Suryakumar Yadav : टी-20 विश्व कप जीतने के बाद कप्तान सूर्या का कद पहले से काफी बढ़ गया है. इसी बीच कप्तान ने कहा कि ईशान किशन को गट-फीलिंग की वजह से टीम में शामिल किया.
Suryakumar Yadav : टी-20 विश्व कप में अपना परचम लहराने के बाद खिलाड़ियों को हर जगह सम्मान मिल रहा है. कप्तान सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में खेले गए इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करके दिखाया और एक मैच को छोड़कर सभी मुकाबलों में एक बाद एक विरोधी टीमों को हरा दिया. इसी बीच सूर्या ने बड़ा दिया और उनका कहना है कि पावर-हिटर ईशान किशन को टी-20 विश्व कप जीतने वाली टीम में अपनी ‘गट फीलिंग’ के आधार पर शामिल किया. सूर्या ने आगे कहा कि उन्हें लगा कि इस बिहार के बल्लेबाज में एक्स फैक्टर है जो मैच का पूरा रुख बदलने का दम रखता है. बता दें कि सूर्या ने यहां तक कह दिया है कि छोटे प्रारुप में भारत के पास इतना टैलेंट है कि वह दो-तीन शानदार टीम बना सकता है.
गट-फीलिंग के आधार पर लिया फैसला
रविवार को समाचार एजेंसी PTI के एक पॉडकास्ट में दिए इंटरव्यू में सूर्यकुमार से पूछा गया कि क्या वह डेटा-आधारित कप्तान हैं या अपनी गट-फीलिंग पर चलने वाले कप्तान हैं? इस पर उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह गट-फीलिंग वाला फैसला था और उसमें थोड़ा डेटा का भी तड़का था. उस समय जितेश शर्मा को टीम में शामिल करने वाला फैसला बहुत कठोर था, क्योंकि वह बीते एक साल से ही टीम के साथ क्रिकेट खेल रहे हैं और अगर उन्हें इससे ज्यादा अनुभव होता तो कहानी कुछ और सकती थीं.
सूर्या ने किया ईशान किशन को फोन
सूर्या ने आगे कहा कि हमें जितेश के बजाय ईशान को चुनना पड़ा, तो मुझे बहुत दुख हुआ था. लेकिन उस वक्त हमें ऐसे ओपनर की जरूरत थी जो टॉप ऑर्डर में आकर स्कोर बोर्ड को तेजी से आगे बढ़ा सके. साथ ही इस दौरान किसी न किसी खिलाड़ी को तो बाहर बैठना ही था. उन्होंने आगे बताया कि किशन को टीम में शामिल करने को लेकर जब 27 वर्षीय बल्लेबाज को फोन किया और पूछा कि छोटू विश्व कप जितवाएगा? इस पर किशन ने कहा कि भरोसा करोगे? जिस पर कप्तान ने कहा कि चल, किया.
हमारी सोच एक जैसी : सूर्या
इसी बीच टी-20 फॉर्मेट के कप्तान से हेड कोच गौतम गंभीर के रिश्ते को लेकर भी सवाल किया गया. इस पर सूर्या ने कहा कि जब मैंने कप्तान का पद संभाला और वह कोच बने तो, उसके बाद टीम को चुनने के लिए साथ बैठे, उस वक्त दोनों की सोच एक जैसे ही थी. उन्होंने कहा कि हमने जो 15 नाम सुझाए थे, उनमें से 14 नाम एक जैसे थे. इसका सीधा मलतब है कि हमारी सोच एक जैसी थी. जब लक्ष्य साफ होते हैं, तो कोई बहस नहीं होती, सिर्फ चर्चा होती है.
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