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जल्द ही रेल नेटवर्क के जरिए शेष भारत से जुड़ेगा पूर्वोत्तर राज्य, बनेगा 40 किलोमीटर लंबा भूमिगत ट्रैक

by Sanjay Kumar Srivastava
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विकास को रफ्तारः जल्द ही रेल नेटवर्क के जरिए शेष भारत से जुड़ेगा पूर्वोत्तर राज्य, बनेगा 40 किलोमीटर लंबा भूमिगत ट्रैक

Rail Connectivity: पूर्वोत्तर राज्य जल्द ही रेल नेटवर्क के जरिए शेष भारत से जुड़ जाएगा. केंद्र सरकार की इस पहल से पूर्वोत्तर राज्य के विकास को गति मिलेगी.

Rail Connectivity: पूर्वोत्तर राज्य जल्द ही रेल नेटवर्क के जरिए शेष भारत से जुड़ जाएगा. केंद्र सरकार की इस पहल से पूर्वोत्तर राज्य के विकास को गति मिलेगी. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में 40 किलोमीटर लंबे गलियारे के साथ भूमिगत रेलवे ट्रैक बिछाने की योजना बनाई जा रही है, जो पूर्वोत्तर को शेष भारत से जोड़ेगा. अपने आकार के कारण ‘चिकन नेक’ कहलाने वाला यह गलियारा उत्तरी पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी क्षेत्र में स्थित 20 किलोमीटर से अधिक चौड़ी एक पट्टी है. यह पट्टी नेपाल और बांग्लादेश के बीच स्थित है, जबकि भूटान और चीन कुछ सौ किलोमीटर दूर हैं. रेल मंत्रालय के लिए केंद्रीय बजट आवंटन पर रेल मंत्री वैष्णव ने कहा कि पूर्वोत्तर को देश के शेष भाग से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर लंबे गलियारे के लिए विशेष योजना बनाई गई है. उन्होंने कहा कि भूमिगत रेलवे ट्रैक बिछाने और मौजूदा ट्रैक को चार लेन का बनाने की योजना पर काम चल रहा है.

जमीन के नीचे बिछाई जाएंगी पटरियां

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के महाप्रबंधक चेतन कुमार श्रीवास्तव और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) हितेंद्र गोयल ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि भूमिगत लाइनें पश्चिम बंगाल के तीन मिले हाट और रंगपानी रेलवे स्टेशनों के बीच होंगी. श्रीवास्तव ने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से यह भूमिगत मार्ग महत्वपूर्ण है. इनमें से एक लाइन पश्चिम बंगाल के बागडोगरा की ओर जाएगी, जो देश की वायु रक्षा प्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. श्रीवास्तव ने बताया कि ये पटरियां मैदानी इलाके में लगभग 20-24 मीटर जमीन के नीचे बिछाई जाएंगी. गोयल ने आगे कहा कि भूमिगत पटरियों के साथ-साथ इस मार्ग पर मौजूदा दोहरी लाइन को चार-लाइन में बदला जाएगा.

पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास मोदी सरकार की प्राथमिकता

एक अधिकारी ने बताया कि जब ये योजनाएं लागू हो जाएंगी, तो इसका मतलब होगा कि रणनीतिक गलियारे में रेलवे की छह लाइनें होंगी – चार जमीन के ऊपर और दो जमीन के नीचे. पिछले साल असम ने ‘चिकन नेक’ को प्रभावी ढंग से बाईपास करने के लिए वैकल्पिक सड़क मार्गों की खोज को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था, जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने चीन में एक विवादास्पद बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत के पूर्वोत्तर राज्य ‘भूमि से घिरे’ हैं और उनके पास उनके देश के अलावा समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है. कहा कि क्षेत्र के विकास में रेल कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

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News Source: Press Trust of India (PTI)

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