हिंसा या अपमान के माध्यम से लागू नहीं किया जा सकता है. यदि ऐसा होता है तो कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी. शिकायत में बताया गया है कि एक मामूली गलती के लिए शिक्षक ने अन्य छात्रों की उपस्थिति में छात्र को बार-बार थप्पड़ मारा, जिससे उसे गंभीर मानसिक आघात, भय, अपमान और असुरक्षा की भावना का सामना करना पड़ा. न्यायमूर्ति बत्रा (सेवानिवृत्त) ने अपने आदेश में कहा कि यह कृत्य किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 और 82 तथा बच्चों के नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 17 का घोर उल्लंघन है. आदेश में आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चे के पालन-पोषण की जिम्मेदारी केवल माता-पिता की ही नहीं बल्कि विद्यालय की भी होती है. सकारात्मक पालन-पोषण और बाल-केंद्रित अनुशासन भय और अपमान के बजाय मार्गदर्शन, सहानुभूति और अहिंसक सुधार पर केंद्रित होती हैं.
आयोग ने घटना को बताया अशोभनीय
कहा कि ऐसे तरीके सुरक्षित शिक्षण वातावरण के लिए आवश्यक हैं. आयोग ने कहा कि वर्तमान घटना अशोभनीय है, जिसके परिणामस्वरूप बच्चे की गरिमा, मानसिक स्वास्थ्य और मौलिक अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है. आयोग ने करनाल के जिला शिक्षा अधिकारी को जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी के समन्वय से विद्यालय के कामकाज की समयबद्ध जांच करने का निर्देश दिया, जिसमें विशेष रूप से बाल शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधानों, विशेष रूप से धारा 17, जो बच्चों को शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न को सख्ती से प्रतिबंधित करती है, के अनुपालन का उल्लेख किया गया है. करनाल के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी और विद्यालय के प्रधानाध्यापक सहित सभी संबंधित अधिकारियों को 18 मार्च को निर्धारित अगली सुनवाई की तारीख से कम से कम एक सप्ताह पहले अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
